आगरा में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज, वल्नरेबिलिटी मैपिंग के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर
डीएम मनीष बंसल ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण, मतदाताओं को डराने-धमकाने वालों के खिलाफ प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। आगामी विधानसभा निर्वाचन को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए आगरा प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में सूरसदन प्रेक्षागृह में वल्नरेबिलिटी मैपिंग को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारियों, सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल मजिस्ट्रेट को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, मतदाताओं को भयमुक्त माहौल उपलब्ध कराने और चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी को रोकने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
डीएम मनीष बंसल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे व्यक्तियों और तत्वों की पहचान की जाए, जो मतदाताओं को डराने-धमकाने, अनुचित दबाव बनाने या मतदान से वंचित करने का प्रयास कर सकते हैं। उनके विरुद्ध समय रहते प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्या है वल्नरेबिलिटी मैपिंग और क्यों है जरूरी?

प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनरों ने बताया कि वल्नरेबिलिटी मैपिंग का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता की स्वतंत्र और निर्भीक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके तहत ऐसे क्षेत्रों, मतदाता समूहों और व्यक्तियों की पहचान की जाती है, जहां मतदाताओं पर डर, धमकी, दबाव या बाहुबल का इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।
यह व्यवस्था भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 2007 में स्थापित की गई थी। इसका आधार ‘कोई मतदाता पीछे न छूटे’ का सिद्धांत है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
तीन चरणों में होगी संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान

प्रशिक्षण में वल्नरेबिलिटी मैपिंग के तीन प्रमुख चरणों की जानकारी दी गई।
- संवेदनशील मतदाताओं और क्षेत्रों की पहचान: मतदाताओं, मतदाता समूहों तथा गांव-मजरा और क्षेत्रवार क्रिटिकल बूथों को चिह्नित करना।
- प्रभाव डालने वाले व्यक्तियों और कारणों की पहचान: ऐसे व्यक्तियों और परिस्थितियों का पता लगाना, जिनसे मतदाताओं में भय या दबाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
- निरोधात्मक कार्रवाई की रणनीति: चिह्नित व्यक्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों के संबंध में पहले से कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करना।
मास्टर ट्रेनरों ने बताया कि मैपिंग के दौरान पिछले चुनावों का मतदान प्रतिशत, कम या अधिक मतदान के मामलों की जांच, चुनाव पूर्व प्राप्त शिकायतें, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन, असामाजिक तत्वों का प्रभाव, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तथा धनबल और बाहुबल के दुरुपयोग जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
संवेदनशील गांवों और बस्तियों का अधिकारी करेंगे भ्रमण
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने निर्देश दिए कि संबंधित सेक्टर अधिकारी और पुलिस अधिकारी अपने आवंटित क्षेत्रों में वर्तमान एवं पिछले चुनावों के रिकॉर्ड, स्थानीय सूचनाओं और क्षेत्रीय भ्रमण के आधार पर वल्नरेबिलिटी मैपिंग की कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील गांवों, बस्तियों और मतदाता समूहों की पहचान कर वल्नरेबिलिटी उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों एवं कारणों का विवरण निर्धारित प्रारूप में तैयार किया जाए। इसके लिए सेक्टर अधिकारी और सेक्टर पुलिस अधिकारी संयुक्त रूप से क्षेत्र का भ्रमण करें।
डीएम ने निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में कम से कम तीन बार भ्रमण कर मतदाताओं से संवाद स्थापित किया जाए। इसका उद्देश्य मतदाताओं का विश्वास बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति भय, दबाव या धमकी के कारण मतदान से वंचित न रहे।
मतदाताओं को मतदान केंद्र तक मिले निर्बाध पहुंच
जिलाधिकारी ने कहा कि वल्नरेबिलिटी मैपिंग केवल संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। ऐसे व्यक्तियों की पहचान भी जरूरी है, जो मतदाताओं को प्रभावित करने या मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कर सकते हैं।
उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आपसी समन्वय से प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई की रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही मतदान केंद्रों तक मतदाताओं की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।
सेक्टर मैनेजमेंट प्लान में शामिल होंगे रूट मैप और जरूरी संपर्क नंबर
प्रशिक्षण में सेक्टर अधिकारियों को सेक्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इस योजना में मतदान केंद्रों का रूट मैप, संबंधित अधिकारियों का विवरण, पुलिस स्टेशन, जिम्मेदार व्यक्तियों और आवश्यक संपर्क नंबरों को शामिल किया जाएगा।
संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय ग्राम प्रधान, सरपंच, जनप्रतिनिधियों, बीट पुलिस कर्मियों और संबंधित विभागों के साथ बैठकें आयोजित कर मतदाताओं के बीच विश्वास का माहौल बनाने पर भी जोर दिया गया।
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1950 हेल्पलाइन और C-VIGIL ऐप के प्रति जागरूक होंगे मतदाता
प्रशिक्षण में मतदाताओं को निर्वाचन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और वोटर इन्फॉर्मेशन स्लिप के वितरण की निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा मतदाताओं को 1950 कॉल सेंटर और C-VIGIL ऐप के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया, ताकि निर्वाचन से जुड़ी किसी भी शिकायत को समय पर दर्ज कराया जा सके और संबंधित अधिकारी उस पर आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वल्नरेबिलिटी मैपिंग और उससे जुड़ी सभी गतिविधियों को गंभीरता, निष्पक्षता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा किया जाए।
प्रशिक्षण में ये अधिकारी रहे मौजूद
सूरसदन प्रेक्षागृह में आयोजित प्रशिक्षण में अपर पुलिस आयुक्त सचिन्द्र पटेल, अपर जिलाधिकारी (नगर)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) आजाद भगत सिंह, अपर पुलिस उपायुक्त राजकुमार सिंह, एसडीएम नरेंद्र गंगवार सहित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सेक्टर मजिस्ट्रेट और जोनल मजिस्ट्रेट उपस्थित रहे।
प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा निर्वाचन में प्रत्येक मतदाता बिना किसी डर, दबाव या बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। इसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों की समय रहते पहचान और पुलिस-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


