जैतपुर कलां, जगनेर, फतेहपुर सीकरी, नगर क्षेत्र और अकोला के प्रधानाध्यापकों ने लिया प्रशिक्षण; विद्यालय नेतृत्व, निपुण भारत मिशन और शैक्षिक नवाचारों पर हुई चर्चा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता और विद्यालय प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में सक्षम एवं समर्थ मॉड्यूल आधारित प्रधानाध्यापक प्रशिक्षण के सातवें बैच का समापन हुआ। प्रशिक्षण उप शिक्षा निदेशक एवं डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह के दिशा-निर्देशन में संचालित किया गया।
इस प्रशिक्षण में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने प्रतिभाग किया। प्राथमिक विद्यालयों के प्रशिक्षण में विकासखंड जैतपुर कलां और जगनेर के प्रधानाध्यापक शामिल हुए, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रशिक्षण में फतेहपुर सीकरी, नगर क्षेत्र और अकोला के प्रधानाध्यापकों ने सहभागिता की।
विद्यालय नेतृत्व और शैक्षिक उन्नयन पर दिया गया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न सत्रों में विद्यालय नेतृत्व, शैक्षिक उन्नयन, अंतरविभागीय समन्वय, सरकारी योजनाओं और विभिन्न पोर्टल की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी गई।
डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय और कल्पना सिन्हा ने अंतरविभागीय समन्वय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं में प्रधानाध्यापकों की भूमिका को स्पष्ट किया। वहीं यशपाल सिंह ने गतिविधियों के माध्यम से शैक्षिक उन्नयन के लिए नवाचार और शैक्षिक तकनीकी की अवधारणा को समझाया।
उन्होंने निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रधानाध्यापकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
विद्यालय के विकास में प्रधानाध्यापक की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रशिक्षण सत्र में पुष्पेंद्र सिंह ने विद्यालय के शैक्षिक एवं सामाजिक विकास में प्रधानाध्यापक के नेतृत्व की महत्ता बताई। उन्होंने विद्यालय के समग्र विकास के लिए प्रभावी नेतृत्व और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सामुदायिक सहभागिता, बाल वाटिका और ईसीसीई एजुकेटर की भूमिका पर सत्र संचालित किया। उन्होंने पुरातन छात्र समुदाय और विभिन्न पोर्टल के माध्यम से विद्यालय विकास में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उपायों की जानकारी दी।
बाल मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य पर हुई चर्चा
प्रशिक्षण में लक्ष्मी शर्मा ने बाल मनोविज्ञान, सकारात्मक शैक्षिक वातावरण और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण तैयार करना उनके सीखने और समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाध्यापकों को विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक माहौल विकसित करने से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई।
डेंगू और मलेरिया से बचाव के उपाय बताए
प्रशिक्षण के विशेष सत्र में नगर निगम आगरा की एंटोमोलॉजिस्ट शालिनी सिंह और रितु सिंह ने संक्रामक रोगों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने डेंगू और मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए आवश्यक सावधानियों के बारे में बताया।
इस सत्र का उद्देश्य शिक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करना रहा।
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प्रशिक्षण में सीखे गए कौशल विद्यालयों में लागू करें: प्राचार्य
समापन अवसर पर डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसमें अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभाव विद्यालयों में दिखाई दे। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को अपने विद्यालयों में लागू करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ प्रवक्ता ललित मोहन पाल ने भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई गतिविधियों और शैक्षिक नवाचारों को विद्यालयों में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के दोनों प्रशिक्षण बैचों के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
डायट के अधिकारियों और कर्मचारियों का रहा सहयोग
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय और पुष्पेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता ललित मोहन पाल, प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, पुष्पेंद्र सिंह, रचना यादव, संजीव कुमार सत्यार्थी, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित डायट का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
प्रशिक्षण के माध्यम से प्रधानाध्यापकों को विद्यालय नेतृत्व, शैक्षिक नवाचार, सामुदायिक सहभागिता और निपुण भारत मिशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिली। अब इन अनुभवों को विद्यालयों में लागू कर शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर बनाने पर जोर रहेगा।


