नानपुर, बिचपुरी की शिक्षिका ने जापान के स्कूलों में सीखी शिक्षण पद्धतियां और संस्कृति; पर्यावरण शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय शिक्षक संवाद को मिलेगा बढ़ावा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। जनपद आगरा के बिचपुरी ब्लॉक स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय नानपुर की शिक्षिका मिली जैन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित टीचर एक्सचेंज प्रोग्राम में भाग लेकर जिले का गौरव बढ़ाया है। उन्हें भारत के नौ अन्य शिक्षकों के साथ जापान जाकर वहां की शिक्षण पद्धतियों, विद्यालयी व्यवस्था और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम से प्राप्त अनुभवों का लाभ अब आगरा के विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी मिल सकेगा।
यह कार्यक्रम एशिया पैसिफिक कल्चरल सेंटर फॉर यूनेस्को और पर्यावरण शिक्षण केंद्र के संयुक्त प्रयासों से आयोजित किया गया। भारतीय शिक्षकों का 10 सदस्यीय दल पर्यावरण शिक्षण केंद्र के उत्सव मोदी के मार्गदर्शन में सात दिनों तक जापान में रहा। इस दौरान दल के सदस्यों ने विभिन्न विद्यालयों का भ्रमण कर वहां की शिक्षण विधियों और शैक्षिक गतिविधियों का अनुभव प्राप्त किया।
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जापान के स्कूलों में शिक्षण पद्धतियों को समझने का मिला अवसर

टीचर एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत भारतीय शिक्षकों ने जापान के अहिरा म्युनिसिपल एलिमेंट्री स्कूल, अडाची जूनियर हाई स्कूल और वायो कूडान गर्ल्स जूनियर एवं सीनियर हाई स्कूल का भ्रमण किया। यहां शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाने के तरीकों, विद्यार्थियों के साथ संवाद और विद्यालयों में अपनाई जाने वाली शैक्षिक गतिविधियों को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय और जापानी शिक्षकों ने अपनी-अपनी शिक्षण पद्धतियों, शैक्षिक अनुभवों और सांस्कृतिक परंपराओं का आपस में आदान-प्रदान किया। इस संवाद के माध्यम से दोनों देशों के शिक्षकों को एक-दूसरे की कार्यशैली और शिक्षा व्यवस्था से सीखने का अवसर मिला।
आगरा के विद्यार्थियों तक पहुंचेंगे जापान के अनुभव
शिक्षिका मिली जैन की इस अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक यात्रा को आगरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जापान में प्राप्त अनुभवों और शिक्षण विधियों की जानकारी को स्थानीय विद्यालयों में साझा करने से शिक्षकों को नए प्रयोग करने और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का उद्देश्य अलग-अलग देशों की शिक्षा प्रणालियों को समझना, उपयोगी अनुभव साझा करना और शिक्षण कार्य में नए विचारों को प्रोत्साहित करना है। मिली जैन की सहभागिता से आगरा में शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
मिली जैन ने अधिकारियों और मार्गदर्शकों का जताया आभार
शिक्षिका मिली जैन ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय डायट आगरा के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह, एडी बेसिक धीरेंद्र कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी उमेश गौतम और डायट प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय को दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों में मार्गदर्शन और सहयोग मिलने से शिक्षकों को नए अवसर प्राप्त होते हैं। उन्होंने जापान जाने वाले भारतीय दल में चयनित किए जाने पर पर्यावरण शिक्षण केंद्र की समन्वयक प्रीति आर. कन्नौजिया और जितेंद्र पटेल के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
विप्रो अर्थियन कार्यक्रम से आगरा के विद्यार्थियों को मिल चुकी हैं उपलब्धियां
मिली जैन ने पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में जनपद आगरा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डायट आगरा के प्रवक्ता एवं पर्यावरण शिक्षण केंद्र के मास्टर ट्रेनर डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय के प्रयासों से विप्रो अर्थियन पर्यावरण मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विद्यार्थियों और शिक्षकों को कई अवसर मिले हैं।
उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत आगरा के 25 छात्र-छात्राओं और पांच शिक्षकों को बेंगलुरु की निःशुल्क हवाई यात्रा का अवसर मिला है। इसके अलावा पांच विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर अर्थियन पर्यावरण मित्र पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।
उन्होंने यह भी बताया कि इसी कार्यक्रम के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में पूर्व माध्यमिक विद्यालय नानपुर, बिचपुरी के 15 बच्चों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है। इन उपलब्धियों से विद्यालय में पर्यावरण शिक्षा और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहन मिला है।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव से शिक्षा को मिलेगा नया दृष्टिकोण
जापान के टीचर एक्सचेंज प्रोग्राम में मिली जैन की सहभागिता ने स्थानीय स्तर पर शिक्षकों के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखने का अवसर सामने रखा है। जापानी विद्यालयों में देखी गई शिक्षण विधियों और सांस्कृतिक गतिविधियों को समझकर शिक्षक अपने विद्यालयों में उपयोगी बदलावों पर विचार कर सकते हैं।
शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार किए जा रहे प्रयासों के बीच यह उपलब्धि आगरा के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। इससे भविष्य में शैक्षिक नवाचार, पर्यावरण जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।


