डायट आगरा में कवच मॉड्यूल आधारित तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, शिक्षकों को सिखाए सुरक्षा के उपाय
माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अग्नि सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और आपदा प्रबंधन की दी गई जानकारी; प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। विद्यालयों में सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कवच मॉड्यूल आधारित सुरक्षा एवं संरक्षा विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षकों को अग्नि सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सुरक्षा और प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यालयों में संभावित जोखिमों की पहचान करने, आपातकालीन परिस्थितियों में उचित कदम उठाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूक एवं सक्षम बनाना रहा। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
अग्नि सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी पर विशेष सत्र

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग के प्रतिनिधियों ने अग्नि सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। शिक्षकों को आग लगने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों और अग्निशमन उपकरणों के उचित उपयोग के बारे में बताया गया।
वहीं, साइबर सिक्योरिटी से जुड़े सत्र में उमा वार्ष्णेय और मयंक चौधरी ने डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव और ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सतर्कता बरतने के उपायों की जानकारी दी। इन सत्रों का उद्देश्य शिक्षकों को डिजिटल दुनिया में सामने आने वाले जोखिमों के प्रति जागरूक करना और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
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भूकंप, बाढ़ और सर्पदंश से बचाव के उपायों पर चर्चा

प्रशिक्षण के सह प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने आपदा प्रबंधन के अंतर्गत भूकंप, सर्पदंश, बाढ़ तथा सुरक्षा एवं संरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर समूह चर्चा के माध्यम से जानकारी प्रदान की।
इस दौरान प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के समय आवश्यक सावधानियों, जोखिम कम करने के उपायों और प्रभावी प्रबंधन पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बताया गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में जागरूकता, त्वरित निर्णय और आपसी समन्वय से नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि विद्यालय स्तर पर सुरक्षा संबंधी तैयारियां पहले से मजबूत होनी चाहिए, ताकि किसी अप्रत्याशित स्थिति में विद्यार्थियों और विद्यालय के कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जा सकें।
विद्यालयों में सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण जरूरी: संजीव कुमार सत्यार्थी
प्रशिक्षण के नोडल प्रभारी संजीव कुमार सत्यार्थी ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने शिक्षकों को सुरक्षा नियमों के पालन, संभावित जोखिमों की पहचान और आपातकालीन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के प्रति सजग रहने पर जोर दिया। साथ ही, विद्यार्थियों में सुरक्षा संबंधी जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता बताई, ताकि वे भी अपनी सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बन सकें।
प्रशिक्षण से विद्यालयी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
डायट के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने बताया कि कवच मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को विद्यालयी सुरक्षा के विभिन्न आयामों की बेहतर समझ देना और प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को विद्यालयों में व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित करना है।
वरिष्ठ प्रवक्ता ललित मोहन पाल एवं विजय सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय स्तर पर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ाने और आपदा की स्थिति में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को यह समझने का अवसर मिला कि सुरक्षा संबंधी जानकारी और पूर्व तैयारी विद्यालयों में संभावित जोखिमों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समापन पर प्रतिभागियों को मिले प्रमाण पत्र
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन संजीव कुमार सत्यार्थी ने किया।
इस अवसर पर प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय, अनिल कुमार, यशवीर सिंह, हिमांशु सिंह, अबु मुहम्मद आसिफ, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रचना यादव, यशपाल सिंह और पुष्पेंद्र सिंह सहित अन्य संबंधित शिक्षक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, आगरा ने इस तरह के प्रशिक्षणों को विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों के व्यावसायिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।


