सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत निपुण आकलन पर जोर, अक्टूबर तक विद्यार्थियों को निपुण बनाने की कार्ययोजना तैयार करें: विजय प्रताप सिंह
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को मजबूत करने और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार लाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) आगरा में जनपद स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद के विभिन्न विकास क्षेत्रों से एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और खंड शिक्षा अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
बैठक में मुख्य रूप से विद्यार्थियों के नियमित आकलन, निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों, शिक्षण कार्य को प्रभावी बनाने, डिजिटल संसाधनों के उपयोग, अभिभावक एवं एसएमसी बैठकों तथा कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान अधिकारियों और शिक्षकों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों का नियमित आकलन सुनिश्चित किया जाए, ताकि नवंबर माह में प्रस्तावित निपुण आकलन के लिए सभी छात्र-छात्राओं को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।
हर महीने सभी बच्चों का आकलन जरूरी: विजय प्रताप सिंह

मासिक समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य डायट आगरा विजय प्रताप सिंह ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के सीखने के स्तर की जानकारी के लिए नियमित आकलन बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सभी संबंधित शिक्षक और अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक माह सभी बच्चों का आकलन किया जाए। इससे विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षिक स्थिति सामने आएगी और जिन बच्चों को किसी विषय या दक्षता में कठिनाई हो रही है, उनके लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
विजय प्रताप सिंह ने कहा कि नवंबर माह में होने वाले निपुण आकलन को ध्यान में रखते हुए अभी से बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। नियमित आकलन के माध्यम से विद्यालय स्तर पर बच्चों की प्रगति को समझना और उसके आधार पर शिक्षण रणनीति में आवश्यक बदलाव करना संभव होगा।
अक्टूबर तक विद्यार्थियों को निपुण बनाने की कार्ययोजना पर जोर

बैठक में वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने शिक्षक संकुल स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक संकुल स्तर पर ऐसी योजना तैयार करें, जिसके माध्यम से शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को अक्टूबर माह तक निपुण बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा सकें।
उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार कार्य करने और नियमित अनुश्रवण के माध्यम से प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर की गई व्यवस्थित तैयारी से विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि निपुण लक्ष्य को केवल परीक्षा या आकलन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे विद्यार्थियों के वास्तविक सीखने से जोड़ा जाए।
शिक्षण कार्य के लिए प्रभावी समय सारणी बनाने के निर्देश
बैठक का संचालन करते हुए प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने समीक्षा बैठक के विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने विद्यालयों में शिक्षण कार्य को व्यवस्थित बनाने के लिए समुचित समय सारणी तैयार करने और उसके अनुसार शिक्षण कार्य का आवंटन करने के लिए सभी संबंधितों को प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में उपलब्ध समय और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए शिक्षकों को नियमित एवं योजनाबद्ध तरीके से शिक्षण कार्य करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ आवश्यक दक्षताओं को विकसित करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें।
डिजिटल संसाधनों के नियमित इस्तेमाल पर जोर
मासिक समीक्षा बैठक में शिक्षकों को विद्यालयों में उपलब्ध डिजिटल एवं शैक्षिक संसाधनों का नियमित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, दीक्षा ऐप, रीड अलॉन्ग ऐप और निपुण लक्ष्य ऐप जैसे संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि डिजिटल संसाधनों को केवल औपचारिकता के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों को विषयों को अलग-अलग माध्यमों से समझने और अभ्यास करने का अवसर मिल सकता है।
शिक्षकों को शिक्षक डायरी, शिक्षण योजना और शिक्षक-संदर्शिका का नियमित उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
टीएलएम और किट के माध्यम से गतिविधि आधारित शिक्षण
बैठक में शिक्षण-अधिगम सामग्री यानी टीएलएम के प्रयोग पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही विद्यालयों में उपलब्ध गणित एवं विज्ञान किट तथा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रिंट सामग्री का उपयोग करते हुए प्रभावी शिक्षण करने के लिए शिक्षकों को प्रेरित किया गया।
शिक्षकों से कहा गया कि बच्चों को केवल मौखिक या किताब आधारित जानकारी देने के बजाय उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से उन्हें विषयों को समझने और अभ्यास करने के अवसर प्रदान किए जाएं।
विशेष रूप से गणित और विज्ञान जैसे विषयों में गतिविधि एवं प्रयोग आधारित शिक्षण को उपयोगी बताया गया।
निपुण तालिका अनिवार्य रूप से भरने के निर्देश
बैठक में निपुण तालिका को अनिवार्य रूप से भरे जाने के निर्देश भी दिए गए। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति को नियमित रूप से दर्ज करने और उसकी समीक्षा करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि बच्चों के आकलन से प्राप्त जानकारी का उपयोग केवल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए न किया जाए, बल्कि उसके आधार पर बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पहचानकर आगे की शिक्षण योजना तैयार की जाए।
कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर कराया जाए उपचारात्मक शिक्षण
बैठक में समस्यात्मक अथवा अपेक्षित स्तर तक सीखने में कठिनाई महसूस कर रहे विद्यार्थियों की पहचान पर भी विशेष जोर दिया गया।
शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि ऐसे बच्चों की समस्याओं को समझते हुए उनके लिए उचित उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की कठिनाइयों की पहचान समय रहते होने पर उनके सीखने के स्तर में सुधार के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जा सकते हैं।
इस दौरान बच्चों की व्यक्तिगत सीखने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।
अभिभावकों और एसएमसी सदस्यों के साथ गुणवत्तापूर्ण बैठकें हों
बैठक में विद्यालय और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के सदस्यों के साथ गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक का उद्देश्य केवल विद्यालय की सामान्य जानकारी साझा करना न होकर विद्यार्थियों की पढ़ाई, उपस्थिति, सीखने की प्रगति और उनकी आवश्यकताओं पर अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित करना बताया गया।
अभिभावकों की भागीदारी से बच्चों की शैक्षिक प्रगति को घर और विद्यालय दोनों स्तरों पर बेहतर तरीके से सहयोग मिल सकता है।
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प्रत्येक ब्लॉक से उत्कृष्ट नवाचार उद्गम पोर्टल पर भेजने के निर्देश
समीक्षा बैठक में शिक्षकों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। प्रत्येक ब्लॉक से एक-एक उत्कृष्ट नवाचार का चयन कर उसे 20 सितंबर तक उद्गम पोर्टल के लिए उपलब्ध कराने को कहा गया।
इस पहल के माध्यम से विद्यालय स्तर पर किए जा रहे प्रभावी एवं रचनात्मक शैक्षिक प्रयोगों को सामने लाने और उन्हें व्यापक स्तर पर साझा करने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में शिक्षकों को अपने विद्यालयों में किए जा रहे ऐसे प्रयोगों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए आवेदन बढ़ाने पर जोर
बैठक में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षिक अवसरों और छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए सभी विद्यालयों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों के आवेदन कराने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने कहा कि विद्यालय स्तर पर पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परीक्षा से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र इस अवसर का लाभ उठा सकें।
समीक्षा बैठक में शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
पूरी बैठक में विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता में सुधार, नियमित आकलन, शिक्षण योजना, डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल और शिक्षक-अभिभावक समन्वय जैसे विषय प्रमुख रहे।
बैठक में यह संदेश दिया गया कि निपुण लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल एक स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए विद्यालय, शिक्षक, शिक्षक संकुल, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर निरंतर अनुश्रवण और समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
नियमित आकलन से प्राप्त परिणामों का विश्लेषण करते हुए बच्चों के लिए आवश्यक अतिरिक्त शिक्षण उपलब्ध कराने और शिक्षण पद्धति में सुधार करने पर जोर दिया गया।
इनका रहा सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रवक्ता यशवीर सिंह, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, संजीव कुमार सत्यार्थी, रचना यादव, लक्ष्मी शर्मा, यशपाल सिंह, अबु मोहम्मद आसिफ, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता और रंजना पांडे सहित समस्त प्रवक्ताओं का सहयोग रहा।
कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया।
बैठक के माध्यम से शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों में नियमित आकलन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। अब विद्यालय स्तर पर तैयार की जाने वाली कार्ययोजना और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से विद्यार्थियों को निपुण लक्ष्य तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।


