तीन दिवसीय प्रशिक्षण में भूकंप, बाढ़, सर्पदंश, अग्निकांड, साइबर सुरक्षा और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव पर जोर; विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण विकसित करने के लिए शिक्षकों को किया जा रहा प्रशिक्षित
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कवच मॉड्यूल आधारित सुरक्षा एवं संरक्षा विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दूसरे चरण का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को विद्यालयों में सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त वातावरण विकसित करने के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में उचित कदम उठाने और विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान आपदा प्रबंधन, भूकंप से बचाव, बाढ़, सर्पदंश, आग लगने की स्थिति में सुरक्षा उपाय, साइबर सुरक्षा और मच्छर जनित बीमारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को विद्यालय स्तर पर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर समन्वय के साथ कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
भूकंप, बाढ़ और सर्पदंश से बचाव के बताए उपाय

प्रशिक्षण सत्र में प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने आपदा प्रबंधन के अंतर्गत भूकंप से जुड़ी सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने भूकंप आने से पहले, भूकंप के दौरान और उसके बाद बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की।
इसके साथ ही सर्पदंश, बाढ़ और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा के उपायों पर भी जानकारी साझा की गई। आग लगने जैसी घटनाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर समूह चर्चा आयोजित की गई, ताकि शिक्षक ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित और उचित कदम उठाने के प्रति जागरूक हो सकें।
प्रशिक्षण में व्यावहारिक जानकारी और सामूहिक चर्चा के माध्यम से शिक्षकों को आपदा की स्थिति में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया।
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विद्यालयों में सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण जरूरी

प्रशिक्षण के नोडल प्रभारी संजीव कुमार सत्यार्थी ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने विद्यालयों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत करने और शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, वरिष्ठ प्रवक्ता ललित मोहन पाल ने कहा कि शिक्षकों को संभावित जोखिमों की पहचान करने, सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं उचित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि बच्चे विद्यालय के साथ-साथ अपने दैनिक जीवन में भी सावधानी बरत सकें।
मच्छर जनित बीमारियों से बचाव की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान नगर निगम, आगरा की मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट के विशेषज्ञों ने मच्छर जनित बीमारियों के संबंध में शिक्षकों को जागरूक किया। इस सत्र में सीनियर हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. महिमा, पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट राम विपुन शर्मा, एंटोमोलॉजिस्ट शालिनी सिंह, माइक्रोबायोलॉजिस्ट रुचिका शर्मा, ट्रेनिंग मैनेजर रितु वर्मा, एडमिन ऑफिसर क्षितिज, कम्युनिकेशन एवं आईटी ऑफिसर अश्वनी शर्मा, आशीष सिंह, रिसर्च असिस्टेंट सोनम लता और कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट राघव अग्रवाल सहित संबंधित विशेषज्ञों ने जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने मच्छर जनित बीमारियों और उनसे बचाव के उपायों पर चर्चा की। इसका उद्देश्य शिक्षकों को इस विषय में जागरूक बनाना है, ताकि वे अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को स्वच्छता, सावधानी और बीमारी से बचाव के प्रति जानकारी दे सकें।
साइबर सुरक्षा और आपदा के समय समन्वित कार्रवाई पर जोर
डायट के वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने विद्यालयों में सुरक्षा संबंधी तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ाने और आपदा की स्थिति में समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए, जिससे वे संभावित खतरों को समय रहते पहचान सकें और विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन दे सकें। प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशल को विद्यालयों में व्यवहार में लाने के लिए भी प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया।
विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक प्रशिक्षण पर जोर
डायट आगरा के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि कवच मॉड्यूल आधारित प्रशिक्षण शिक्षकों की सुरक्षा संबंधी समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को विद्यालयी सुरक्षा के विभिन्न आयामों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे प्रशिक्षण में सीखे गए उपायों को अपने विद्यालयों में लागू कर सकें।
उन्होंने विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता पर जोर दिया।
इन शिक्षकों और प्रवक्ताओं का रहा सहयोग
कार्यक्रम का संचालन संजीव कुमार सत्यार्थी ने किया। इस अवसर पर प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय, अनिल कुमार, यशवीर सिंह, हिमांशु सिंह, अबु मुहम्मद आसिफ, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रचना यादव, यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह और डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता सहित प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों का सहयोग रहा।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण तैयार करने, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और विद्यार्थियों में सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है।


