दो दिवसीय नवाचार एवं बेस्ट प्रैक्टिस कार्यशाला में 84 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रस्तुत किए शैक्षिक प्रयोग; जगनेर दूसरे और फतेहपुर सीकरी व अकोला संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। शिक्षण व्यवस्था को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी केंद्रित बनाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में आयोजित दो दिवसीय नवाचार एवं बेस्ट प्रैक्टिस उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यशाला में बेसिक शिक्षा के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के कुल 84 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला के दौरान जनपद के विभिन्न विकासखंडों के शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में अपनाए जा रहे शैक्षिक नवाचारों और बेहतर शिक्षण पद्धतियों का प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुतियों के मूल्यांकन के बाद विकासखंड जैतपुर कलां ने प्रथम स्थान प्राप्त कर बाजी मारी। जगनेर दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फतेहपुर सीकरी और अकोला को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला।
सरस्वती वंदना और अभियान गीत के साथ हुई शुरुआत

कार्यशाला के प्रथम सत्र की शुरुआत प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सरस्वती वंदना और अभियान गीत ‘इसलिए राह संघर्ष की हम चुनें’ के साथ की। इस सत्र में आगरा जनपद के उन शैक्षिक नवाचारों और बेस्ट प्रैक्टिस का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिन्हें अब तक राज्य स्तर पर चयनित किया जा चुका है।
द्वितीय और तृतीय सत्र में जनपद के विभिन्न विकासखंडों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने ब्लॉकवार अपने नवाचार और बेस्ट प्रैक्टिस प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक रुचिकर, गतिविधि आधारित और प्रभावी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को साझा किया गया।
जैतपुर कलां का ‘उत्तर प्रदेश का जादुई बॉक्स’ रहा प्रथम

कार्यशाला में प्रस्तुत नवाचारों और बेस्ट प्रैक्टिस का निर्णायक मंडल ने मूल्यांकन किया। इसके बाद विकासखंडवार परिणाम घोषित किए गए।
- प्रथम स्थान: जैतपुर कलां का ‘उत्तर प्रदेश का जादुई बॉक्स’ नवाचार/बेस्ट प्रैक्टिस।
- द्वितीय स्थान: जगनेर का ‘हरे-भरे मित्र’ नवाचार।
- संयुक्त तृतीय स्थान: फतेहपुर सीकरी की ‘श्रेष्ठा योजना’ के अभिनव प्रयास और अकोला की ‘मेरी उपस्थिति, मेरा अभिमान’ बेस्ट प्रैक्टिस।
इन प्रस्तुतियों में शिक्षकों ने बताया कि किस तरह रचनात्मक गतिविधियों, स्थानीय संसाधनों और अभिनव शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है।
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छोटे-छोटे नवाचारों से शिक्षा में आ सकता है बड़ा बदलाव
कार्यशाला के उद्देश्य पर जानकारी देते हुए उप शिक्षा निदेशक एवं डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों द्वारा किए जा रहे प्रभावी शैक्षिक प्रयोगों और नवाचारों को साझा मंच उपलब्ध कराना है। इससे शिक्षक एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे और सफल नवाचारों को अन्य विद्यालयों में भी लागू करने के लिए प्रेरित होंगे।
वरिष्ठ प्रवक्ता ललित मोहन पाल ने कहा कि कार्यशाला से यह संदेश सामने आया है कि विद्यालयों में किए जाने वाले छोटे-छोटे रचनात्मक प्रयास भी विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
संदर्भदाता लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के नवाचारों को पहचानना, उनका दस्तावेजीकरण करना और उन्हें व्यापक स्तर पर दूसरे विद्यालयों तक पहुंचाना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विजेताओं को प्रमाण पत्र और मेडल देकर किया सम्मानित
कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वहीं प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विकासखंडों के शिक्षकों को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।
कार्यशाला में निर्णायक मंडल की भूमिका प्रवक्ता लक्ष्मी शर्मा और कल्पना सिन्हा ने निभाई। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया। अंत में प्रवक्ता लक्ष्मी शर्मा ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रवक्ता यशवीर सिंह, यशपाल सिंह, रचना यादव, मोहम्मद आसिफ, संजीव कुमार सत्यार्थी सहित अन्य का विशेष सहयोग रहा।
बच्चों के बेहतर अधिगम के लिए नवाचार अपनाने का संकल्प
कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में उपयोगी नवाचारों और प्रभावी बेस्ट प्रैक्टिस को लगातार अपनाएंगे। इसके माध्यम से बच्चों के अधिगम स्तर, कक्षा में सहभागिता और शैक्षिक उपलब्धियों में गुणात्मक सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।
दो दिवसीय कार्यशाला ने शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने और दूसरे विद्यालयों में अपनाई जा सकने वाली बेहतर शिक्षण पद्धतियों को समझने का अवसर दिया।


