DIET आगरा में सृजनांजलि कला महोत्सव–2026 का शुभारंभ, 95 प्रतिभागियों की कलाकृतियों ने बिखेरे संस्कृति के रंग
चित्रकला, कठपुतली, मूर्तियों और लोककलाओं की प्रदर्शनी बनी आकर्षण; प्रशिक्षुओं ने भरतनाट्यम, रासलीला और राजस्थानी नृत्य से सजाया मंच
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), आगरा में सृजनांजलि कला महोत्सव–2026 का शुभारंभ कला, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के रंगों के बीच हुआ। संस्थान के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कला महोत्सव के ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में शिक्षकों की रचनात्मक प्रतिभा के साथ भारतीय लोकजीवन, सांस्कृतिक विविधता और आगरा की विरासत की झलक देखने को मिली।
महोत्सव में चित्रों, कठपुतलियों, मूर्तियों और विभिन्न लोककलाओं को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही DIET प्रशिक्षुओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बनाया। आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों की कलात्मक अभिव्यक्ति को मंच देने के साथ भारतीय कला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।
137 प्रविष्टियों में से 95 प्रतिभागियों का चयन

सृजनांजलि कला महोत्सव के लिए कुल 137 प्रतिभागियों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। प्रस्तुत कलाकृतियों के आधार पर इनमें से 95 प्रतिभागियों का चयन किया गया। चयनित कलाकारों की कृतियों को व्यवस्थित रूप से प्रदर्शनी में स्थान दिया गया, जहां दर्शकों को भारतीय कला की विविध विधाओं और अभिव्यक्तियों को करीब से देखने का अवसर मिला।
प्रदर्शनी में शामिल कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के साथ आगरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई दी। कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता के जरिए लोक परंपराओं, भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कला के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचेगी संस्कृति और परंपरा: विजय प्रताप सिंह

महोत्सव का शुभारंभ करते हुए DIET प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि सृजनांजलि कला महोत्सव शिक्षकों की कलात्मक प्रतिभा को मंच देने के साथ हमारी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि कला व्यक्ति की सृजनशीलता को अभिव्यक्ति देती है और समाज की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत बनाती है।
उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल प्रतिभागियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने में उपयोगी बताया।
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लोकजीवन और सांस्कृतिक विविधता की सुंदर झलक: विजय सिंह

वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने कहा कि प्रदर्शनी में शिक्षकों की कलात्मक प्रतिभा के साथ भारतीय लोकजीवन और सांस्कृतिक विविधता की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षकों और विद्यार्थियों, दोनों में सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं।
वहीं वरिष्ठ प्रवक्ता ललित मोहन सिंह ने कहा कि सृजनांजलि में प्रदर्शित कलाकृतियां भारतीय कला परंपरा और शिक्षकों की रचनात्मक सोच का परिचय देती हैं। उनके अनुसार, कला के माध्यम से संस्कृति को समझना और उसका संरक्षण करना ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण पक्ष है।
भरतनाट्यम, रासलीला और राजस्थानी नृत्य ने बांधा समां
कला प्रदर्शनी के साथ DIET प्रशिक्षुओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। प्रशिक्षुओं ने भरतनाट्यम, रासलीला और राजस्थानी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय, लोक और पारंपरिक नृत्य शैलियों की विविधता मंच पर देखने को मिली।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने महोत्सव के वातावरण को और आकर्षक बनाया। प्रस्तुतियों के जरिए प्रशिक्षुओं ने भारतीय परंपराओं और लोक संस्कृति के विभिन्न रंगों को दर्शकों के सामने रखा।
सामूहिक प्रयासों से सफल हुआ आयोजन
कार्यक्रम के नोडल प्रभारी ने महोत्सव के आयोजन में प्रतिभागियों, DIET स्टाफ और प्रशिक्षुओं के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से कला प्रदर्शनी अपने उद्देश्य को सार्थक कर रही है।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती लक्ष्मी शर्मा ने प्रभावी और गरिमापूर्ण ढंग से किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में DIET के अधिकारियों, प्रवक्ताओं, कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
कला और लोक विरासत के संरक्षण का संदेश
सृजनांजलि कला महोत्सव–2026 में प्रदर्शित कलाकृतियों ने कलाकारों की प्रतिभा और कल्पनाशीलता को सामने रखा। साथ ही, इनके माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया गया।
प्रदर्शनी ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों को भारतीय कला की विविधता से परिचित कराने के साथ शिक्षकों की रचनात्मक भूमिका को भी रेखांकित किया। DIET आगरा में आयोजित यह महोत्सव कला, शिक्षा और संस्कृति के आपसी संबंध को सामने लाने वाला मंच बना।


