आगरा के एत्मादपुर में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती पर भव्य प्रतिमा अनावरण, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बोले- सेवा, न्याय और सुशासन की अमर प्रेरणा हैं लोकमाता
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 30 जून 2026 |
आगरा के एत्मादपुर स्थित मॉडल स्कूल ग्राउंड मंगलवार को ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर उनकी भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अवसर पर विशाल जनसभा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें देश एवं विभिन्न राज्यों से आए अनेक जनप्रतिनिधियों, संतों, सामाजिक संगठनों और हजारों नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शंकर राव शिंदे, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे, राज्यसभा सांसद रामराव वडकुते, विधान परिषद सदस्य गोपीचंद्र पडुलकर, उत्तर प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष एवं विधायक पूजा पाल, राज्यसभा सांसद नवीन जैन, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश, डॉ. धर्मपाल सिंह, पुरुषोत्तम खंडेलवाल, भगवान सिंह कुशवाह, चौधरी बाबूलाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया, महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दीप प्रज्ज्वलन और प्रतिमा अनावरण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शंकर राव शिंदे ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद सभी अतिथियों ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति, सनातन संस्कृति और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को उत्साह और श्रद्धा से भर दिया।
प्रो. एस.पी. सिंह बघेल बोले— लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर पूरे राष्ट्र की धरोहर हैं

केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर किसी एक समाज या क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे भारत की धरोहर हैं। उन्होंने अपने जीवन को जनकल्याण, सुशासन, धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों में ध्वस्त किए गए हजारों मंदिरों, धर्मस्थलों, घाटों, धर्मशालाओं, कुओं और तीर्थस्थलों का पुनर्निर्माण कर लोकमाता ने भारतीय संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, केदारनाथ, महाकाल, ओंकारेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, नागेश्वर, बैद्यनाथ सहित अनेक पवित्र तीर्थों के संरक्षण में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के 300वें जयंती वर्ष पर स्मारक सिक्का जारी कर उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिया, जिससे नई पीढ़ी उनके योगदान से परिचित हो सके।
शिक्षा और समाज सेवा को बनाया सफलता का मूल मंत्र

प्रो. बघेल ने युवाओं से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण करने का आह्वान करते हुए कहा कि आज के समय में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कौशल आधारित शिक्षा रोजगार और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने समाज के चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षित वर्ग से आग्रह किया कि वे समाज के कमजोर वर्गों की सहायता के लिए आगे आएं।
उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यक्रमों में सर्वसमाज की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए क्योंकि महापुरुष किसी जाति या वर्ग के नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं।
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“महारानी बनने के लिए सिंहासन चाहिए, लोकमाता बनने के लिए करोड़ों लोगों का विश्वास”
महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शंकर राव शिंदे ने अपने संबोधन में कहा कि महारानी बनने के लिए केवल सिंहासन पर्याप्त होता है, लेकिन लोकमाता बनने के लिए करोड़ों लोगों का विश्वास अर्जित करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जैसे भगवान राम केवल अयोध्या के नहीं बल्कि पूरे देश के हैं, भगवान श्रीकृष्ण केवल मथुरा के नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के हैं, उसी प्रकार लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर केवल मालवा की नहीं बल्कि पूरे भारत की लोकमाता हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया सुशासन का आदर्श
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन सेवा, त्याग, न्याय, करुणा और सुशासन का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसा प्रशासन स्थापित किया जिसकी चर्चा आज भी देशभर में होती है।
उन्होंने कहा कि लगभग तीन सौ वर्ष पहले स्थापित उनका प्रशासनिक मॉडल आज भी पारदर्शी शासन, न्याय व्यवस्था और संवेदनशील नेतृत्व का आदर्श माना जाता है।
उन्होंने कहा कि लोकमाता ने धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का कार्य किया। उनके शासन में गरीब, किसान, महिला और वंचित वर्गों के हित सर्वोपरि रहे।
“लोकमाता ने समाज के दुखों को अपना दुख माना”
ओम बिरला ने कहा कि जिस प्रकार भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए विषपान किया था, उसी प्रकार लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने समाज की पीड़ा को अपना मानकर पूरा जीवन जनसेवा में समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि आज के जनप्रतिनिधियों, प्रशासकों और युवाओं को लोकमाता के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में आगे आना चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल के जनसेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे भी लोकमाता के आदर्शों से प्रेरित होकर जनता की समस्याओं के समाधान का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लेकर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को श्रद्धांजलि अर्पित की। विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला समूहों, युवाओं और विद्यार्थियों ने भी इस अवसर पर सेवा, समरसता, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान दिगंबर सिंह धाकरे, नवीन गौतम, गौरव शर्मा (पार्षद) सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
लोकमाता का संदेश आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्श—सेवा, न्याय, सुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित—आज भी विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव हैं।


