डायट आगरा में पांच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण का सफल समापन, प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
निपुण भारत मिशन को मिलेगी नई गति, भाषा एवं गणित शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित हुए शिक्षक; ब्लॉक स्तर पर प्रभावी प्रशिक्षण संचालित करने के दिए गए निर्देश
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 27 जून 2026।
प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देने और प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में आयोजित पांच दिवसीय फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को सफल समापन हुआ। 22 जून से प्रारंभ हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकासखंडों से आए शिक्षक प्रशिक्षकों एवं शिक्षा विभाग से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नई शिक्षा नीति (NEP-2020), निपुण भारत मिशन तथा गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों के अनुरूप भाषा और गणित शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणना करने की बुनियादी क्षमता (Foundational Literacy and Numeracy) को मजबूत बनाना तथा विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था स्थापित करना रहा। कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कक्षा एक से चार तक के विद्यार्थियों की आधारभूत सीखने की क्षमता मजबूत होगी, तभी आगे की शिक्षा अधिक प्रभावी और परिणामदायी हो सकेगी।
निपुण भारत मिशन को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

उत्तर प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा संचालित निपुण भारत मिशन का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को प्रारंभिक कक्षाओं में भाषा एवं गणित की मूलभूत दक्षताओं से सशक्त बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए डायट आगरा में आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को नवीन शिक्षण तकनीकों, कक्षा संचालन की प्रभावी रणनीतियों और गतिविधि आधारित शिक्षण मॉडल की विस्तृत जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण पर्याप्त नहीं है। बच्चों की सीखने की गति, रुचि और समझ के अनुरूप गतिविधियों, खेल, कहानी, गीत, चित्र और समूह कार्य के माध्यम से शिक्षा अधिक प्रभावी बन सकती है। इसी सोच के साथ पूरे प्रशिक्षण को व्यवहारिक एवं सहभागी स्वरूप प्रदान किया गया।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. अनुराग शर्मा, हेमलता यादव, प्रीति पाराशर एवं कल्पना छोकर ने संदर्भदाता के रूप में विभिन्न सत्रों का संचालन किया।
उन्होंने कक्षा 1 से 4 तक की संदर्शिकाओं (Teacher Reference Guides) के आधार पर प्रतिभागियों को यह समझाया कि किस प्रकार प्रत्येक अध्याय को बच्चों की सीखने की क्षमता के अनुरूप सरल और रोचक बनाया जा सकता है। साथ ही उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि जिन बच्चों की सीखने की गति अपेक्षाकृत धीमी है, उनके लिए अलग रणनीति अपनाना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने वास्तविक कक्षा परिस्थितियों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह भी बताया कि यदि शिक्षक बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझकर शिक्षण कार्य करेंगे, तो अधिगम स्तर में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
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गतिविधि आधारित शिक्षण पर रहा विशेष फोकस
प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे केवल व्याख्यानों तक सीमित नहीं रखा गया।
प्रतिभागियों को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर संदर्शिकाओं में दी गई साप्ताहिक गतिविधियों का अध्ययन कराया गया। इसके बाद प्रत्येक समूह ने उन गतिविधियों का प्रदर्शन किया और यह बताया कि विद्यालय में बच्चों के साथ उन्हें किस प्रकार लागू किया जा सकता है।
भाषा शिक्षण के लिए कहानी, कविता, चित्र वाचन, संवाद, शब्द खेल और समूह पठन जैसी गतिविधियों का अभ्यास कराया गया, जबकि गणित शिक्षण के लिए स्थानीय संसाधनों, खेलों, वस्तुओं और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से संख्याओं एवं गणनाओं को सरल बनाने की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।
साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक कार्ययोजना को विस्तार से समझाया गया
एफएलएन प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को केवल विषयवस्तु ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण शैक्षणिक योजना तैयार करने का भी प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने साप्ताहिक शिक्षण चक्र, मासिक कार्ययोजना, वार्षिक शिक्षण योजना, अधिगम परिणामों का मूल्यांकन, बच्चों की प्रगति का रिकॉर्ड तथा उपचारात्मक शिक्षण की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया।
प्रतिभागियों को बताया गया कि यदि शिक्षक योजनाबद्ध तरीके से कार्य करेंगे तो प्रत्येक बच्चे तक सीखने का अवसर समान रूप से पहुंचाया जा सकेगा और विद्यालयों में अधिगम परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किए नवाचारपूर्ण शिक्षण मॉडल
प्रशिक्षण के अंतिम दिन विभिन्न विकासखंडों से आए लगभग 40 प्रतिभागियों ने अपने-अपने समूहों द्वारा तैयार किए गए शिक्षण मॉडल, गतिविधियां और नवाचार प्रस्तुत किए।
इन प्रस्तुतियों में भाषा विकास, गणितीय अवधारणाओं की सरल व्याख्या, खेल आधारित अधिगम, उपचारात्मक शिक्षण, समूह शिक्षण तथा बच्चों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने वाले अनेक प्रभावशाली मॉडल शामिल रहे।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रत्येक प्रस्तुति का मूल्यांकन करते हुए आवश्यक सुझाव दिए और प्रतिभागियों की सराहना की।
ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने का आह्वान
समापन समारोह को संबोधित करते हुए डायट आगरा के प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब उसका प्रभाव विद्यालयों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने विकासखंडों में ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण को पूरी गंभीरता और गुणवत्ता के साथ संचालित करें, ताकि प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रत्येक शिक्षक तक यह ज्ञान पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक आधुनिक शिक्षण तकनीकों का उपयोग करेंगे तो बच्चों में भाषा और गणित के प्रति रुचि स्वतः बढ़ेगी तथा अधिगम परिणामों में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जनपद आगरा को ‘निपुण जनपद’ बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब प्रत्येक शिक्षक बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक, सहभागी और परिणामोन्मुख बनाए।
नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को मिलेगा बल
प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रमुख उद्देश्य बच्चों की आधारभूत शिक्षा को मजबूत करना है।
एफएलएन प्रशिक्षण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके माध्यम से शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण विधियों से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की मजबूत शिक्षा व्यवस्था की नींव प्रारंभिक कक्षाओं में ही रखी जाती है।
प्रशिक्षण का सफल संचालन
कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया।
उन्होंने प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि पांच दिनों के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे वे विद्यालय स्तर पर इन गतिविधियों को सफलतापूर्वक लागू कर सकें।
सभी के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में नोडल प्रभारी धर्मेंद्र प्रसाद गौतम एवं एसआरजी प्रीति सिंह का विशेष योगदान रहा।
समापन अवसर पर कल्पना सिन्हा, संजीव कुमार सत्यार्थी, हिमांशु सिंह, लक्ष्मी शर्मा सहित डायट के अनेक प्रवक्ता, शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
प्राथमिक शिक्षा को नई दिशा देगा यह प्रशिक्षण
विशेषज्ञों का मानना है कि फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) आधारित प्रशिक्षण आने वाले समय में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यदि इस प्रशिक्षण में बताई गई गतिविधियों, नवाचारों और शिक्षण विधियों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणना करने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी बड़ी सफलता मिलेगी।
डायट आगरा का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा, दक्ष शिक्षक निर्माण और भविष्य के सशक्त भारत की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।


