अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर आगरा में जागरूकता अभियान, मद्यनिषेध विभाग ने दिलाई नशामुक्ति की शपथ, जादू-शो से बताए नशे के दुष्प्रभाव
‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत संगोष्ठी आयोजित, विशेषज्ञों ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की, स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण का लिया गया संकल्प
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 26 जून 2026।
मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध व्यापार के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) के अवसर पर आगरा में मद्यनिषेध विभाग द्वारा व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत ओम शांति वाटिका, वंशी विहार कॉलोनी, मगन फार्म, दहतोरा रोड पर आयोजित इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश देना रहा।
नशा व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में नशे की लत समाज के सामने गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि देश में लाखों लोग विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन करते हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक जीवन और आने वाली पीढ़ियों पर भी गहरा प्रभाव डालता है। नशे के कारण हर वर्ष हजारों लोगों की असमय मृत्यु होती है तथा अनेक परिवार बिखर जाते हैं।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करें।
युवाओं को जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रीतम सिंह साकेत ने कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है। यदि युवा वर्ग नशे जैसी बुराइयों से दूर रहेगा तो समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होंगे।
उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस अभियान का हिस्सा बनना होगा। परिवारों को भी बच्चों के साथ संवाद बढ़ाकर उन्हें गलत संगति और नशे की प्रवृत्तियों से बचाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने साझा किए अपने विचार
कार्यक्रम में उप क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी भूपेश कुमार, सतीश उपाध्याय, योगाचार्य हरेंद्र मिश्रा, एनटीटीएफ यूनिट प्रभारी, आबकारी निरीक्षक शैलेश कुमार, अमित कुमार तथा राजकीय अनुसूचित जाति बालक छात्रावास के अधीक्षक मनोज कुमार ने भी अपने विचार रखे।
सभी वक्ताओं ने कहा कि नशा समाज में अपराध, घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और मानसिक तनाव जैसी अनेक समस्याओं को जन्म देता है। इसलिए नशामुक्त समाज का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि सामूहिक जनभागीदारी से ही संभव है।
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जादू-शो के माध्यम से दिया गया प्रभावशाली संदेश
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा जादू-शो रहा, जिसके माध्यम से कलाकारों ने मनोरंजक शैली में नशे के दुष्प्रभावों को प्रस्तुत किया।
इस अनूठे प्रदर्शन के जरिए उपस्थित लोगों को यह समझाया गया कि नशा किस प्रकार धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच, स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को प्रभावित करता है। बच्चों और युवाओं ने इस कार्यक्रम में विशेष रुचि दिखाई और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया।
वितरित की गई जागरूकता सामग्री
मद्यनिषेध विभाग की ओर से उपस्थित प्रतिभागियों को नशे के दुष्प्रभाव, नशामुक्त जीवन के लाभ तथा सरकारी नशा मुक्ति अभियानों से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्री भी वितरित की गई।
अधिकारियों ने लोगों को बताया कि यदि कोई व्यक्ति नशे की लत से जूझ रहा है तो उसे समय पर उचित परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराना भी समाज की जिम्मेदारी है।
सभी ने ली नशामुक्त समाज बनाने की शपथ
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
मद्यनिषेध विभाग ने कहा कि भविष्य में भी जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक नशामुक्त जीवन का संदेश पहुंचाया जा सके।
स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रभावी प्रयास साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भागीदारी लगातार बनी रही, तो नशामुक्त भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से साकार किया जा सकता है।
“नशे से दूरी ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। आइए, स्वस्थ शरीर, मजबूत परिवार और सुरक्षित समाज के लिए नशामुक्त भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाएं।”


