गुवाहाटी में गूंजी आगरा की सांस्कृतिक विरासत, डॉ. प्रीति पांडे ने कथक से बिखेरी भारतीय संस्कृति की छटा
517वें CCRT ओरिएंटेशन प्रोग्राम में 16 राज्यों के प्रतिभागियों के बीच आगरा की विश्व धरोहरों और कथक का शानदार प्रस्तुतिकरण
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की गूंज गुवाहाटी में आयोजित 517वें ओरिएंटेशन प्रोग्राम में सुनाई दी। 22 जुलाई से 11 अगस्त तक आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 16 राज्यों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन CCRT (Centre for Cultural Resources and Training) द्वारा किया गया।
इस राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक एवं शैक्षिक मंच पर आगरा की ओर से डॉ. प्रीति पांडे ने प्रतिनिधित्व करते हुए जिले की ऐतिहासिक धरोहरों, स्थापत्य कला और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत किया।
आगरा की तीन विश्व धरोहरों को राष्ट्रीय मंच पर किया प्रस्तुत

आगरा जनपद के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सोनौटी, फतेहपुर सीकरी में कार्यरत डॉ. प्रीति पांडे ने अपने प्रस्तुतिकरण में आगरा की ऐतिहासिक पहचान को प्रमुखता से सामने रखा।
उन्होंने ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी। इन तीनों स्थलों को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में स्थान प्राप्त है।
डॉ. प्रीति पांडे ने इन विश्व प्रसिद्ध धरोहरों के माध्यम से आगरा की स्थापत्य परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की विशेषताओं को देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागियों के साथ साझा किया।
फतेहपुर सीकरी की विरासत पर विशेष जोर

फतेहपुर सीकरी के विद्यालय में कार्यरत होने के कारण डॉ. प्रीति पांडे ने इस ऐतिहासिक स्थल की विरासत को विशेष रूप से प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि फतेहपुर सीकरी केवल अपनी भव्य स्थापत्य शैली के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है। यहां की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक स्मारक भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम में फतेहपुर सीकरी की विरासत को प्रस्तुत करने से प्रतिभागियों को आगरा की ऐतिहासिक पहचान को एक अलग दृष्टिकोण से जानने का अवसर मिला।
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कथक की प्रस्तुति ने मोहा प्रतिभागियों का मन
कार्यक्रम के सांस्कृतिक चरण में डॉ. प्रीति पांडे ने उत्तर भारत के शास्त्रीय नृत्य कथक की मनमोहक प्रस्तुति दी।
उन्होंने कथक की पारंपरिक त्रिताल में गुरु वंदना और आमद प्रस्तुत की। नृत्य में लय, ताल, भाव और शास्त्रीय सौंदर्य का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों के बीच यह प्रस्तुति सांस्कृतिक आदान-प्रदान का आकर्षक हिस्सा बनी।
आगरा की कला, इतिहास और संस्कृति का संगम
डॉ. प्रीति पांडे की प्रस्तुति की खासियत यह रही कि इसमें आगरा की ऐतिहासिक विरासत को भारतीय शास्त्रीय कला के साथ जोड़ा गया। एक ओर उन्होंने ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के माध्यम से आगरा के इतिहास एवं स्थापत्य को सामने रखा, वहीं दूसरी ओर कथक के जरिए उत्तर भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का परिचय कराया।
इस तरह कार्यक्रम में आगरा की पहचान केवल ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कला, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं के व्यापक संदर्भ में भी सामने आई।
16 राज्यों के प्रतिभागियों के बीच आगरा का प्रतिनिधित्व
CCRT के 517वें ओरिएंटेशन प्रोग्राम में 16 राज्यों के प्रतिभागियों की सहभागिता रही। ऐसे राष्ट्रीय मंच पर आगरा की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करना जिले के लिए गौरव का विषय रहा।
डॉ. प्रीति पांडे ने उत्तर प्रदेश और आगरा का प्रतिनिधित्व करते हुए इतिहास, स्थापत्य, कला और शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता को सामने रखा।
उनकी प्रस्तुति ने “विविधता में एकता” की भारतीय भावना को भी मजबूत किया। अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागियों के बीच संस्कृति और परंपराओं का यह आदान-प्रदान देश की साझा सांस्कृतिक विरासत को समझने का सुंदर माध्यम बना।
राष्ट्रीय मंच पर शिक्षक की सांस्कृतिक पहल
डॉ. प्रीति पांडे का यह प्रयास इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी शैक्षिक जिम्मेदारियों के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रस्तुति में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
फतेहपुर सीकरी जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र में कार्यरत होने के कारण आगरा की विरासत से उनका जुड़ाव और भी विशेष है। उन्होंने राष्ट्रीय मंच पर स्थानीय इतिहास और संस्कृति को प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को आगरा की पहचान से परिचित कराया।
गुवाहाटी में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से आगरा की तीन विश्व धरोहरों और कथक की प्रस्तुति ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविध ऐतिहासिक परंपराओं, कलाओं और स्थानीय विरासतों में निहित है। डॉ. प्रीति पांडे की यह प्रस्तुति आगरा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से सामने रखने की उल्लेखनीय पहल बनी।


