डायट आगरा से उठा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 125 शिक्षक बने ‘पर्यावरण योद्धा’
पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता पर आयोजित शैक्षिक कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दिए व्यवहारिक सुझाव, शिक्षकों से विद्यालयों को हरित परिसर बनाने और विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने का आह्वान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 30 जून 2026।
आगरा। पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक वैश्विक चिंता का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के तत्वावधान में “पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका” विषय पर एक दिवसीय शैक्षिक कार्यशाला एवं शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ, स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण तथा वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 125 शिक्षक-शिक्षिकाओं को ‘पर्यावरण योद्धा सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा ज्ञान की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। पूरे समारोह का वातावरण पर्यावरण संरक्षण के संदेशों और शिक्षकों के उत्साह से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. रश्मि सिंघल एवं डॉ. सतीश कुमार सिकरवार ने किया, जिन्होंने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।
125 शिक्षकों को मिला ‘पर्यावरण योद्धा सम्मान’

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण वह रहा जब पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण, विद्यालयों में हरित वातावरण विकसित करने तथा विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता फैलाने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले 125 शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रशस्ति-पत्र, मेडल एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित शिक्षकों ने इसे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि समाज और शिक्षा जगत के प्रति अपनी जिम्मेदारी का सम्मान बताया। उन्होंने भविष्य में भी विद्यालयों और समुदाय के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने का संकल्प लिया।
विद्यालयों को पर्यावरण शिक्षा का केंद्र बनाने पर दिया गया जोर

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं डायट आगरा के प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने अपने विस्तृत व्याख्यान में कहा कि आज विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के सबसे प्रभावी केंद्र बन चुके हैं।
उन्होंने शिक्षकों को विद्यालयों में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, ठोस अपशिष्ट (कचरा) प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जैव विविधता संरक्षण, ग्रीन कैंपस और ईको क्लब जैसी गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कई व्यवहारिक मॉडल प्रस्तुत करते हुए बताया कि यदि प्रत्येक विद्यालय अपने परिसर में जल संरक्षण, पौधारोपण और कचरा प्रबंधन की योजनाएं लागू करे तो बच्चों में बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है।
डॉ. वार्ष्णेय ने यह भी कहा कि पर्यावरण शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन और विद्यालयी गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी

राज्य स्तरीय प्रशिक्षक डॉ. राजेश शर्मा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक, सामाजिक और मानवीय दायित्व है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक स्वयं पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे तो उनके विद्यार्थी भी स्वाभाविक रूप से प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनेंगे।
उन्होंने विद्यालयों में नियमित वृक्षारोपण अभियान, प्लास्टिक मुक्त परिसर, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण प्रतियोगिताएं और पर्यावरण आधारित परियोजनाओं के आयोजन पर विशेष बल दिया।
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हर विद्यालय बने हरित विद्यालय
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धीरेंद्र कुमार, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), आगरा मंडल ने कहा कि आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि उनका संरक्षण करना है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यालय अपने परिसर को हरित बनाने का संकल्प ले और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करे तो आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर दिखाई देगा।
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि प्रत्येक विद्यार्थी को वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जाए।
पर्यावरण मानव अस्तित्व का आधार है
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उप शिक्षा निदेशक एवं डायट प्राचार्य अनुरुद्ध यादव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि पर्यावरण केवल अध्ययन का विषय नहीं बल्कि मानव जीवन का आधार है।
उन्होंने कहा—
“यदि आज हम प्रकृति के संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।”
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, घटती हरियाली और जल संकट जैसी चुनौतियां केवल वैज्ञानिक विषय नहीं हैं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी हैं।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यालयों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दें तथा बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें।
शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिक्षक समाज के ऐसे मार्गदर्शक हैं जो केवल ज्ञान ही नहीं देते बल्कि जीवन जीने की दिशा भी तय करते हैं।
यदि शिक्षक स्वयं पर्यावरण संरक्षण की आदतों को अपनाएंगे और विद्यार्थियों को व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रकृति से जोड़ेंगे तो भविष्य की पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनेगी।
बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया का विशेष योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संगठन के मंडल अध्यक्ष अशोक कुमार ने पर्यावरण जागरूकता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षाविद रहे उपस्थित
कार्यक्रम में संगठन के जिला अध्यक्ष आलोक जैन, जिला महामंत्री सौरभ शर्मा, मलय कुमार दास, डॉ. कुसुम शर्मा, तेजेंद्र सिंह, ज्योति, डॉ. प्रेमलता शर्मा, अर्चना शर्मा, सत्यपाल सिंह, वर्षा चाहर, प्रीति पाराशर, दिलीप श्रीवास्तव, अमित कुमार, डॉ. पवन सिंह, डॉ. बहोरन सिंह, भूपेंद्र सिंह, नरेश कुमार, सुरेंद्र मोहन शर्मा, रेनू भारद्वाज, डॉ. दिग्विजय पचौरी, लाखन सिंह, डॉ. मनोज पाठक, रागिनी राजपूत, अजय कुमार सिंह, मीना कुमारी सिंह (एसआरजी) सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे।
पर्यावरण संरक्षण का लिया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी शिक्षकों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन, अधिकाधिक वृक्षारोपण तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक नागरिक वर्ष में केवल एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, जल की बचत करे और स्वच्छता को अपनी आदत बनाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भारत का निर्माण किया जा सकता है।
यह कार्यशाला केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति शिक्षकों की भूमिका को मजबूत करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में यादगार बन गई।


