खेरागढ़ BRC में मिलेट्स प्रशिक्षण संपन्न, शिक्षकों को बताए पोषण और उपयोगिता के फायदे
स्कूल पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचेगा मिलेट्स का संदेश, ज्वार-बाजरा-रागी के प्रति जागरूक करने पर जोर
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
दैनिक समाचार, खेरागढ़/आगरा। मोटे अनाज यानी मिलेट्स को लेकर जागरूकता बढ़ाने और विद्यार्थियों को इसके पोषण एवं उपयोगिता से परिचित कराने की दिशा में ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) खेरागढ़ में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण में अध्यापकों को मिलेट्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षकों को मिलेट्स के बारे में जानकारी देना नहीं रहा, बल्कि उन्हें इस विषय को स्कूल पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए तैयार करना भी रहा। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मिलेट्स की उपयोगिता, पोषक तत्वों और दैनिक जीवन में इसकी भूमिका से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
स्कूल पाठ्यक्रम के जरिए बच्चों तक पहुंचेगा मिलेट्स का संदेश

ब्लॉक संसाधन केंद्र खेरागढ़ में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि विद्यार्थियों को मिलेट्स के बारे में शुरुआती स्तर से जानकारी देना उपयोगी हो सकता है। ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अनाज भारतीय खान-पान और कृषि परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे कक्षा में विद्यार्थियों को मिलेट्स की पहचान, उनके उपयोग और पोषण संबंधी विशेषताओं के बारे में सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दें। इससे बच्चे अपने आसपास उपलब्ध पारंपरिक अनाजों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
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कृषि विशेषज्ञ डॉ. राधेश्याम सिंह ने बताया मिलेट्स का महत्व
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञ डॉ. राधेश्याम सिंह ने अध्यापकों से मिलेट्स के महत्व और उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने शिक्षकों को मिलेट्स के विभिन्न प्रकारों और इनके उपयोग से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों के बीच मिलेट्स को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए विद्यालय एक प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
शिक्षकों से कहा गया कि वे विद्यार्थियों को मिलेट्स के बारे में जानकारी देते समय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उदाहरणों और दैनिक जीवन से जुड़े संदर्भों का इस्तेमाल करें, ताकि विषय बच्चों के लिए अधिक सहज और समझने योग्य बने।
पोषक तत्वों पर डॉ. फैज बख्श सैयद ने की चर्चा
कृषि विशेषज्ञ डॉ. फैज बख्श सैयद ने प्रशिक्षण में मिलेट्स में पाए जाने वाले पोषक तत्वों पर शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रकार के मिलेट्स में अलग-अलग पोषक तत्व पाए जाते हैं और इन्हें संतुलित आहार के संदर्भ में समझा जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बच्चों को खान-पान और पोषण से जुड़े विषयों की जानकारी देते समय उन्हें स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के बारे में भी बताया जाना चाहिए।
बीमारियों की रोकथाम में मिलेट्स की भूमिका पर चर्चा
प्रशिक्षण में सलाहकार सलीम अली खां ने भी मिलेट्स से जुड़े स्वास्थ्य पहलुओं पर जानकारी साझा की। उन्होंने बीमारियों की रोकथाम में मिलेट्स की भूमिका पर चर्चा करते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों को इनके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों को ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मिलेट्स की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों को संतुलित खान-पान और पोषण के महत्व को समझाने पर भी जोर दिया गया।
इस दौरान शिक्षकों से कहा गया कि वे मिलेट्स से संबंधित जानकारी को बच्चों तक सरल भाषा में पहुंचाएं, जिससे विद्यार्थी अपने भोजन और स्थानीय खाद्य परंपराओं के बारे में बेहतर समझ विकसित कर सकें।
ज्वार, बाजरा और रागी के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
प्रशिक्षण में विशेष रूप से ज्वार, बाजरा और रागी को लेकर विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। शिक्षकों को बताया गया कि इन अनाजों की जानकारी बच्चों को कृषि, पोषण और स्थानीय खाद्य संस्कृति—तीनों से जोड़ सकती है।
विद्यालय में मिलेट्स विषय को गतिविधियों, चर्चा और पाठ्यक्रम से जोड़कर विद्यार्थियों को इसके बारे में जानकारी दी जा सकती है। इससे बच्चों में स्थानीय कृषि उत्पादों और पारंपरिक अनाजों के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा।
शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम को विद्यार्थियों तक पहुंचाने में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। शिक्षक कक्षा में बच्चों के साथ चर्चा के माध्यम से मिलेट्स की पहचान, उपयोग और पोषण से जुड़े विषयों को आसानी से समझा सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को इस बात के लिए प्रेरित किया गया कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबी जानकारी न दें, बल्कि विषय को उनके दैनिक जीवन और आसपास के वातावरण से जोड़कर समझाएं।
अकादमिक रिसोर्स पर्सन का रहा विशेष योगदान
मिलेट्स प्रशिक्षण को सफल बनाने में अकादमिक रिसोर्स पर्सन धर्मेंद्र सिंह और संतोष कुमार का विशेष योगदान रहा। इसके साथ ही राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सत्य पाल सिंह ने भी प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को विषय से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने और उसे विद्यालयी शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
तकनीकी टीम ने भी दी उपयोगी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राविधिक सहायक डॉ. संग्राम सिंह तथा तकनीकी सहायक सच्चिदानंद दुबे और सर्वेश कुमार सहित अन्य संबंधित लोगों ने भी अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया।
तकनीकी एवं शैक्षिक पहलुओं से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए प्रतिभागी शिक्षकों को मिलेट्स विषय को विद्यालयी गतिविधियों और पाठ्यक्रम के साथ जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बच्चों में पोषण और स्थानीय अनाजों की समझ बढ़ाने की पहल
खेरागढ़ BRC में आयोजित यह प्रशिक्षण मिलेट्स को केवल कृषि या खाद्य पदार्थ के रूप में देखने के बजाय उसे शिक्षा, पोषण और स्थानीय जागरूकता से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आया।
ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अनाजों के बारे में बच्चों को जानकारी देने से वे अपने आसपास उपलब्ध खाद्य संसाधनों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। शिक्षक यदि इस विषय को गतिविधि आधारित तरीके से प्रस्तुत करें तो विद्यार्थियों के लिए सीखने का अनुभव और अधिक रोचक बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यालयों तक पहुंचेगा मिलेट्स जागरूकता अभियान
उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को मिलेट्स के महत्व और उपयोगिता के बारे में जागरूक करने में भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य यही रहा कि मिलेट्स से जुड़ी जानकारी केवल प्रशिक्षण कक्ष तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूलों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक भी पहुंचे। शिक्षकों के जरिए ज्वार, बाजरा और रागी जैसे पारंपरिक अनाजों के प्रति नई पीढ़ी में जानकारी और रुचि विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
खेरागढ़ में आयोजित प्रशिक्षण ने यह संदेश दिया कि यदि कृषि, पोषण और शिक्षा से जुड़े विषयों को विद्यालयी स्तर पर सरल तरीके से बच्चों तक पहुंचाया जाए, तो विद्यार्थी अपने आसपास की खाद्य और कृषि परंपराओं को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। इसी सोच के साथ मिलेट्स को स्कूल पाठ्यक्रम और जागरूकता गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया।


