आगरा में ECCE प्रशिक्षण: आदर्श बाल वाटिका के लिए शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण, आगरा में 65 से अधिक प्रतिभागियों ने सीखी गतिविधि आधारित शिक्षण की तकनीक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ECCE मास्टर ट्रेनर/कोर ग्रुप प्रशिक्षण का दूसरा चरण पूरा, फतेहाबाद ब्लॉक ने क्विज में हासिल किया प्रथम स्थान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में ब्लॉक स्तरीय ईसीसीई (ECCE) मास्टर ट्रेनर/कोर ग्रुप प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक आयोजित इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दूसरे चरण में जनपद के सात विकासखंडों से 65 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
प्रशिक्षण में सैंया, खंदौली, फतेहाबाद, जगनेर, पिनाहट, नगर क्षेत्र और बाह के नोडल एआरपी, नोडल शिक्षक संकुल और सीडीपीओ शामिल हुए। प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में ऐसी आदर्श बाल वाटिका विकसित करना रहा, जहां बच्चों को खेल, गतिविधियों और अनुभवों के माध्यम से सीखने का आनंद मिले तथा उन्हें कक्षा एक में प्रवेश के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।
बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाए ऐसी हो आदर्श बाल वाटिका
प्रशिक्षण के दूसरे चरण के समापन अवसर पर डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि आदर्श बाल वाटिका ऐसी होनी चाहिए, जहां आने वाले प्रत्येक बच्चे के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्राथमिक स्तर पर बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी दबाव के खेलते हुए और गतिविधियों में भाग लेते हुए सीख सकें। बाल वाटिका के माध्यम से बच्चों को कक्षा एक की औपचारिक शिक्षा के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे विद्यालयों में वास्तविक गतिविधियों के रूप में लागू करें।
सात विकासखंडों से 65 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में जनपद के सात विकासखंडों से नोडल एआरपी, नोडल शिक्षक संकुल और सीडीपीओ ने सहभागिता की। इसमें सैंया, खंदौली, फतेहाबाद, जगनेर, पिनाहट, नगर क्षेत्र और बाह शामिल रहे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। साथ ही विद्यालय स्तर पर बाल वाटिका को अधिक सक्रिय, बाल केंद्रित और गतिविधि आधारित बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
क्विज में फतेहाबाद ब्लॉक अव्वल
प्रशिक्षण को रोचक और सहभागी बनाने के लिए प्रत्येक दिन के सत्रों को क्विज आधारित बनाया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों की विषय संबंधी समझ को परखा गया और उन्हें सक्रिय रूप से सीखने का अवसर मिला।
क्विज प्रतियोगिता में फतेहाबाद ब्लॉक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सैंया और खंदौली ब्लॉक संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहे। इस गतिविधि से प्रशिक्षणार्थियों में उत्साह के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी देखने को मिली।
वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने प्रमाण पत्र किए वितरित
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी शिक्षक संकुल, नोडल एआरपी और सीडीपीओ को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित करते हुए कहा कि विद्यालयों को पूर्व प्राथमिक स्तर पर आदर्श बाल वाटिका के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बाल वाटिका में बच्चों की उम्र और विकास के स्तर को ध्यान में रखते हुए गतिविधियों का चयन किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों के लिए सीखना स्वाभाविक और आनंददायी अनुभव बन सके।
गतिविधि आधारित सत्रों से समझी बाल वाटिका की अवधारणा
प्रशिक्षण के दौरान संदर्भदाता प्रवक्ता लक्ष्मी शर्मा, एसआरजी प्रीति सिंह, एआरपी कल्पना छोंकर और शिक्षक संकुल मीनाक्षी वर्मा ने विभिन्न सत्रों को गतिविधि आधारित तरीके से संचालित किया।
प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को केवल लिखने-पढ़ने का अभ्यास कराने के बजाय उनकी भाषा, संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक व्यवहार, रचनात्मकता और सीखने की जिज्ञासा को गतिविधियों के माध्यम से विकसित किया जाना चाहिए।
बाल वाटिका-3 की दक्षताओं पर विशेष चर्चा
प्रशिक्षण में बाल वाटिका-3 के बच्चों के लिए आवश्यक दक्षताओं को गतिविधि आधारित बनाने पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बच्चों की सीखने की प्रक्रिया उनकी उम्र और क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए।
इसके साथ ही क्रियाशील बाल वाटिका के निर्माण की विभिन्न तकनीकों पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षणार्थियों को ऐसे तरीकों से परिचित कराया गया, जिनके माध्यम से विद्यालय में बच्चों के लिए सीखने का बेहतर और आकर्षक वातावरण तैयार किया जा सके।
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दैनिक वार पाठ योजना बनाने की अवधारणा स्पष्ट
प्रशिक्षण के दौरान दैनिक वार पाठ योजना के निर्माण की अवधारणा को भी स्पष्ट किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल वाटिका में प्रत्येक दिन की गतिविधियों को पहले से योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया जाए।
इससे शिक्षकों को यह तय करने में सुविधा होगी कि किसी दिन बच्चों के साथ कौन-सी गतिविधि करानी है, उसका उद्देश्य क्या होगा और उससे बच्चों में कौन-सी दक्षता विकसित की जानी है।
खेल और गतिविधियों से सीखने पर जोर
ECCE प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि छोटे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया बोझिल नहीं होनी चाहिए। खेल, कहानी, बातचीत, चित्र, गीत, रचनात्मक गतिविधियां और अन्य अनुभव आधारित तरीकों के माध्यम से बच्चों को सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
ऐसी गतिविधियों से बच्चों में विद्यालय के प्रति सकारात्मक भाव पैदा करने के साथ-साथ सीखने की स्वाभाविक रुचि विकसित करने में भी मदद मिलती है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों को बनाना अधिक बाल केंद्रित
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित इस प्रशिक्षण का व्यापक उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना रहा। प्रशिक्षणार्थियों को यह संदेश दिया गया कि बाल वाटिका केवल विद्यालय का एक अलग कक्ष या व्यवस्था न होकर बच्चों के समग्र विकास का आधार बने।
बाल वाटिका में बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वे सवाल पूछ सकें, अपनी बात कह सकें, खेल सकें, गतिविधियों में भाग ले सकें और अपने आसपास की चीजों को समझते हुए सीख सकें।
प्रशिक्षण को सफल बनाने में इनका रहा विशेष सहयोग
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला समन्वयक प्रशिक्षण राजेश यादव, प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय, अनिल कुमार, यशवीर सिंह तथा प्रशासनिक अधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा सहित संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों का विशेष सहयोग रहा।
प्रशिक्षण के समापन के साथ प्रतिभागियों को विद्यालयों में बाल वाटिका की गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू करने और बच्चों को आनंददायी एवं गतिविधि आधारित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया।
आगरा में आयोजित ECCE प्रशिक्षण का यह दूसरा चरण प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—विद्यालय में ऐसा शुरुआती शैक्षिक वातावरण तैयार करना, जहां हर बच्चा खुशी के साथ सीखे और कक्षा एक की शिक्षा के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।



