डीएलएड प्रशिक्षुओं को दिलाई गई स्वच्छता की शपथ, स्वच्छ वातावरण को लेकर जिम्मेदारी का दिलाया संकल्प
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। स्वच्छता केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डीएलएड बैच 2024 एवं 2025 के प्रशिक्षुओं के साथ डायट स्टाफ ने स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का आयोजन उप शिक्षा निदेशक प्रचार एवं डायट आगरा के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह के निर्देशन में किया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं और संस्थान के कर्मचारियों को स्वच्छता के महत्व से अवगत कराते हुए नियमित रूप से स्वच्छता गतिविधियों में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया गया।
स्वच्छता के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजय प्रताप सिंह ने कहा कि स्वच्छता का प्रभाव केवल आसपास के वातावरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवनशैली से भी है। उन्होंने कहा कि अपने घर, आसपास के क्षेत्र, संस्थान और कक्षा-कक्ष को साफ रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे स्वयं स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। स्वच्छ वातावरण से स्वस्थ जीवन को बढ़ावा मिलता है और साफ-सफाई की आदतें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विजय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छता के लिए नियमित रूप से समय निकालना चाहिए। उन्होंने प्रति सप्ताह कम से कम दो घंटे तथा वर्ष में कम से कम 100 घंटे स्वच्छता के लिए श्रमदान करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को समझकर स्वच्छता अभियान में योगदान दे, तो स्वच्छता को केवल अभियान न मानकर जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
वरिष्ठ प्रवक्ता ने बताया स्वच्छता का महत्व
इस अवसर पर डायट के वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह ने भी प्रशिक्षुओं को स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की आदत बचपन से ही विकसित की जानी चाहिए, क्योंकि प्रशिक्षु भविष्य में शिक्षक के रूप में विद्यालयों में बच्चों के बीच जाएंगे और उनके व्यवहार तथा आदतों को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होते, बल्कि बच्चों में अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकारों की भावना विकसित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में प्रशिक्षुओं के लिए स्वयं स्वच्छता के प्रति जागरूक रहना और दूसरों को प्रेरित करना जरूरी है।
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
प्रशिक्षुओं और डायट स्टाफ ने ली स्वच्छता की शपथ
कार्यक्रम के दौरान डीएलएड बैच 2024 एवं 2025 के सभी उपस्थित प्रशिक्षुओं तथा डायट स्टाफ को प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने स्वच्छता की शपथ दिलाई। इस दौरान सभी ने अपने घर, कक्षा-कक्ष, संस्थान और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने तथा स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया।
शपथ कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षुओं को यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल किसी अभियान या विशेष दिवस तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे नियमित व्यवहार और दैनिक जीवन की आदत के रूप में अपनाना आवश्यक है।
शिक्षक बनने वाले प्रशिक्षुओं के लिए स्वच्छता का संदेश महत्वपूर्ण
डीएलएड प्रशिक्षु भविष्य में विद्यालयों में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। ऐसे में उनके लिए स्वच्छता के प्रति जागरूक होना विशेष महत्व रखता है। शिक्षक अपने व्यवहार के माध्यम से विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण सामाजिक आदतें सिखाते हैं।
विद्यालय में साफ कक्षा-कक्ष रखना, कूड़े को निर्धारित स्थान पर डालना, सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करना और स्वच्छ वातावरण के प्रति जागरूक रहना जैसी छोटी-छोटी आदतें बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का हिस्सा बन सकती हैं। कार्यक्रम में इसी प्रकार की जिम्मेदारी को लेकर प्रशिक्षुओं को प्रेरित किया गया।
डायट स्टाफ की रही सहभागिता
स्वच्छता पखवाड़े के तहत आयोजित कार्यक्रम में डायट के अधिकारियों, प्रवक्ताओं और कर्मचारियों की भी सहभागिता रही। कार्यक्रम में प्रवक्ता यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, हिमांशु सिंह, अबू मोहम्मद आसिफ, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, संजीव कुमार सत्यार्थी, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता तथा प्रशासनिक अधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा सहित समस्त डायट स्टाफ मौजूद रहा।
कार्यक्रम के दौरान सभी ने स्वच्छता को लेकर अपने स्तर से जिम्मेदारी निभाने और प्रशिक्षुओं को भी इसके लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।
स्वच्छता को आदत बनाने का संदेश
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य प्रशिक्षुओं और स्टाफ के बीच यह भावना मजबूत करना रहा कि स्वच्छता किसी एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। घर से लेकर विद्यालय और संस्थान तक स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है।
डायट में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षुओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया गया कि भविष्य के शिक्षक समाज में स्वच्छता और स्वस्थ वातावरण की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सामूहिक भागीदारी और नियमित श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता के संकल्प को व्यवहार में उतारने पर जोर दिया गया।



