किसानों की आय बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और कम लागत वाली कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर हुई चर्चा; पुआल मल्च और ARC तकनीक में दिखाई रुचि
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 14 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में आलू और शकरकंद की खेती को अधिक लाभकारी बनाने तथा किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री (कैबिनेट) सूर्य प्रताप शाही और प्रमुख सचिव, कृषि, डॉ. एम. के. शनमुगा सुंदरम ने आगरा स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र सीसार्क (CSARC) की गतिविधियों का अवलोकन किया।
दोनों अधिकारियों ने आगरा में आयोजित संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 के दौरान सीसार्क के स्टॉल का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने सिंगना स्थित सीसार्क फार्म का भ्रमण कर वहां चल रही अनुसंधान गतिविधियों, कृषि प्रौद्योगिकियों और विकसित किए जा रहे बुनियादी ढांचे की प्रगति की जानकारी ली।
इस दौरान आलू एवं शकरकंद की उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज प्रणाली को मजबूत करने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया। साथ ही, आधुनिक और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
खेती से बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला में नवाचार जरूरी: सूर्य प्रताप शाही

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सीसार्क की वैज्ञानिक टीम के साथ चर्चा करते हुए कहा कि आलू और शकरकंद से जुड़े अनुसंधान का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए। इसके साथ बीज उत्पादन, खेती, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन तक पूरी मूल्य शृंखला को बेहतर बनाने पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने ऐसी कृषि तकनीकों और नवाचारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, जिनसे किसानों की उत्पादन लागत कम हो, उपज की गुणवत्ता में सुधार आए और उन्हें अपनी फसल का बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
भ्रमण के दौरान कृषि मंत्री ने फार्म पर उगाई जा रही शकरकंद की विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया। उन्होंने शकरकंद के क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी विकास की संभावनाओं में भी रुचि दिखाई।
आलू के साथ शकरकंद अनुसंधान को भी मिले बढ़ावा

प्रमुख सचिव, कृषि, डॉ. एम. के. शनमुगा सुंदरम ने आलू के साथ-साथ शकरकंद की खेती में भी उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने सीसार्क के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को मजबूत बनाने की बात कही। इसके अंतर्गत विभिन्न देशों में विकसित उन्नत कृषि किस्मों और तकनीकों की भारतीय परिस्थितियों में उपयोगिता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने पर बल दिया गया।
इस पहल से स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी तकनीकों की पहचान करने और किसानों के लिए बेहतर विकल्प विकसित करने में मदद मिल सकती है।
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सीसार्क के स्टॉल पर प्रदर्शित की गईं आधुनिक कृषि तकनीकें
संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 के दौरान आयुक्त सभागार, आगरा में लगाए गए सीसार्क के स्टॉल पर आलू उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
प्रमुख रूप से इन तकनीकों और विषयों को प्रदर्शित किया गया:
- आलू की विभिन्न किस्में: प्रसंस्करण और टेबल उपयोग के लिए उपयुक्त आलू की किस्मों की जानकारी दी गई।
- एपिकल रूटेड कटिंग्स (ARC) तकनीक: गुणवत्तापूर्ण G0 श्रेणी के आलू बीज उत्पादन से जुड़ी पद्धति का प्रदर्शन किया गया।
- पुआल मल्च के साथ शून्य जुताई आधारित आलू उत्पादन प्रणाली (PZTM): कम लागत वाली खेती और वैकल्पिक उत्पादन पद्धति से संबंधित तकनीक प्रस्तुत की गई।
कृषि मंत्री और प्रमुख सचिव ने विशेष रूप से PZTM तकनीक तथा ARC पद्धति में रुचि दिखाई। गोष्ठी में आगरा, अलीगढ़ और बरेली क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने भी इन तकनीकों को अपनाने में दिलचस्पी व्यक्त की।
इन तकनीकों का उद्देश्य किसानों को आलू उत्पादन के बेहतर विकल्पों से परिचित कराना और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की संभावनाओं को मजबूत करना है।
अनुसंधान और प्रदर्शन गतिविधियों के लिए तैयार हो रहा सीसार्क फार्म
सिंगना स्थित सीसार्क फार्म पर कृषि मंत्री और प्रमुख सचिव का स्वागत केंद्र के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने किया। उन्होंने अधिकारियों को फार्म की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति और आगामी रबी मौसम के लिए प्रस्तावित अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी।
फार्म पर विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे और प्रस्तावित अनुसंधान कार्यों को आलू एवं शकरकंद की खेती से जुड़ी तकनीकों के परीक्षण, प्रदर्शन और प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने पर रहेगा जोर
भ्रमण के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और प्रमुख सचिव डॉ. एम. के. शनमुगा सुंदरम ने विश्वास व्यक्त किया कि सीसार्क भविष्य में आलू एवं शकरकंद अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और तकनीकी प्रसार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित होगा।
आगरा में आयोजित यह कार्यक्रम किसानों की जरूरतों के अनुरूप कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाने और वैज्ञानिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सकता है।


