आगरा: कबाड़ से जुगाड़ कर बच्चों ने खोजा जागरूकता का अनोखा तरीका, हेल्पलाइन नंबरों का दे रहे संदेश
मिशन शक्ति और मीना मंच के तहत पुराने कार्टन से बनाए फूलों पर लिखे हेल्पलाइन नंबर, बाल अपराध, घरेलू हिंसा और साइबर सुरक्षा के प्रति ग्रामीणों को कर रहे जागरूक
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा/खंदौली। सरकारी योजनाओं और जरूरी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए आगरा जिले के खंदौली ब्लॉक स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुढ़ी जहांगीरपुर के बच्चों ने एक अनूठी पहल की है। मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने ‘कबाड़ से जुगाड़’ नवाचार के माध्यम से पुराने और बेकार पड़े कार्टन का उपयोग कर जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल के जरिए बच्चे न केवल रचनात्मकता का परिचय दे रहे हैं, बल्कि समाज को बाल अधिकारों, महिला सुरक्षा और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी कर रहे हैं।
पुराने कार्टन से बनाए फूल, हेल्पलाइन नंबरों से दिया संदेश
विद्यालय के बच्चों ने बेकार पड़े कार्टन को काटकर आकर्षक फूलों का आकार दिया। इन फूलों पर विभिन्न हेल्पलाइन नंबर लिखे गए हैं, ताकि ग्रामीणों को जरूरत के समय सहायता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध नंबरों की जानकारी मिल सके।
बच्चों की इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सहायता सेवाओं की जानकारी को सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से आम लोगों तक पहुंचाना है। इसके लिए विद्यालय में जागरूकता रैली भी आयोजित की जा रही है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए संदेशों को गांव के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
यह नवाचार बच्चों को अनुपयोगी सामग्री का रचनात्मक इस्तेमाल करना सिखाने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।
बाल अपराध और साइबर सुरक्षा के प्रति कर रहे जागरूक
मिशन शक्ति और मीना मंच की टीम से जुड़े बच्चे अपने अभियान के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैला रहे हैं। इनमें बाल यौन शोषण, बाल अपराध, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और साइबर सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डाटा चोरी और साइबर अपराध से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। ऐसे में बच्चों की यह पहल लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने और किसी भी समस्या की स्थिति में उचित सहायता प्राप्त करने की जानकारी देने का प्रयास है।
विद्यार्थी अपने संदेशों के माध्यम से लोगों को इन समस्याओं के प्रति जागरूक कर रहे हैं, ताकि वे अपने अधिकारों को समझें और जरूरत पड़ने पर संबंधित सहायता सेवाओं का उपयोग कर सकें।
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
ग्राम प्रधान ने की पहल की सराहना
विद्यालय में आयोजित स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) की बैठकों में भी बच्चों के इस नवाचार की सराहना की गई है। ग्राम प्रधान श्री राजीव गिरि ने विद्यार्थियों के प्रयास को प्रशंसनीय बताया। इस पहल से बच्चों को प्रोत्साहन मिल रहा है और वे जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
बच्चों की ओर से पुराने कार्टन का उपयोग कर तैयार किए गए जागरूकता संदेश यह दिखाते हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद रचनात्मक सोच और सामूहिक प्रयास से समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
डॉ. प्रेमलता शर्मा बच्चों की प्रतिभा निखारने में जुटीं
इस अभियान में विद्यालय की अध्यापिका डॉ. प्रेमलता शर्मा, जिला मास्टर ट्रेनर (बालिका शिक्षा) एवं खंदौली ब्लॉक की नोडल के रूप में, बच्चों को प्रेरित करने और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, कौशल और सामाजिक जागरूकता को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
मिशन शक्ति और मीना मंच के माध्यम से बच्चों को यह अवसर मिल रहा है कि वे अपनी सीख को विद्यालय की चारदीवारी से बाहर ले जाकर समुदाय के साथ साझा करें। इससे उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक विषयों को समझने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है।
मीना मंच की टीम निभा रही जागरूकता की जिम्मेदारी
इस अभियान में मिशन शक्ति (मीना मंच) की टीम के सदस्य मानवी/लालता, मानवी/राजकुमार, नन्दिनी/साहूकार, मोहिनी, अनुष्का, भावना और काजल शामिल हैं। ये विद्यार्थी अपने प्रयासों से गांव के लोगों तक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश पहुंचाने में जुटे हैं।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुढ़ी जहांगीरपुर की यह पहल शिक्षा को व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ने का उदाहरण है। पुराने कार्टन से बनाए गए फूलों के माध्यम से बच्चे यह संदेश दे रहे हैं कि जागरूकता फैलाने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है सही जानकारी, रचनात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी।
विद्यालय की मिशन शक्ति और मीना मंच टीम का प्रयास है कि हेल्पलाइन नंबरों तथा बालिका सुरक्षा, बाल अधिकारों और साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े और जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिल सके।


