Agra News: बाल विवाह और बालश्रम मुक्त जनपद बनाने पर डीएम मनीष बंसल सख्त, चिह्नित बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास के निर्देश
जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक में बाल संरक्षण तंत्र की समीक्षा, जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 11 अगस्त 2026। जनपद में बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में उनकी अध्यक्षता में आयोजित जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक में बाल विवाह, बालश्रम, भिक्षावृत्ति, बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद को बाल विवाह और बालश्रम मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बच्चों को देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है, उनकी पहचान कर समयबद्ध तरीके से रेस्क्यू, पुनर्वास और आवश्यक सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराया जाए।
जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर तैयार किया जाए रिकॉर्ड

बैठक में ऐसे बच्चों की पहचान और चिह्निकरण की समीक्षा की गई, जिन्हें विशेष देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है। इनमें निराश्रित, अनाथ, एकल अभिभावक के साथ रहने वाले, भिक्षावृत्ति में लिप्त, बाल श्रमिक, शिक्षा से वंचित तथा गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों सहित अन्य जोखिमग्रस्त बच्चे शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर गठित समितियों, पुलिस, श्रम विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं द्वारा चिन्हित बच्चों की जानकारी निर्धारित रजिस्टर में दर्ज की जाए। इसके बाद प्रत्येक बच्चे की जरूरत के अनुसार उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और संबंधित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल बच्चों को चिन्हित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास और भविष्य की स्थिति की लगातार निगरानी भी जरूरी है।
8 बच्चों का रेस्क्यू, चार बाल विवाह मामलों में कार्रवाई

बैठक में भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि अभियान के दौरान 8 बच्चों का रेस्क्यू किया गया है। वहीं बाल विवाह के 4 मामलों में कार्रवाई की गई है।
बाल एवं किशोर श्रम के संबंध में बताया गया कि 77 बच्चों को खतरनाक और गैर-खतरनाक कार्यों में लगे होने के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें से संबंधित मामलों में 8 परिवाद दाखिल किए गए हैं, जबकि अन्य मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चिह्नित बच्चों के लिए रेस्क्यू और पुनर्वास की स्पष्ट एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जाए। रेस्क्यू के बाद बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और अन्य योजनाओं से जोड़कर पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
बाल विवाह और बालश्रम के खिलाफ बढ़ेगी निगरानी
जिलाधिकारी ने कहा कि बाल विवाह और बालश्रम जैसी परिस्थितियों में पाए जाने वाले बच्चों के मामलों को केवल कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। बच्चों की परिस्थितियों को समझते हुए उनके परिवार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति का भी आकलन किया जाए।
उन्होंने जनपद के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रम और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का नियमित सर्वे और चिह्निकरण किया जाए। जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए तथा पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी की जाए।
ब्लॉक और ग्राम स्तर की समितियों को सक्रिय करने पर जोर
बैठक में ब्लॉक, ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर गठित बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि समितियों की नियमित बैठकें आयोजित हों और बच्चों से जुड़े मामलों पर गंभीरता से चर्चा की जाए। समितियों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु आवेदन समय से भेजे जाएं।
उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और रेस्क्यू एवं पुनर्वास संबंधी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए पंपलेट, पोस्टर और अन्य माध्यमों से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
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बाल देखरेख संस्थानों में शिक्षा और स्वास्थ्य की भी समीक्षा
बैठक में बाल देखरेख संस्थानों में रह रहे बच्चों की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें बच्चों के आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, मनोसामाजिक सहायता, सुरक्षा व्यवस्था, कौशल प्रशिक्षण और नियमित निरीक्षण से जुड़े विषय शामिल रहे।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बाल देखरेख संस्थानों में रहने वाले बच्चों की आवश्यकताओं का नियमित मूल्यांकन किया जाए और उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने केस मैनेजमेंट सिस्टम की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी ली। संस्थागत देखभाल में रह रहे बच्चों के परिवारों की पहचान करने तथा पात्र मामलों में परिवार से पुनर्मिलन की संभावनाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
दत्तक ग्रहण और फॉस्टर केयर व्यवस्था की समीक्षा
बैठक में दत्तक ग्रहण, स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर, ग्रुप फॉस्टर केयर और आफ्टर केयर जैसी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई।
कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की पहचान और जोखिम स्तर के आकलन पर भी चर्चा हुई। इनमें बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी, अनाथ बच्चे, एकल अभिभावक या कानूनी संरक्षक के साथ रहने वाले बच्चे, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे तथा दिव्यांग बच्चों सहित अन्य जरूरतमंद बच्चे शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऐसे बच्चों की मैपिंग कर उनकी वास्तविक जरूरतों का आकलन किया जाए और पात्रता के अनुसार उन्हें सरकारी योजनाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ा जाए।
बाल संरक्षण से जुड़े विभागों में बेहतर समन्वय के निर्देश
बैठक में बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), चाइल्ड हेल्पलाइन, विशिष्ट दत्तक ग्रहण इकाइयों और बाल देखरेख संस्थानों की व्यवस्थाओं एवं कार्यों की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक मामले में बच्चे का सर्वोत्तम हित प्राथमिकता में होना चाहिए।
उन्होंने जनपद के सभी थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को भी नियमानुसार अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए।
हर जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचे शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य केवल संकट की स्थिति में बच्चे को सुरक्षित करना नहीं, बल्कि उसके भविष्य को बेहतर बनाना भी है। इसलिए चिह्नित बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना जरूरी है।
उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से कहा कि उनके संपर्क में आने वाले प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे की स्थिति की जानकारी लेकर उसे पात्र योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह और बालश्रम की रोकथाम के साथ बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा से जुड़ाव के लिए जनपद स्तर पर निरंतर निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, डीपीओ अतुल सोनी, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य सहित बाल संरक्षण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


