Kheragarh Breaking: इनवायरमेंट बिल्डिंग प्रोग्राम में पैरेंट्स काउंसलिंग, दिव्यांग बच्चों के विकास पर विस्तृत मार्गदर्शन
कागारौल-प्रथम के दिव्यांग रिसोर्स सेंटर में इनवायरमेंट बिल्डिंग प्रोग्राम के तहत पैरेंट्स काउंसलिंग आयोजित, सरकारी योजनाओं, बच्चों की चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से चर्चा।

इनवायरमेंट बिल्डिंग प्रोग्राम के तहत खेरागढ़ में पैरेंट्स काउंसलिंग कार्यक्रम, दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास पर विस्तृत मार्गदर्शन
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | खेरागढ़, 13 नवम्बर 2025
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा समावेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में चलाए जा रहे प्रयासों के अंतर्गत दिव्यांग रिसोर्स सेंटर, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कागारौल-प्रथम में मंगलवार को इनवायरमेंट बिल्डिंग प्रोग्राम के तहत एक व्यापक पैरेंट्स काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम खण्ड शिक्षा अधिकारी खेरागढ़ महेश चंद्र के निर्देशन में संचालित किया गया, जिसमें दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्याओं व समाधान पर आधारित एक संवेदनात्मक परिचर्चा रहा।
दिव्यांग बच्चों के अधिकारों और सरकारी योजनाओं पर व्यापक जानकारी
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों को बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार नई योजनाएँ लागू कर रही है। अधिकारियों और शिक्षकों ने निम्न महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में साझा की—
● दिव्यांगजन पेंशन योजना
योग्य बच्चों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
● सहायता उपकरण वितरण योजना
हियरिंग एड, व्हीलचेयर, कैलिपर्स, ट्राईसाइकिल जैसे उपकरण निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
● समावेशी शिक्षा कार्यक्रम (IEP)
प्रत्येक बच्चे की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत शिक्षण योजना तैयार की जाती है।
● होम-बेस्ड शिक्षा व्यवस्था
ऐसे बच्चे जो विद्यालय नहीं आ सकते, उनके लिए घर पर जाकर विशेष शिक्षण की सुविधा।
अभिभावकों को जागरूक किया गया कि इन योजनाओं का लाभ लेना कैसे आसान है और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज तथा प्रक्रिया क्या है।
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बच्चों की सीखने में आने वाली वास्तविक चुनौतियों पर खुली चर्चा

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह रहा, जिसमें शिक्षकों और अभिभावकों ने मिलकर बच्चों की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा की। इनमें शामिल थे—
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ध्यान न लगना
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धीमी गति से सीखना
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वाणी, सुनने या देखने की समस्याएँ
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व्यवहार संबंधी कठिनाइयाँ
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आत्मविश्वास की कमी
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सामाजिक मेलजोल में झिझक
स्पेशल एजुकेटर्स द्वारा बताया गया कि ऐसे बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा, धैर्यपूर्ण शिक्षण और निरंतर प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। सही मार्गदर्शन मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
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“बच्चों को मूल्यवान महसूस कराएं”—प्रधानाध्यापक सत्य पाल सिंह का भावनात्मक संदेश
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक सत्य पाल सिंह (राज्य पुरस्कृत शिक्षक) ने कहा—
“दिव्यांग बच्चे किसी बोझ नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानवता के सच्चे दूत हैं। अभिभावक उन्हें मूल्यवान महसूस कराएं, उन्हें समय दें, और यह विश्वास जगाएं कि वे किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि शिक्षक तभी सफल होते हैं, जब अभिभावक भी घर पर बच्चे के साथ नियमित अभ्यास करवाते हैं। उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित किया कि वे बच्चों को न सिर्फ पढ़ाई, बल्कि खेल, कला, संगीत और दैनिक जीवन के कौशल में भी आगे बढ़ने का मौका दें।
स्पेशल एजुकेटर्स ने दिए व्यवहार सुधार और सीखने से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव

स्पेशल एजुकेटर दीपेश कुमार और छत्तर सिंह ने माता-पिता को बताया कि नियमित दिनचर्या, लर्निंग गेम्स, पिक्चर कार्ड्स, थेरैपी एक्सरसाइज और सकारात्मक संवाद से बच्चों की सीखने की गति दोगुनी हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि—
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हर बच्चे की अपनी अलग सीखने की क्षमता होती है।
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तुलना करने से बच्चे का आत्मविश्वास टूटता है।
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छोटे-छोटे लक्ष्य तय करके बच्चे को आगे बढ़ाएं।
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हर उपलब्धि—even छोटी—पर भी तारीफ और प्रोत्साहन देना जरूरी है।
अभिभावकों की समस्याएँ सुनी गईं, समाधान भी दिए गए
काउंसलिंग के दौरान कई अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें घर पर पढ़ाने में क्या कठिनाइयाँ आती हैं। शिक्षकों ने मौके पर ही उन्हें आसान शिक्षण तकनीकें बताते हुए भरोसा दिलाया कि—
“स्कूल, अभिभावक और समाज तीनों मिलकर प्रयास करें, तो कोई भी बच्चा पीछे नहीं रह सकता।”
कार्यक्रम में उत्साहपूर्ण भागीदारी
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिव्यांग बच्चे, उनके अभिभावक, विद्यालय स्टाफ और स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बच्चों ने कुछ गतिविधियाँ और सीखने की विधियाँ भी प्रदर्शित कीं, जिससे अभिभावक काफी प्रभावित हुए।
यह कार्यक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?
- दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देता है
- अभिभावक–शिक्षक–समाज के बीच समन्वय मजबूत करता है
- बच्चों की चुनौतियों को समझने और समाधान जानने का अवसर देता है
- सरकारी योजनाओं तक पहुँच आसान बनाने में मदद करता है
- बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाता है
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