एचसीएल फाउंडेशन के ‘माई क्लीन सिटी’ प्रोग्राम से आगरा में स्वच्छता की नई पहल, 92 विद्यालयों के 100 शिक्षक-शिक्षिकाओं को मिला प्रशिक्षण
5865 विद्यार्थियों तक पहुंचेगा स्वच्छता और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन का संदेश, स्कूलों से परिवार और समुदाय तक जागरूकता फैलाने की तैयारी
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 09 सितंबर 2026। स्वच्छता केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऐसी आदत है जो बचपन से विकसित होकर परिवार और पूरे समाज की कार्यशैली को प्रभावित करती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आगरा में एचसीएल फाउंडेशन के ‘माई क्लीन सिटी’ प्रोग्राम के अंतर्गत स्वच्छता और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई।
इस पहल के तहत लैंडिंग हैंड्स फाउंडेशन द्वारा 08 और 09 सितंबर 2026 को शासकीय विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए दो दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर्नल्स ब्राइटलैंड पब्लिक स्कूल, ग्राम लाकावली (कलाल खेरिया), आगरा में किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को ठोस कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देना रहा, ताकि वे अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को इन विषयों के प्रति जागरूक कर सकें। आयोजकों का मानना है कि बच्चों में यदि शुरुआत से ही कचरे को सही तरीके से अलग करने, कम करने और पुनः उपयोग जैसी आदतें विकसित की जाएं, तो इसका प्रभाव विद्यालय की सीमाओं से निकलकर घर और समुदाय तक पहुंच सकता है।
92 विद्यालयों के 100 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण
दो दिवसीय प्रशिक्षण में 92 शासकीय विद्यालयों के कुल 100 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की। इनमें बरौली अहीर क्षेत्र से 50 और नगर क्षेत्र आगरा से 50 शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहे।
प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया। प्रतिभागियों को गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से यह समझाया गया कि विद्यालय स्तर पर स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन को विद्यार्थियों की दिनचर्या का हिस्सा कैसे बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को कचरे के स्रोत पर पृथक्करण (Segregation at Source) की अवधारणा, जैविक और अजैविक कचरे की पहचान तथा उसके उचित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और 3R सिद्धांत—Reduce, Reuse और Recycle यानी कम करना, पुनः उपयोग करना और पुनर्चक्रण जैसे विषयों पर भी विशेष जोर रहा।
बच्चों के जरिए घर-घर पहुंचेगा स्वच्छता का संदेश
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को इस बात के लिए तैयार किया गया कि वे बच्चों को केवल स्वच्छता के बारे में जानकारी न दें, बल्कि उनके व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।
विद्यालयों में बच्चे जब कचरे को अलग-अलग रखने, अनावश्यक कचरा कम करने और उपयोगी वस्तुओं के पुनः इस्तेमाल जैसी आदतें अपनाएंगे, तो उनके माध्यम से यही संदेश परिवारों तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।
आयोजन से जुड़े अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों में विकसित की गई छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। स्कूल स्वच्छता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की समझ विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
स्वच्छता के लिए जनभागीदारी को बताया जरूरी
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में स्थायी और प्रभावी बदलाव के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए जनभागीदारी और सामुदायिक सहयोग भी जरूरी है।
शिक्षकों को इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा गया कि वे विद्यार्थियों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
विद्यालयों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश बड़ी संख्या में बच्चों तक पहुंचने से इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि प्रशिक्षण में शिक्षकों की भूमिका को केवल कक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यवहार परिवर्तन के माध्यम के रूप में भी देखा गया।
प्रमुख अतिथियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा पंकज भूषण, पर्यावरण अभियंता, नगर निगम आगरा तथा जगत सिंह राजपूत, खंड शिक्षा अधिकारी, बरौली अहीर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में सुमित कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, नगर क्षेत्र आगरा, के.के. पांडेय, स्वच्छ भारत मिशन परियोजना प्रबंधक, सुश्री रुबीना खानम, प्रधानाचार्य, कर्नल्स ब्राइटलैंड पब्लिक स्कूल, तथा सुरेंद्र चाहर, विद्यालय प्रशासक भी मौजूद रहे।
इसके साथ ही जिला समन्वयक राजेश कुमार यादव, कुलदीप तिवारी और मीना पुष्कर, एसआरजी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
अधिकारियों ने प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता को व्यवहार का हिस्सा बनाने और विद्यालयों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कचरा प्रबंधन को लेकर व्यवहारिक जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को यह समझाया गया कि ठोस कचरे का सही प्रबंधन उसकी उत्पत्ति के स्थान से ही शुरू होना चाहिए। इसके लिए स्रोत पर कचरा पृथक्करण को महत्वपूर्ण बताया गया।
जैविक और अजैविक कचरे की पहचान, उनके अलग-अलग प्रबंधन तथा पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं के बेहतर इस्तेमाल से संबंधित जानकारी दी गई। शिक्षकों को यह भी बताया गया कि 3R सिद्धांत को विद्यार्थियों की रोजमर्रा की गतिविधियों से जोड़कर समझाया जा सकता है।
इस प्रकार की गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यवहारिक जीवन से जोड़ना रहा।
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एचसीएल फाउंडेशन टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में एचसीएल फाउंडेशन की टीम की सक्रिय भूमिका रही। ‘माई क्लीन सिटी’ कार्यक्रम के सेक्टर लीड कुनाल सैनी ने प्रशिक्षण की दिशा में मार्गदर्शन किया।
इसके अलावा लवकेश यादव और पंकज कुमार, सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर, तथा श्रीमती विभा तिवारी, रीमा और श्रीमती आकषी, प्रोग्राम ऑफिसर ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग किया।
सहयोगी संस्था लैंडिंग हैंड्स फाउंडेशन की ओर से अजय जी, सुश्री मुक्ति मिश्रा और उनकी टीम ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों ने लिया संकल्प
दो दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करने का संकल्प लिया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने की प्रतिबद्धता जताई।
इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों में स्वच्छता को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की नियमित आदत और जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना है। शिक्षकों के माध्यम से जब यह संदेश बच्चों तक पहुंचेगा, तो बच्चों के जरिए परिवारों और समुदायों में भी जागरूकता बढ़ाने का रास्ता तैयार होगा।
विद्यालयों से शुरू होने वाला बदलाव
‘माई क्लीन सिटी’ कार्यक्रम के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण इस बात पर केंद्रित रहा कि स्वच्छता की आदतों को बचपन से ही मजबूत किया जाए। 92 विद्यालयों के 100 प्रशिक्षित शिक्षक-शिक्षिकाओं के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों तक स्वच्छता और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन का संदेश पहुंचाने की तैयारी है।
विद्यालय यदि बच्चों को स्वच्छता के साथ-साथ कचरे के सही प्रबंधन की आदत सिखाने में सफल होते हैं, तो इसका असर केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थी इन आदतों को अपने घरों तक ले जा सकते हैं और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं।
इसी सोच के साथ आगरा में शुरू की गई यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की दिशा में विद्यालयों की भूमिका को और मजबूत करने का प्रयास है।
नोट: आपके मूल इनपुट में एक जगह 5,865 और दूसरी जगह 5,765 विद्यार्थियों का आंकड़ा दिया गया है। ऊपर की खबर में शीर्षक/मुख्य प्रस्तुति में 5,865 रखा गया है, क्योंकि शुरुआती विवरण में यही आंकड़ा दिया गया था। प्रकाशन से पहले इस संख्या की एक बार पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।

