हर चेहरे पर मुस्कान, हर कदम पर सीख—आदर्श बाल वाटिका की ओर बढ़ा आगरा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। बच्चों की शुरुआती शिक्षा को आनंददायक, गतिविधि आधारित और सीखने के लिए सहज बनाने की दिशा में आगरा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में ब्लॉक स्तरीय ईसीसीई एजुकेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम का दो दिवसीय आयोजन किया गया। 2 सितंबर से 3 सितंबर 2026 तक चले इस प्रशिक्षण में जिले के सभी विकासखंडों के कुल 68 ईसीसीई एजुकेटर ने प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ईसीसीई एजुकेटर को ऐसी गतिविधियों और शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से छोटे बच्चों को खेल-खेल में सीखने के अवसर दिए जा सकें। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बाल वाटिका का वातावरण बच्चों के लिए बोझिल न होकर ऐसा हो, जहां वे उत्साह और रुचि के साथ सीखने की प्रक्रिया में शामिल हों।
खेल-खेल में सीखने से मजबूत होगी बच्चों की नींव
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने ईसीसीई एजुकेटर को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को पढ़ाने से पहले उनकी उम्र और सीखने की जरूरतों के अनुरूप पूर्व तैयारी करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एजुकेटर बच्चों को खेल-खेल में सिखाएं और क्रियाशील बाल वाटिका के निर्माण पर विशेष ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि ईसीसीई एजुकेटर का बेहतर प्रयास और समर्पण बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रारंभिक अवस्था में बच्चों को जिस तरह का सीखने का वातावरण मिलता है, उसका प्रभाव आगे की उनकी शैक्षिक यात्रा पर भी दिखाई देता है।
विजय प्रताप सिंह ने कहा कि बाल वाटिका में बच्चों को केवल किताबों और निर्धारित गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सीखने और समझने के अवसर दिए जाने चाहिए।
गतिविधि आधारित प्रशिक्षण पर रहा विशेष जोर
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक दिन के सत्रों को व्यवहारिक और गतिविधि आधारित तरीके से संचालित किया गया। ईसीसीई एजुकेटर को यह समझाने का प्रयास किया गया कि छोटे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को उनकी रुचि और स्वाभाविक जिज्ञासा से जोड़ा जाए।
प्रशिक्षण में गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को विभिन्न अवधारणाओं को समझाने, उनकी भागीदारी बढ़ाने और बाल वाटिका को अधिक सक्रिय बनाने की तकनीकों पर चर्चा की गई। एजुकेटर को यह भी बताया गया कि गतिविधि ऐसी होनी चाहिए, जिसमें बच्चे स्वयं भाग लें, सवाल पूछें, चीजों को देखें और अनुभव के माध्यम से सीखें।
इस तरह की पद्धति में शिक्षक या एजुकेटर की भूमिका केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।
बाल वाटिका-3 की दक्षताओं को गतिविधियों से जोड़ने की पहल
प्रशिक्षण के दौरान बाल वाटिका-3 के बच्चों के लिए आवश्यक दक्षताओं को गतिविधि आधारित बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। संदर्भदाताओं ने बताया कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा में विभिन्न कौशल और दक्षताओं का विकास केवल मौखिक जानकारी देने से नहीं, बल्कि उन्हें गतिविधियों में शामिल करके अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
ईसीसीई एजुकेटर को ऐसी गतिविधियों के चयन और संचालन की तकनीक बताई गई, जिनसे बच्चों में सीखने की रुचि बनी रहे और वे सहज वातावरण में अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकें।
इसके साथ ही क्रियाशील बाल वाटिका के निर्माण की विभिन्न तकनीकों पर भी चर्चा हुई। उद्देश्य यह रहा कि बाल वाटिका केवल एक कक्षा या स्थान न होकर बच्चों के लिए ऐसा सक्रिय सीखने का केंद्र बने, जहां हर दिन नई गतिविधि और नया अनुभव उनके सीखने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।
दैनिक वार पाठ योजना की अवधारणा हुई स्पष्ट
प्रशिक्षण के दौरान दैनिक वार पाठ योजना निर्माण की अवधारणा को भी स्पष्ट किया गया। एजुकेटर को बताया गया कि बच्चों के साथ कराई जाने वाली गतिविधियों के लिए पहले से तैयारी और उचित योजना बनाना जरूरी है।
पूर्व तैयारी से एजुकेटर को यह तय करने में सुविधा होती है कि किस दिन बच्चों के साथ कौन-सी गतिविधि कराई जानी है, उसके लिए किन संसाधनों की आवश्यकता होगी और बच्चों को किस प्रकार उसमें शामिल किया जाएगा।
इससे बाल वाटिका की गतिविधियां अधिक व्यवस्थित होने के साथ बच्चों के सीखने के उद्देश्य से भी जुड़ी रहती हैं।
बच्चों के अनुकूल वातावरण बनाने पर जोर
प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया गया कि प्रारंभिक बाल शिक्षा के दौरान बच्चों को सहज और आनंदपूर्ण वातावरण मिलना चाहिए। छोटे बच्चों के लिए सीखना तब अधिक प्रभावी हो सकता है, जब उन्हें अपनी बात रखने, गतिविधियों में भाग लेने और अपने आसपास की चीजों से सीखने का अवसर मिले।
इसी सोच के साथ ईसीसीई एजुकेटर को बाल वाटिका में गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के तरीके बताए गए। खेल, बातचीत, अनुभव और सहभागिता को सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया।
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चार संदर्भदाताओं ने दिया प्रशिक्षण
दो दिवसीय प्रशिक्षण में ईसीसीई एजुकेटर को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी प्रवक्ता लक्ष्मी शर्मा, एसआरजी प्रीति सिंह, एआरपी कल्पना छोंकर एवं शिक्षक संकुल मीनाक्षी वर्मा ने निभाई।
संदर्भदाताओं ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से बाल वाटिका-3 की दक्षताओं, गतिविधि आधारित शिक्षण, क्रियाशील बाल वाटिका और दैनिक वार पाठ योजना जैसे विषयों को व्यवहारिक तरीके से समझाया।
प्रशिक्षण के दौरान एजुकेटर को इस बात के लिए प्रेरित किया गया कि वे प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को अपनी-अपनी बाल वाटिकाओं में व्यवहारिक रूप से लागू करें और बच्चों को सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराएं।
68 ईसीसीई एजुकेटर हुए प्रशिक्षित
दो दिवसीय प्रशिक्षण में आगरा जिले के सभी विकासखंडों के 68 ईसीसीई एजुकेटर ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक प्रभावी और गतिविधि आधारित बनाने के लिए आवश्यक जानकारी और तकनीकों से परिचित कराया गया।
सभी विकासखंडों से एजुकेटर के शामिल होने से प्रशिक्षण के माध्यम से सीखी गई गतिविधियों और तकनीकों को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों की बाल वाटिकाओं तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मानित
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी ईसीसीई एजुकेटर को डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण पत्र मिलने पर प्रशिक्षुओं में उत्साह दिखाई दिया।
प्रमाण पत्र वितरण के माध्यम से प्रशिक्षण में उनकी सहभागिता को मान्यता दी गई और उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में सीखी गई गतिविधियों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण में रहा अधिकारियों का विशेष सहयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला समन्वयक प्रशिक्षण राजेश यादव तथा प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय सहित अन्य संबंधित अधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
प्रशिक्षण के दौरान समन्वय और व्यवस्थाओं को लेकर भी आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया, जिससे दो दिवसीय कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सका।
आदर्श बाल वाटिका की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
आगरा में आयोजित यह दो दिवसीय ईसीसीई एजुकेटर प्रशिक्षण प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक गतिविधि आधारित और बच्चों के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। प्रशिक्षण के माध्यम से एजुकेटर को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय उसे व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
खेल-खेल में सीखना, गतिविधियों के माध्यम से दक्षताओं का विकास और पूर्व तैयारी के साथ क्रियाशील बाल वाटिका का निर्माण इस प्रशिक्षण के प्रमुख संदेश रहे। अब प्रशिक्षित ईसीसीई एजुकेटर इन तकनीकों को बाल वाटिकाओं तक पहुंचाकर बच्चों के लिए सीखने का ऐसा वातावरण तैयार करने में भूमिका निभाएंगे, जहां शिक्षा के साथ आनंद और सहभागिता भी बनी रहे।
बाल शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने के लिए जरूरी है कि बच्चों को सीखने के शुरुआती वर्षों में सही वातावरण, उचित गतिविधियां और सहज मार्गदर्शन मिले। आगरा में आयोजित यह प्रशिक्षण इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ने का प्रयास है।

