आगरा में आदर्श बाल वाटिका को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण, 75 प्रतिभागियों ने सीखी गतिविधि आधारित शिक्षण की तकनीक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ECCE प्रशिक्षण में नोडल ARP, शिक्षक संकुल और CDPO ने लिया हिस्सा, शमसाबाद ब्लॉक ने क्विज में हासिल किया पहला स्थान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर और प्रभावी बनाने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) मास्टर ट्रेनर/कोर ग्रुप प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 24, 25 और 27 अगस्त 2026 को आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण में जनपद के नौ विकासखंडों से आए कुल 75 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
प्रशिक्षण में नोडल एआरपी, नोडल शिक्षक संकुल और बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए ऐसी आदर्श बाल वाटिका विकसित करना रहा, जहां खेल और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में सीखने की स्वाभाविक रुचि पैदा हो तथा उन्हें कक्षा एक में प्रवेश के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।
ऐसी हो आदर्श बाल वाटिका, जहां बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आए
प्रशिक्षण के प्रथम चरण के समापन अवसर पर डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि आदर्श बाल वाटिका ऐसी होनी चाहिए, जहां आने वाले प्रत्येक बच्चे के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि प्री-प्राइमरी शिक्षा बच्चों के आगे के शैक्षिक जीवन की मजबूत नींव तैयार करती है। इसलिए बाल वाटिका में बच्चों को उनकी उम्र, रुचि और सीखने की क्षमता के अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई गतिविधियों और तकनीकों को विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि बच्चे कक्षा एक में प्रवेश से पहले आवश्यक बुनियादी दक्षताएं विकसित कर सकें।
क्विज आधारित रहे प्रशिक्षण के सत्र
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक दिन के सत्रों को अधिक रोचक और सहभागी बनाने के लिए क्विज आधारित गतिविधियां आयोजित की गईं। इससे प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से शामिल होने का अवसर मिला।
क्विज प्रतियोगिता में शमसाबाद ब्लॉक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सीखी गई अवधारणाओं और गतिविधियों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया।
गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान संदर्भदाताओं ने बाल वाटिका के बच्चों के लिए आवश्यक दक्षताओं को गतिविधियों के माध्यम से विकसित करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।
प्रवक्ता लक्ष्मी शर्मा, एसआरजी प्रीति सिंह, एआरपी कल्पना छोंकर और शिक्षक संकुल मीनाक्षी वर्मा ने तीनों दिनों के विभिन्न सत्रों को गतिविधि आधारित बनाते हुए प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण में बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देने के बजाय खेल, गतिविधि, बातचीत, रचनात्मक कार्य और अनुभव आधारित सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
बाल वाटिका-3 के बच्चों की दक्षताओं पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान बाल वाटिका-3 के बच्चों के लिए आवश्यक दक्षताओं को गतिविधि आधारित तरीके से विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बच्चों के सीखने को उनकी आयु और विकास के स्तर के अनुरूप रोचक बनाया जाना चाहिए।
इसके साथ ही क्रियाशील बाल वाटिका के निर्माण के लिए अपनाई जा सकने वाली विभिन्न तकनीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। कक्षा में बच्चों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने, सीखने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और विभिन्न गतिविधियों को दैनिक शिक्षण से जोड़ने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया।
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
दैनिक वार पाठ योजना की अवधारणा समझाई
प्रशिक्षण में दैनिक वार पाठ योजना तैयार करने की अवधारणा को भी स्पष्ट किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल वाटिका में प्रत्येक दिन की गतिविधियों को बच्चों के सीखने के उद्देश्य से जोड़कर योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जाए।
इससे बच्चों के भाषा, संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और बुनियादी शैक्षिक विकास को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को दिए प्रमाण पत्र
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर डायट प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने सभी शिक्षक संकुलों, नोडल एआरपी और सीडीपीओ को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
प्रमाण पत्र वितरण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए उनसे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू करने की अपेक्षा की गई।
प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इसी दिशा में आयोजित यह प्रशिक्षण आगरा में बाल वाटिकाओं को अधिक गतिविधि आधारित, बाल केंद्रित और आनंददायी बनाने की पहल के रूप में सामने आया।
प्रशिक्षण का संदेश स्पष्ट रहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा केवल अक्षर और संख्या पहचान तक सीमित न होकर उनके समग्र विकास से जुड़ी होनी चाहिए। यदि बाल वाटिका स्तर पर बच्चों को सीखने का आनंददायी वातावरण मिलता है, तो आगे की कक्षाओं में उनके लिए सीखने की प्रक्रिया और अधिक सहज हो सकती है।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक प्रशिक्षण राजेश यादव तथा प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय का विशेष सहयोग रहा। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने प्रारंभिक शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों और तकनीकों को समझा तथा उन्हें विद्यालय स्तर पर लागू करने की दिशा में कार्य करने का संकल्प लिया।

