“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता”—डायट आगरा में पांच दिवसीय AI कार्यशाला का शुभारंभ
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 13 मई 2026।
तकनीक के तेजी से बदलते दौर में शिक्षा और प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। डायट आगरा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से पांच दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया।
यह कार्यशाला भविष्य की शिक्षा प्रणाली को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम का शुभारंभ डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार, सहायक पुलिस अधीक्षक अभय डागा तथा उप शिक्षा निदेशक/प्राचार्य अनिरुद्ध यादव द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।
शिक्षा और तकनीक के संगम की नई शुरुआत

डायट आगरा में आयोजित यह कार्यशाला केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को भविष्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने कहा:
“आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखना केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।”
उन्होंने कहा कि यदि हमें समय के साथ स्वयं को अद्यतन रखना है तो AI जैसी आधुनिक तकनीकों को समझना और उनका सही उपयोग सीखना बेहद जरूरी है।
शिक्षा में AI का बढ़ता महत्व

सोनम कुमार ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शिक्षा, प्रशासन, सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और दैनिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने शिक्षकों और प्रशिक्षुओं से अपील की कि वे AI का उपयोग:
- अध्ययन सामग्री तैयार करने
- आकलन प्रक्रिया को सरल बनाने
- स्मार्ट शिक्षण तकनीकों को अपनाने
- छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ाने
में करें।
“तकनीक का सही उपयोग ही बेहतर भविष्य की कुंजी है।”
डायट आगरा बना आधुनिक शिक्षा प्रशिक्षण का केंद्र

उप शिक्षा निदेशक/प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए शिक्षकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि यह पांच दिवसीय कार्यशाला विशेष रूप से डीएलएड बैच-2025 के प्रशिक्षुओं के लिए आयोजित की जा रही है, ताकि वे भविष्य में शिक्षण कार्य के दौरान AI आधारित तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
“यदि शिक्षक तकनीक से जुड़ेंगे, तभी छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो पाएंगे।”
AI का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने का संदेश

सहायक पुलिस अधीक्षक अभय डागा ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसका उपयोग सकारात्मक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि AI का सदुपयोग शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकता है।
“तकनीक तभी उपयोगी है, जब उसका प्रयोग समाज और मानवता के हित में किया जाए।”
पहले सत्र में AI का इतिहास और उपयोग समझाया गया
कार्यशाला के प्रथम सत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रज्ञा कावरा ने प्रशिक्षुओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इतिहास, विकास और वर्तमान समय में उसकी आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि AI अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- बैंकिंग
- ट्रैफिक सिस्टम
- रिसर्च
- सोशल मीडिया
जैसे क्षेत्रों में भी इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को ChatGPT, AI आधारित टूल्स और स्मार्ट लर्निंग प्लेटफॉर्म के बारे में भी जानकारी दी।
मशीन लर्निंग और स्मार्ट लर्निंग पर विशेष सत्र
कार्यशाला के दूसरे सत्र में डॉ. प्रतिभा रश्मि ने मशीन लर्निंग और उसके विभिन्न प्रकारों पर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग के माध्यम से कंप्यूटर डेटा के आधार पर सीखते हैं और निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।
इस दौरान प्रशिक्षुओं को:
- स्मार्ट लर्निंग
- रिसर्च में AI का उपयोग
- Perplexity जैसे AI टूल्स
- शिक्षा में डेटा आधारित शिक्षण
की जानकारी भी दी गई।
प्रशिक्षुओं को भविष्य के लिए तैयार करने की पहल
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शैक्षिक तकनीकी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि यह कार्यशाला राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तर प्रदेश, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI आधारित शिक्षण तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा, इसलिए प्रशिक्षुओं को अभी से इसके लिए तैयार करना आवश्यक है।
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शिक्षा में डिजिटल बदलाव की दिशा में बड़ा कदम
यह कार्यशाला इस बात का संकेत है कि अब शिक्षा विभाग भी तकनीकी बदलावों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
AI आधारित शिक्षा से:
- शिक्षण अधिक रोचक बनेगा
- छात्रों की सहभागिता बढ़ेगी
- मूल्यांकन प्रक्रिया आसान होगी
- व्यक्तिगत सीखने (Personalized Learning) को बढ़ावा मिलेगा
“AI भविष्य की शिक्षा का आधार बनने जा रहा है।”
कार्यक्रम में विशेषज्ञों और शिक्षकों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में आईईटी से डॉ. राजेश लवानिया, डॉ. गणेश चंद्र, प्रवक्ता अनिल कुमार, कल्पना सिन्हा, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, हिमांशु सिंह, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, संजीव कुमार सत्यार्थी, यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, अबू मोहम्मद आसिफ, रंजना पांडे, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित डायट स्टाफ की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के अंत में सेवापूर्व प्रभारी यशवीर सिंह ने सभी अतिथियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
डायट आगरा में शुरू हुई यह पांच दिवसीय AI कार्यशाला शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और आधुनिक शिक्षण प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह कार्यशाला न केवल प्रशिक्षुओं को भविष्य के लिए तैयार करेगी, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब भविष्य नहीं, वर्तमान की आवश्यकता है”—इसी संदेश के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।


