“एआई हमारी सहायक है, पर्यवेक्षक नहीं” — डायट आगरा में AI कार्यशाला के चौथे दिन प्रशिक्षुओं को मिला आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 16 मई 2026।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और आधुनिक शिक्षा में इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में आयोजित पांच दिवसीय AI कार्यशाला का चौथा दिन तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावहारिक अभ्यास और नवाचार से भरपूर रहा।
प्राचार्य अनिरुद्ध यादव के निर्देशन एवं इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET), खंदारी कैंपस आगरा के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को ChatGPT, Gemini और AI आधारित टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भविष्य के शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उन्हें स्मार्ट शिक्षण पद्धति के लिए तैयार करना रहा।
“AI हमारी मदद के लिए है, नियंत्रण के लिए नहीं”

कार्यशाला के द्वितीय सत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गिरीश कुमार सिंह ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा:
“एआई हमारी सहायक है, पर्यवेक्षक नहीं। तकनीक का उपयोग हमें बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, उस पर पूरी तरह निर्भर होने के लिए नहीं।”
उन्होंने कहा कि AI एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन अंतिम निर्णय और रचनात्मकता हमेशा इंसान के हाथ में ही रहनी चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को यह भी समझाया कि AI का उपयोग जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ करना बेहद आवश्यक है।
ChatGPT और Gemini से कंटेंट निर्माण की ट्रेनिंग

कार्यशाला के प्रथम सत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर इंजी. सौरभ गर्ग ने प्रशिक्षुओं को ChatGPT और Gemini जैसे आधुनिक AI टूल्स के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि AI की सहायता से अब:
- पाठ योजना (Lesson Plan) तैयार करना
- नोट्स बनाना
- प्रश्नपत्र तैयार करना
- बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) बनाना
- प्रस्तुति (PPT) तैयार करना
- स्क्रिप्ट और रिपोर्ट लेखन
जैसे कार्य बेहद आसान और तेज हो गए हैं।
“AI शिक्षकों के समय की बचत कर शिक्षण को अधिक प्रभावी बना सकता है।”
हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस से बढ़ी प्रशिक्षुओं की समझ

कार्यशाला की खास बात यह रही कि प्रशिक्षुओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अभ्यास (Hands-on Practice) भी कराया गया।
प्रशिक्षुओं ने AI टूल्स का उपयोग करके:
- पोस्टर डिजाइन किए
- PPT तैयार की
- प्रश्नपत्र बनाए
- कंटेंट राइटिंग की
इस दौरान प्रशिक्षुओं में नई तकनीकों को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला।
बेहतर AI रिजल्ट के लिए “प्रॉम्प्ट राइटिंग” पर जोर
इंजी. सौरभ गर्ग ने प्रशिक्षुओं को “Prompt Writing” की तकनीक भी सिखाई।
उन्होंने बताया कि AI से बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए सही तरीके से प्रश्न या निर्देश देना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
“जितना स्पष्ट प्रॉम्प्ट होगा, AI उतना ही बेहतर और उपयोगी उत्तर देगा।”
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हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कंटेंट निर्माण
कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में AI आधारित कंटेंट निर्माण की जानकारी दी गई।
इस दौरान यह बताया गया कि अब AI टूल्स के माध्यम से:
- अनुवाद
- सारांश
- रिपोर्ट लेखन
- भाषाई सुधार
जैसे कार्य आसानी से किए जा सकते हैं।
MS Word में AI का उपयोग सिखाया गया
द्वितीय सत्र में डॉ. गिरीश कुमार सिंह ने AI आधारित MS Word फीचर्स पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को बताया कि AI की सहायता से अब:
- स्मार्ट डॉक्यूमेंट तैयार करना
- ऑटो फॉर्मेटिंग
- व्याकरण और वर्तनी जांच
- रिज्यूमे और रिपोर्ट बनाना
- दस्तावेजों का स्वतः सारांश तैयार करना
जैसे कार्य बेहद सरल हो गए हैं।
शिक्षा में AI का बढ़ता महत्व
कार्यक्रम में बोलते हुए शैक्षिक तकनीकी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि ChatGPT, Gemini और Word में AI के उपयोग से रिपोर्ट राइटिंग और शिक्षण कार्य काफी आसान हो गया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि:
“AI से प्राप्त जानकारी को उपयोग करने से पहले उसकी सत्यता और प्रमाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है।”
उन्होंने AI को वर्तमान समय का सबसे प्रासंगिक और उपयोगी तकनीकी उपकरण बताया।
भविष्य के शिक्षकों को तकनीकी रूप से तैयार करने की पहल
यह कार्यशाला इस बात का संकेत है कि अब शिक्षा विभाग भी तकनीक आधारित शिक्षण को प्राथमिकता दे रहा है।
AI आधारित शिक्षा से:
- शिक्षण अधिक रोचक बनेगा
- छात्रों की भागीदारी बढ़ेगी
- मूल्यांकन प्रक्रिया सरल होगी
- समय की बचत होगी
- डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा
“भविष्य की शिक्षा AI और मानवीय रचनात्मकता के संतुलन पर आधारित होगी।”
कार्यक्रम में रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, हिमांशु सिंह, रंजना पांडे, यशपाल सिंह, अबु मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा सहित सभी प्रशिक्षुओं की सक्रिय सहभागिता रही।
निष्कर्ष
डायट आगरा में आयोजित AI कार्यशाला का चौथा दिन प्रशिक्षुओं के लिए ज्ञान, तकनीक और व्यावहारिक अनुभव का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
इस कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में AI शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनने जा रहा है, लेकिन इसका सही और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग ही इसकी वास्तविक शक्ति है।
“तकनीक तभी उपयोगी है, जब वह मानव क्षमता को और बेहतर बनाए”—इसी संदेश के साथ सत्र संपन्न हुआ।


