खेल-खेल में छात्र-छात्राओं को शिक्षा की बारीकियां सिखा रहीं शिक्षिका रिजवाना, राष्ट्रीय स्तर पर चमका विदरपुर स्कूल
नवाचार, डिजिटल शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता से बदली विद्यालय की तस्वीर, ग्रामीण भी कर रहे शिक्षिका की पहल की सराहना
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
दैनिक समाचार, आगरा/फतेहपुर सीकरी। जब शिक्षा को बच्चों की रुचि और उनकी कल्पनाशक्ति से जोड़ दिया जाए तो पढ़ाई बोझ नहीं, बल्कि सीखने का आनंद बन जाती है। इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास फतेहपुर सीकरी ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय विदरपुर में कार्यरत शिक्षिका रिजवाना कर रही हैं। ‘मेरा विद्यालय मेरी पहचान’ की भावना के साथ वह बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई की बारीकियां समझाने के साथ-साथ उनके अंदर आत्मविश्वास, रचनात्मकता और आगे बढ़ने की इच्छा विकसित करने का प्रयास कर रही हैं।
शिक्षिका रिजवाना की पहल का असर विद्यालय की गतिविधियों और विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी दिखाई दे रहा है। अब प्राथमिक विद्यालय विदरपुर में केवल गांव के बच्चे ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य गांवों से भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रहे हैं। विद्यालय के प्रति ग्रामीणों का बढ़ता भरोसा और सामुदायिक सहभागिता भी इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन रही है।
बच्चों की रुचि के अनुसार तैयार किया जा रहा सीखने का वातावरण

शिक्षिका रिजवाना का मानना है कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता और रुचि अलग होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिसमें वे अपनी पसंद के अनुसार सीखने और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर पा सकें।
उनका प्रयास केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। बच्चों के सर्वांगीण विकास, उनकी प्रतिभा को पहचानने और उन्हें आगे की बेहतर शिक्षा के अवसरों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसी क्रम में विद्यार्थियों को अटल आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और विद्याज्ञान विद्यालय जैसी संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभावान बच्चे आगे चलकर बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त कर सकें।
लेजर लाइट और साउंड से सीख रहे वर्णमाला

विद्यालय में शिक्षण को रोचक बनाने के लिए कई प्रकार के नवाचार किए जा रहे हैं। छोटे बच्चों को लेजर लाइट और साउंड के माध्यम से वर्णमाला का ज्ञान कराया जाता है। वहीं एक्शन के साथ वर्णमाला सीखने की गतिविधियां भी कराई जाती हैं, जिससे बच्चे पढ़ाई में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
अक्षर गीत के माध्यम से दो अक्षर के शब्द बनाना भी शिक्षण की इसी रचनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। बच्चों को गीत और गतिविधि के माध्यम से अक्षरों को जोड़ना सिखाया जाता है।
‘आओ बच्चों खेलें खेल, अक्षरों का करेंगे मेल’ जैसे रचनात्मक तरीकों से बच्चों को शब्द निर्माण की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इससे पढ़ाई और खेल के बीच की दूरी कम होती है और बच्चे बिना दबाव के सीखने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी खेल-खेल में

विद्यालय में शिक्षण का दायरा केवल सामान्य कक्षा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा गया है। बच्चों को भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी शुरुआती स्तर से तैयार किया जा रहा है।
खेल-खेल में प्रश्नोत्तरी, गतिविधि आधारित अभ्यास और अलग-अलग शिक्षण तकनीकों के माध्यम से बच्चों की समझ विकसित करने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल याद करने की क्षमता विकसित करना नहीं, बल्कि उन्हें सवाल पूछने, सोचने और उत्तर तलाशने के लिए प्रेरित करना है।
शिक्षिका रिजवाना के इस प्रयास से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उन्हें आगे की परीक्षाओं के लिए तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
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डिजिटल शिक्षा और ICT का भी हो रहा प्रयोग
बदलते दौर के साथ विद्यालय में डिजिटल शिक्षा और ICT का प्रयोग भी किया जा रहा है। तकनीक को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़कर बच्चों के लिए विषयों को अधिक रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया जाता है।
डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को दृश्य और गतिविधि आधारित तरीके से सीखने के अवसर मिल रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों ने बनाई पहचान
विद्यालय में किए जा रहे नवाचार और बच्चों की मेहनत का परिणाम विद्यार्थियों की उपलब्धियों के रूप में सामने आया है। प्राथमिक विद्यालय विदरपुर के पांच विद्यार्थियों को वर्ष 2026 में मुफ्त बेंगलुरु हवाई यात्रा का अवसर मिला। इसी के साथ विद्यालय को 50 हजार रुपये का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
विद्यालय लगातार तीन वर्षों से निपुण विद्यालय घोषित होता रहा है। यह उपलब्धि विद्यालय में किए जा रहे निरंतर प्रयासों और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को दर्शाती है।
विप्रो अर्थियान अवार्ड के लिए पांच विद्यार्थियों का चयन
विद्यालय के विद्यार्थियों ने पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। विप्रो अर्थियान अवार्ड के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पांच छात्र-छात्राओं का चयन हुआ। इनमें भारती, मयंक, सुखवीर, रोहित और सपना शामिल हैं।
इसके अलावा नेशनल अर्थियन ओशियन चैलेंज के लिए योगेश, प्रदीप और हेमा का चयन हुआ।
वहीं अर्थियान पर्यावरण मित्र कार्यक्रम में राज्य स्तर पर विद्यालय के पांच बच्चों मोंटी, प्रिया, पायल, अर्जुन और हिमांशी का चयन हुआ।
इन उपलब्धियों ने यह दिखाया है कि ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन और अवसर मिले तो राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में अपनी पहचान बना सकते हैं।
गर्ल्स लीडरशिप समिट में भी छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा
विद्यालय की छात्राओं ने नेतृत्व और संवाद के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। नेशनल लेवल गर्ल्स लीडरशिप समिट के भाषण-संवाद कार्यक्रम के लिए प्रिया और हिमांशी का चयन हुआ।
शिक्षिका रिजवाना के मार्गदर्शन में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी बात रखने, आत्मविश्वास के साथ संवाद करने और विभिन्न मंचों पर प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विद्याज्ञान और अटल आवासीय विद्यालय में भी चयन
विद्यालय के विद्यार्थियों ने आगे की शिक्षा के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की है। विद्याज्ञान प्रवेश परीक्षा में छात्रा प्रिया का चयन हुआ, जबकि अटल आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा में छात्र सर्वेश और छात्रा प्रिया का चयन हुआ।
ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों का इस प्रकार की परीक्षाओं में चयन होना विद्यालय और पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात माना जा रहा है।
इन सफलताओं से दूसरे विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने और बेहतर शैक्षणिक अवसरों के लिए प्रयास करने की प्रेरणा मिल रही है।
ग्रामीणों ने निभाई सामुदायिक सहभागिता
विद्यालय में बदलाव की इस कहानी में ग्रामीणों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण रही है। शिक्षिका रिजवाना की प्रेरणा से ग्रामीणों ने विद्यालय की आवश्यकताओं को समझते हुए सामुदायिक सहयोग प्रदान किया।
ग्रामीणों की ओर से विद्यालय को इनवर्टर और बैटरी, प्रिंटर, डेस्क एवं बेंच सेट, ग्रीन बोर्ड, किचन गार्डन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
इसके साथ ही वाई-फाई की सुविधा के लिए सोलर प्लेट की व्यवस्था में भी सहयोग किया गया। विद्यार्थियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अटल आवासीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय से संबंधित पुस्तकें एवं लेखन सामग्री भी विद्यालय को उपलब्ध कराई गई।
इन संसाधनों से विद्यालय में स्मार्ट क्लास के संचालन और आधुनिक शिक्षण गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
ग्रामीणों का बढ़ा विद्यालय पर भरोसा
विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों और सुविधाओं में सुधार का असर ग्रामीणों के नजरिए में भी दिखाई दे रहा है। अब आसपास के गांवों के अभिभावक भी अपने बच्चों को प्राथमिक विद्यालय विदरपुर में पढ़ाने के लिए भेज रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि जब विद्यालय में बच्चों को बेहतर वातावरण, डिजिटल संसाधन, खेल-खेल में सीखने के अवसर और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन मिल रहा है तो सरकारी विद्यालयों के प्रति भरोसा भी मजबूत होता है।
शिक्षिका रिजवाना की पहल को ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक प्रयास के रूप में देख रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण को भी दिया जा रहा बढ़ावा
विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। ग्राम प्रधान के सहयोग से विद्यालय परिसर में मिट्टी डलवाकर पौधरोपण कराया गया।
किचन गार्डन और पौधरोपण जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का अवसर मिल रहा है। बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण उनके बेहतर भविष्य से भी जुड़ा है।
हर बच्चे को आगे बढ़ाने का संकल्प
शिक्षिका रिजवाना का कहना है कि उनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देना है। वह चाहती हैं कि सरकार की ओर से संचालित विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं और अवसरों का लाभ अधिक से अधिक बच्चे प्राप्त करें और आर्थिक कारणों से कोई प्रतिभावान विद्यार्थी बेहतर शिक्षा से वंचित न रहे।
उनकी कोशिश है कि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, ताकि वे आगे चलकर बेहतर विद्यालयों और संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी शिक्षा जारी रख सकें।
सरकारी विद्यालयों के प्रति बदलती सोच की तस्वीर
प्राथमिक विद्यालय विदरपुर की कहानी केवल एक विद्यालय में किए जा रहे नवाचारों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की तस्वीर भी पेश करती है, जिसमें शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण मिलकर विद्यालय को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।
खेल-खेल में शिक्षा, डिजिटल संसाधनों का प्रयोग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता जैसे प्रयासों ने विद्यालय की गतिविधियों को नया आयाम दिया है। विद्यार्थियों का राज्य और राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न कार्यक्रमों में चयन इस बात का उदाहरण है कि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को यदि उचित अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे भी बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
शिक्षिका रिजवाना का प्रयास इसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है—जहां शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहकर बच्चों के आत्मविश्वास, प्रतिभा, सोच और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ रही है।


