आगरा में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का बड़ा संदेश: कम बारिश में धान नहीं, ज्वार-बाजरा और दलहनी फसलें अपनाएं किसान; एक सप्ताह में डीएपी-यूरिया उपलब्ध कराने के निर्देश
‘खेत बचाओ अभियान’ और तिलहन मेले में किसानों से सीधा संवाद, अल नीनो के प्रभाव से बचाव के लिए दी वैज्ञानिक खेती की सलाह
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 09 जुलाई 2026 |
उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा और अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने किसानों को समय रहते वैज्ञानिक खेती अपनाने का संदेश दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, बिचपुरी में ‘खेत बचाओ अभियान’, जनपद स्तरीय तिलहन मेला एवं कृषक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की।
इस अवसर पर मंत्री ने किसानों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि बदलते मौसम और कम वर्षा की स्थिति में किसानों को अधिक पानी वाली पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय कम पानी, कम लागत और कम उर्वरक वाली वैकल्पिक फसलों की खेती अपनानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर सभी सहकारी समितियों पर यूरिया, डीएपी, बीज एवं अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक रानी पक्षालिका सिंह, विधायक चौधरी बाबूलाल तथा एमएलसी मानवेंद्र सिंह गुरुजी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। आयोजन में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
किसानों को मिला योजनाओं का लाभ, वितरित किए गए सोलर पंप और कृषि यंत्र

कार्यक्रम के दौरान किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया।
इस अवसर पर—
- प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप वितरित किए गए।
- किसानों को ट्रैक्टर की चाबियां सौंपी गईं।
- किसान क्रेडिट कार्ड के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए।
- कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित तिल के उन्नत बीज उपलब्ध कराए गए।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए।
- किसानों को विभिन्न बीज मिनी किट भी प्रदान किए गए।
इसके अलावा कृषि विभाग, इफको, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग, आलू अनुसंधान केंद्र, लीड बैंक और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
कम बारिश में इन फसलों की खेती करें किसान

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में सामान्य से लगभग 55 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। ऐसे में किसानों को अधिक पानी वाली धान जैसी फसलों की बजाय—
- ज्वार
- बाजरा
- मक्का
- उड़द
- मूंग
- कोदो
- सांवा
- मड़ुवा
जैसी मोटे अनाज और दलहनी फसलों की खेती अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन फसलों में पानी और उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, लागत घटती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ भी मिलता है।
अल नीनो का असर, वैज्ञानिक खेती ही समाधान
अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि अल नीनो के कारण वर्षा में कमी आने की संभावना बनी हुई है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मौसम के अनुसार खेती की रणनीति बदलें और जल संरक्षण को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि—
“भविष्य की खेती वही सफल होगी जो कम पानी, कम लागत और आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी।”
MSP पर खरीद से किसानों को मिलेगा लाभ
मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
अब केवल धान और गेहूं ही नहीं बल्कि—
- सरसों
- अरहर
- मक्का
- बाजरा
- अन्य खरीफ फसलें
भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि किसानों के खातों में भुगतान 7 से 10 दिनों के भीतर सीधे डीबीटी के माध्यम से भेजा जा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था से मिल रहा योजनाओं का लाभ
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शी तरीके से योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने बताया कि—
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
- प्रधानमंत्री कुसुम योजना
- कृषि यंत्र अनुदान
- बीज अनुदान
- किसान क्रेडिट कार्ड
जैसी योजनाओं का लाभ ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सोलर पंपों पर 60 प्रतिशत तक अनुदान किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सिंचाई की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
खाद की कमी पर होगी सख्त कार्रवाई
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी सहकारी समिति पर यूरिया, डीएपी या अन्य उर्वरकों की कमी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी केंद्र पर खाद उपलब्ध नहीं मिली तो संबंधित अधिकारी सीधे कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे।
उन्होंने एक सप्ताह के भीतर सभी समितियों पर पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील
कृषि मंत्री ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि किसानों को—
- गोबर की खाद
- जीवामृत
- घनजीवामृत
- हरी खाद
- प्राकृतिक खेती
को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और खेती की लागत कम हो सके।
उन्होंने प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को भी समय की आवश्यकता बताया।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जुड़ने की अपील
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण आवश्यक है।
उन्होंने जानकारी दी कि 12 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में स्वयं पौधारोपण भी किया तथा निर्माणाधीन किसान छात्रावास का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
किसानों ने रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान आयोजित कृषक संवाद में किसानों ने सीधे कृषि मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं।
मुख्य रूप से किसानों ने—
- मक्का खरीद केंद्र खोलने
- मूंग खरीद केंद्र शुरू करने
- आलू उत्पादकों की समस्याओं
- डीएपी की उपलब्धता
- उर्वरकों की समय पर आपूर्ति
जैसे मुद्दे उठाए।
कृषि मंत्री ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
आधुनिक कृषि से आत्मनिर्भर बनेगा किसान
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती, आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण, प्राकृतिक कृषि और गुणवत्तापूर्ण बीजों के उपयोग से किसान भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने और सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में संयुक्त कृषि निदेशक हरेंद्र मिश्रा, संयुक्त कृषि निदेशक विनोद यादव, उप निदेशक कृषि मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी आर.एस. चौहान, अग्रणी जिला प्रबंधक ऋषिकेश बनर्जी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.के. पांडे सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को बदलते मौसम के अनुरूप खेती की नई रणनीतियों, सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे भविष्य में कृषि उत्पादन और किसानों की आय दोनों को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया।


