
राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), आगरा में बाल दिवस पर मनाया गया भव्य “बाल कार्निवाल” नृत्य, नाटक, लेखन और खेल प्रतियोगिताओं से खिला प्रतिभा का आकाश—प्रशस्ति पत्र व शील्ड देकर किया गया सम्मान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 14 नवम्बर 2025
बाल दिवस—यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बचपन की पवित्रता, मासूमियत और भविष्य की आशा का उत्सव है।
इसी भावना के साथ 14 नवंबर को राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), आगरा का परिसर आज बच्चों की हंसी, तालियों, सांस्कृतिक रंगों और मनोवैज्ञानिक पुनर्संवार की ऊर्जा से भर उठा।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद की किशोर न्याय समिति के निर्देशों एवं जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक के मार्गदर्शन में आयोजित इस बाल दिवस कार्यक्रम ने संप्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों के जीवन में एक ताज़गी, आत्मविश्वास और सामाजिक अपनत्व की अनुभूति जगाई।
सुबह का दृश्य — सजावट, रंग, संगीत और उम्मीदों से भरा वातावरण
संप्रेक्षण गृह का प्रांगण सुबह से ही सजा-धजा चल रहा था—
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रंगीन गुब्बारे
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हाथ से बनी सजावट
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रंगोली
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मंच पर रखी उज्ज्वल रोशनी
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बाल दिवस से संबंधित चित्र और पोस्टर
किशोरों के चेहरे पर एक चमक थी—
शायद इसलिए कि आज का दिन उन्हें यह महसूस कराने वाला था कि
वे अकेले नहीं हैं, बल्कि समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता—न्यायिक अधिकारियों की संवेदनशील उपस्थिति

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद, प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अपर जिला जज, आगरा द्वारा की गई।
उनकी उपस्थिति किशोरों के लिए सम्मान और विश्वास का प्रतीक थी।
विशिष्ट अतिथि शामिल रहे—
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डॉ. दिव्यानंद द्विवेदी, अपर जिला जज एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
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यमुनाधर चौहान, अपर जिला अधिकारी
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अजय कुमार सोनी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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संप्रेक्षण गृह के प्रभारी अधीक्षक, परामर्शदाता, स्टाफ सदस्य
इन सभी अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक गंभीरता, भावनात्मक गहराई और मानवीय दृष्टिकोण प्रदान किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम—नृत्य और नाटक से किशोरों ने जीता सभी का दिल

किशोरों ने मंच पर अपने-अपने हुनर का ऐसा प्रदर्शन किया कि उपस्थित अधिकारी भी भावुक हो उठे।
प्रस्तुत कार्यक्रम—
नृत्य प्रस्तुति
जोश से भरे नृत्य ने माहौल में नई ऊर्जा भर दी।
बच्चों के हावभाव, ताल और आत्मविश्वास देखकर यह महसूस हुआ कि
कला बच्चों के मन को साफ करने और उन्हें आत्म-विश्वास देने का सबसे बड़ा माध्यम है।
लोकगीत प्रस्तुति
किशोरों ने पारंपरिक लोकगीतों को अपनी आवाज़ में प्रस्तुत किया।
उनकी आवाज़ में एक तरह की मासूमियत, दर्द और उम्मीद का मिला-जुला भाव था—जिसने कार्यक्रम को और भी आत्मीय बना दिया।
नाटक प्रदर्शन
यह कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा रहा।
नाटक सामाजिक संदेशों पर आधारित था—
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दोस्ती
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परिवार
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अपराध से दूर रहने की प्रेरणा
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सुधार
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और नई शुरुआत
नाटक ने दर्शाया कि
अगर बच्चों को सही दिशा मिले, तो वे अपने जीवन को नए सिरे से जी सकते हैं।
लेख प्रतियोगिता—महान लेखकों और व्यक्तित्वों पर किशोरों की शानदार अभिव्यक्ति
लेख प्रतियोगिता में किशोरों ने—
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महात्मा गांधी
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प्रेमचंद
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रवींद्रनाथ टैगोर
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डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
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सरदार पटेल
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नेहरू
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और अन्य राष्ट्रीय नायकों
पर गहन लेख प्रस्तुत किए।
कई लेखों में किशोरों की संवेदनशीलता, संघर्ष और नई शुरुआत की इच्छा दिखाई दी।
यह इस बात का प्रमाण था कि संप्रेक्षण गृह में उन्हें शिक्षा, मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण मिल रहा है।
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खेल प्रतियोगिताएँ—अनुशासन, टीमवर्क और सकारात्मक ऊर्जा का संगम
खेल प्रतियोगिताओं ने बच्चों में—
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एकाग्रता
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अनुशासन
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टीम भावना
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और सकारात्मक सोच
जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दौड़, समूह खेल, कुशलता आधारित छोटे खेलों में किशोरों की ऊर्जा देखते ही बनती थी।
उनके चेहरों पर जोश और मन में जीतने की भावना नजर आ रही थी।
सम्मान समारोह—प्रशस्ति पत्र और शील्ड से खिल उठे किशोरों के चेहरे

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को—
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प्रशस्ति पत्र
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शील्ड
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प्रोत्साहन पुरस्कार
दिए गए।
पुरस्कार पाते समय बच्चों के चेहरे पर जो प्रसन्नता और गर्व की चमक थी—
वह इस आयोजन की असली सफलता थी।
इस सम्मान ने यह संदेश दिया कि—
हर बच्चा, चाहे उसकी परिस्थिति कुछ भी हो, उत्साह और अवसर का अधिकारी है।
अपर जिला जज राजेंद्र प्रसाद का प्रेरणादायक संदेश
समापन संबोधन में श्री राजेंद्र प्रसाद ने कहा—
“आप सभी में अपार क्षमता है। जीवन में आगे बढ़ने और सुधार की हमेशा जगह होती है।
आप मेहनत करें, अच्छा करें—मैं दिल से कामना करता हूँ कि आपका भविष्य उज्जवल हो।”
उनकी यह बात किशोरों के चेहरे पर नई उम्मीद और आत्मबल की चमक बनकर दिखाई दी।
बाल दिवस का वास्तविक अर्थ—संवेदनशीलता, पुनर्संस्कार और भविष्य की ओर कदम
इस आयोजन ने यह साबित किया कि—
राजकीय संप्रेक्षण गृह में केवल सुरक्षा नहीं,
बल्कि संवेदना, शिक्षा, कला, खेल और परामर्श के माध्यम से
किशोरों को एक नई शुरुआत दी जा रही है।
बाल दिवस ने यहां—
✔ बच्चों की मुस्कान वापस लौटाई
✔ उनकी प्रतिभा को मंच दिया
✔ सुधार और उज्ज्वल भविष्य का संदेश दिया
✔ आत्मविश्वास की लौ जलाई
यही बाल दिवस का असली अर्थ है—
हर बच्चे को समान अवसर, सम्मान और नई दिशा देना।
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