आगरा केंद्रीय कारागार का निरीक्षण: जिलाधिकारी, न्यायाधीश और पुलिस आयुक्त ने लिया जायजा
आगरा केंद्रीय कारागार का जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी, जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक और अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह ने निरीक्षण किया।
आगरा केंद्रीय कारागार का निरीक्षण: जिलाधिकारी, न्यायाधीश और पुलिस आयुक्त ने सुविधाओं व व्यवस्थाओं का लिया गहन जायजा
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 23 सितम्बर 2025
आगरा के केंद्रीय कारागार में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निरीक्षण अभियान चलाया गया। इसमें जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी, जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक और अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह ने संयुक्त रूप से कारागार की व्यवस्थाओं का गहराई से मूल्यांकन किया। यह निरीक्षण न केवल सुरक्षा व्यवस्था का आकलन था, बल्कि बंदियों के जीवन स्तर और उनके लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की पारदर्शिता भी इसकी मुख्य प्राथमिकता रही।
बंदियों से सीधा संवाद: प्रशासन की मानवीय पहल
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सिर्फ फाइलों और रिपोर्ट्स पर भरोसा नहीं किया, बल्कि सीधे बंदियों से बातचीत की।
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बंदियों ने बताया कि उन्हें समय पर भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है।
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साफ-सफाई और दैनिक गतिविधियों को लेकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया।
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कई बंदियों ने यह भी कहा कि जेल प्रशासन समय-समय पर उनकी समस्याओं को सुनता है।
इस तरह का संवाद बंदियों में विश्वास और आत्मीयता जगाने का प्रयास है, जिससे उन्हें समाज का हिस्सा होने का एहसास हो।
चिकित्सालय का विस्तृत निरीक्षण: स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
निरीक्षण दल ने जेल में बने चिकित्सालय (हॉस्पिटल यूनिट) का भी दौरा किया।
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भर्ती मरीज बंदियों से मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को सुना गया।
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दवाओं की उपलब्धता और उनके सही रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया गया।
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मेडिकल स्टॉक रूम का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों ने दवाओं की गुणवत्ता और मात्रा दोनों की पुष्टि की।
यह कदम सुनिश्चित करता है कि बंदियों को आपातकालीन परिस्थितियों में भी उचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
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भोजन और स्वच्छता पर विशेष ध्यान
केंद्रीय कारागार की पाकशाला (किचन) का निरीक्षण भी किया गया।
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मौके पर तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता और पोषण स्तर की जांच की गई।
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अधिकारियों ने भोजन में स्वच्छता और पोषण के संतुलन की सराहना की।
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इस दौरान यह निर्देश भी दिए गए कि बंदियों को हमेशा मानक गुणवत्ता का भोजन ही मिले।
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क्षमता और भीड़भाड़ का मुद्दा
जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने कारागार की क्षमता और वास्तविक बंदियों की संख्या के बीच असमानता का मुद्दा उठाया।
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अधिकारियों ने बताया कि क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
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इसका उद्देश्य जेलों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना और प्रत्येक बंदी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रशासनिक व न्यायिक टीम की उपस्थिति

निरीक्षण में उच्च अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही, जिनमें शामिल थे:
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एडीजे दिव्यानंद दुबे
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केंद्रीय कारागार अधीक्षक ओ.पी. कटियार
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डिप्टी जेलर विशाल मद्धेशिया
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शिवम कुमार सहित कई अन्य अधिकारी
इनकी मौजूदगी ने इस निरीक्षण को और अधिक प्रभावशाली बनाया।
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मानवाधिकार और सुधारों की दिशा में कदम
इस निरीक्षण का सबसे बड़ा संदेश यह है कि प्रशासन और न्यायपालिका दोनों ही बंदियों के अधिकारों और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए गंभीर हैं।
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स्वच्छता, भोजन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
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सुरक्षा और कानूनी सहायता जैसी आवश्यकताओं की नियमित समीक्षा की जा रही है।
यह पहल जेल सुधार (Prison Reforms) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न केवल बंदियों का जीवन सुधरेगा बल्कि समाज में न्याय और मानवता का संदेश भी जाएगा।
निष्कर्ष
आगरा केंद्रीय कारागार का यह निरीक्षण केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि बंदियों को भी न्याय, सम्मान और मानवीय सुविधाएं मिलनी चाहिए। जिलाधिकारी, न्यायाधीश और पुलिस आयुक्त की इस संयुक्त पहल से उम्मीद है कि आने वाले समय में जेलों की व्यवस्थाएं और पारदर्शी तथा मानवीय बनेंगी।
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