आगरा में श्री अन्न (मिलेट्स) बीज उत्पादन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
कृषि विभाग आगरा ने FPO किसानों के लिए श्री अन्न (मिलेट्स) बीज उत्पादन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया। विशेषज्ञों ने तकनीक और पोषण पर दी जानकारी।

आगरा में श्री अन्न (मिलेट्स) बीज उत्पादन पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण: किसानों को मिला तकनीक और पोषण का ज्ञान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 22 सितम्बर 2025
देशभर में “श्री अन्न क्रांति” (Millets Revolution) को बढ़ावा देने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है। कृषि विभाग, आगरा ने कृषि विज्ञान केंद्र, राजा बलवंत सिंह महाविद्यालय, बिचपुरी में किसानों और कृषक उत्पादन संगठन (FPO) के सदस्यों के लिए बीज उत्पादन तकनीक पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
यह कार्यक्रम न केवल किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से बीज उत्पादन के गुर सिखा रहा है, बल्कि श्री अन्न (Millets) की खेती को भविष्य का स्वास्थ्य व आय का साधन बनाने का संदेश भी दे रहा है।
क्यों जरूरी है मिलेट्स (श्री अन्न)?
पिछले कुछ वर्षों से भारत सरकार और राज्य सरकारें मिलेट्स को बढ़ावा दे रही हैं।
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मिलेट्स (जैसे ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी) में उच्च पोषण मूल्य होता है।
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ये ग्लूटेन-फ्री होते हैं और डायबिटीज व मोटापे जैसे रोगों से बचाव में मददगार हैं।
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कम पानी और कम खाद में भी उपज देने के कारण ये जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के दौर में किसानों के लिए सुरक्षित फसल मानी जाती हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद देशभर में इसका उत्पादन और उपभोग लगातार बढ़ रहा है।
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प्रशिक्षण का उद्देश्य और मुख्य बिंदु
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मकसद किसानों को बीज उत्पादन तकनीक (Seed Production Technology) में दक्ष बनाना है। जब किसान खुद शुद्ध और गुणवत्ता युक्त बीज तैयार करेंगे, तो वे आत्मनिर्भर बनेंगे और दूसरी जगहों पर भी सप्लाई कर सकेंगे।
कार्यक्रम में किसानों को बताया गया:
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गुणवत्ता युक्त बीज की पहचान और चयन
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बीज शोधन (Seed Treatment) की प्रक्रिया
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बीज उत्पादन में वैज्ञानिक तकनीकें
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मिलेट्स के पोषण और बाज़ार मूल्य की जानकारी
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बीज भंडारण और मार्केटिंग के तरीके
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किसानों के साथ विशेषज्ञों की बातचीत

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उप कृषि निदेशक, मुकेश कुमार ने किसानों को बीज उत्पादन के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही बीज ही अच्छी पैदावार और किसानों की आय बढ़ाने का आधार है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने मिलेट्स के पोषण संबंधी महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्री अन्न केवल फसल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पोषण की कुंजी है।
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विषय वस्तु विशेषज्ञ, शिवम प्रताप ने किसानों को बीज उत्पादन की आधुनिक विधियां और प्रयोगात्मक उदाहरण देकर समझाया।
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डॉ. रामनिवास, जिला कार्यालय प्रभारी, भारतीय किसान मोर्चा ने अध्यक्षता करते हुए किसानों को प्रोत्साहित किया कि वे इस प्रशिक्षण का लाभ लेकर अपने संगठन (FPO) को और मज़बूत बनाएं।
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मंच संचालन सलीम अली खां (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन सलाहकार) ने किया और किसानों को कार्यक्रम से जोड़ते रहे।
किसानों की बड़ी भागीदारी
इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के पटल सहायक वैभव कुमार, तकनीकी सहायक सच्चिदानंद दुबे और सर्वेश कुमार भी मौजूद रहे।
सबसे खास बात यह रही कि 100 से अधिक किसान और कृषक उत्पादन संगठन के सदस्य इस प्रशिक्षण में शामिल हुए। किसानों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर बीज उत्पादन, बाज़ार और सरकारी योजनाओं पर जानकारी हासिल की।
भविष्य की दिशा: किसानों के लिए नए अवसर

यह दो दिवसीय प्रशिक्षण केवल जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि वे अपने खेतों में सीखी गई तकनीकें लागू कर सकें।
- कार्यक्रम का दूसरा दिन (23 सितम्बर 2025) किसानों को बीज शोधन, उत्पादन तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन (Practical Demonstration) और मिलेट्स बीज की मार्केटिंग रणनीतियों पर केंद्रित होगा।
इससे किसानों को:
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आत्मनिर्भरता (Self-Reliance)
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अच्छी आमदनी (Better Income)
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बाज़ार तक सीधी पहुँच (Market Linkage)
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और पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) मिलेगी।
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