Kheragarh News: गुरु पूर्णिमा पर पूर्व सैनिक ने पेश की मिसाल, प्राथमिक विद्यालय कछपुरा को भेंट कीं कुर्सियां, बच्चों को बांटी लेखन सामग्री
खेरागढ़ के प्राथमिक विद्यालय में समाजसेवी लोकेश कुमार फौजी का प्रेरणादायी सहयोग, शिक्षा के प्रति समर्पण देख बढ़ाया मदद का हाथ
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
खेरागढ़ (आगरा)। गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल गुरुजनों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को समझते हुए उसके विकास में योगदान देने की प्रेरणा भी देता है। इसी भावना को साकार करते हुए आगरा जनपद के खेरागढ़ ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय कछपुरा, सरेंडा में एक ऐसा प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिला, जिसने यह संदेश दिया कि जब विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए समर्पित होते हैं, तो समाज भी उनके साथ मजबूती से खड़ा होता है।
समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त सैनिक लोकेश कुमार फौजी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यालय का भ्रमण किया। विद्यालय की अनुशासित व्यवस्था, बच्चों की सीखने के प्रति उत्सुकता और शिक्षकों के समर्पण को देखकर उन्होंने विद्यालय के लिए सामुदायिक सहयोग की सराहनीय पहल की।
विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था ने जीता दिल

विद्यालय भ्रमण के दौरान लोकेश कुमार फौजी ने कक्षाओं का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों को करीब से देखा। उन्होंने पाया कि विद्यालय में नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन कराया जा रहा है तथा बच्चे पूरे उत्साह के साथ अध्ययन में भाग ले रहे हैं।
विद्यालय का अनुशासित वातावरण, शिक्षकों की जिम्मेदारी के प्रति निष्ठा और विद्यार्थियों की सीखने की ललक ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यालय समाज के लिए प्रेरणा हैं, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है।
विद्यालय को भेंट किया पांच कुर्सियों का सेट

विद्यालय की उत्कृष्ट कार्यशैली से प्रभावित होकर समाजसेवी एवं पूर्व सैनिक लोकेश कुमार फौजी ने सामुदायिक सहयोग के तहत विद्यालय को ₹1,500 प्रति कुर्सी की दर से पांच कुर्सियों का एक सेट भेंट किया।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों को केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करे तो सरकारी विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं में तेजी से सुधार किया जा सकता है।
विद्यालय परिवार ने इस सहयोग को शिक्षा के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
बच्चों को वितरित की लेखन सामग्री और स्वल्पाहार
सिर्फ विद्यालय को फर्नीचर उपलब्ध कराने तक ही सीमित न रहते हुए लोकेश कुमार फौजी ने विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों को लेखन सामग्री और स्वल्पाहार भी वितरित किया।
बच्चों ने खुशी के साथ उपहार प्राप्त किए और उनके चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दिया। शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।
FOR THE LATEST NEWS AND UPDATES SUBSCRIBE TO HINDI DAINIK SAMACHAR
‘शिक्षा के लिए समाज का सहयोग सबसे बड़ी ताकत’
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि जब समाज और विद्यालय मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हैं, तब सकारात्मक परिवर्तन तेजी से दिखाई देता है।
गुरु पूर्णिमा जैसे पावन अवसर पर किया गया यह सहयोग इस बात का संदेश देता है कि शिक्षा केवल सरकार या शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।
ऐसी पहलें अन्य लोगों को भी विद्यालयों के विकास में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित करती हैं।
विद्यालय परिवार ने जताया आभार
विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. सतीश कुमार सहित पूरे विद्यालय परिवार ने समाजसेवी एवं पूर्व सैनिक लोकेश कुमार फौजी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
विद्यालय परिवार ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका यह सहयोग लंबे समय तक विद्यार्थियों और विद्यालय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. सतीश कुमार, सहायक अध्यापक राकेश कुमार, मोहित वर्मा, सेवानिवृत्त सैनिक अनिल कुमार सिकरवार (गडरपुरा), ठाकुर भानु प्रताप सिंह (पीपलखेड़ा), हरिओम तोमर (नगला कमाल, खेरागढ़) सहित अनेक सम्मानित ग्रामीणजन, अभिभावक एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
सामुदायिक सहयोग से मजबूत होगी सरकारी शिक्षा व्यवस्था
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज के जागरूक नागरिक समय-समय पर सरकारी विद्यालयों की आवश्यकताओं में सहयोग करें, तो विद्यालयों का वातावरण और अधिक समृद्ध हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ समाज में सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।
गुरु पूर्णिमा पर प्राथमिक विद्यालय कछपुरा, सरेंडा में हुआ यह प्रेरणादायी सहयोग इसी सकारात्मक सोच का उदाहरण है। यह पहल न केवल विद्यालय के संसाधनों को मजबूत करेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि “जहाँ शिक्षा के प्रति समर्पण होता है, वहाँ समाज भी खुले मन से सहयोग के लिए आगे आता है।”
यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी और स्थानीय नागरिक मिलकर शिक्षा के लिए कार्य करते हैं, तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्टता और प्रेरणा के केंद्र बन सकते हैं।


