गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे ऑडियो-विजुअल और लाउडस्पीकर से लैस वाहन, डीएम ने वैज्ञानिक तरीके से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की अपील की
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 9 अक्टूबर 2026। फसल अवशेष और पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने तथा किसानों को वैज्ञानिक तरीके से फसल अवशेषों के प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए आगरा में अभियान शुरू किया गया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कृषि विभाग की फसल अवशेष प्रबंधन योजना वर्ष 2026-27 के अंतर्गत कैम्प कार्यालय से तीन जागरूकता प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
ये प्रचार वाहन जिले की सभी तहसीलों और विकासखंडों में भ्रमण कर किसानों को पराली, गन्ने की पत्तियों और अन्य फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की जानकारी देंगे। वाहनों में ऑडियो-विजुअल साधनों और लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई है, ताकि गांव-गांव पहुंचकर किसानों तक जागरूकता संदेश पहुंचाया जा सके।
पराली न जलाएं, वैज्ञानिक पद्धति से करें प्रबंधन: डीएम
प्रचार वाहनों को रवाना करने के दौरान जिलाधिकारी मनीष बंसल ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष और पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव पर्यावरण और आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
जिलाधिकारी ने कहा, “फसल अवशेष न जलाएं, वैज्ञानिक तरीके से उनका प्रबंधन अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनें।”
उन्होंने बताया कि आगामी महीने फसल अवशेष प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसानों को समय रहते जागरूक करना और उन्हें पराली के उचित निस्तारण के विकल्पों की जानकारी देना जरूरी है।
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गांव-गांव जाकर पराली प्रबंधन का संदेश देंगे प्रचार वाहन
कृषि विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार की ‘प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू’ योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में जिले में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
इसके तहत तीनों प्रचार वाहन जिले की समस्त तहसीलों और विकासखंडों में पहुंचेंगे। ऑडियो-विजुअल सामग्री और लाउडस्पीकर के माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
अभियान का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना और उन्हें ऐसे विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिनसे फसल अवशेषों का उपयोगी तरीके से निस्तारण किया जा सके।
सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे कृषि यंत्रों की मिलेगी जानकारी
प्रचार वाहनों के माध्यम से किसानों को पराली प्रबंधन में उपयोगी आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी भी दी जाएगी। इनमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और पराली बेलर जैसे कृषि यंत्र शामिल हैं। इन यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने और खेतों में पराली जलाने की आवश्यकता कम करने के विकल्पों के बारे में किसानों को बताया जाएगा।
किसानों को डी-कंपोजर के उपयोग और फसल अवशेषों को जैविक खाद में बदलने की संभावनाओं से भी अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा पराली का उपयोग पशु चारे सहित अन्य उपयोगी कार्यों में करने के विकल्पों की जानकारी दी जाएगी।
पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग की ओर से किसानों को पराली न जलाने और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि फसल अवशेषों को बेकार समझकर जलाने के बजाय उनका उपयोगी प्रबंधन किया जा सकता है।
फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध: जिलाधिकारी
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों के निरंतर संपर्क में रहकर उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक और प्रभावी विधियों की जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान के माध्यम से किसानों को पराली न जलाने, आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने और पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने आशा व्यक्त की कि आगरा के किसान जागरूकता दिखाते हुए पराली जलाने से बचेंगे और जिले को पराली जलाने की घटनाओं से मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
अधिकारियों की मौजूदगी में रवाना हुए जागरूकता वाहन
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सहित कृषि विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
कृषि विभाग का यह अभियान किसानों तक फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी पहुंचाने और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से चलाया जाएगा। इसके जरिए किसानों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा।


