एसएन मेडिकल कॉलेज में ‘12 साल के विश्वास, विकास और जनकल्याण’ पर प्रबुद्ध जन संगोष्ठी आयोजित, स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों पर हुई विस्तृत चर्चा
केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गिनाईं स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियां, आयुष्मान भारत से लेकर AIIMS विस्तार तक पर हुआ संवाद
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 13 जून 2026।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज में “12 साल के विश्वास, विकास और जनकल्याण” विषय पर एक भव्य डॉक्टर्स एवं प्रबुद्ध जन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मेडिकल कॉलेज के एल.टी.-4 सभागार में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत विकास के क्षेत्र में पिछले वर्षों में हुए बदलावों और उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगोष्ठी में केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, विधायक डॉ. जी.एस. धर्मेश, चिकित्सा विशेषज्ञों, वरिष्ठ चिकित्सकों, शिक्षकों, प्रबुद्ध नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का उल्लेख करना नहीं था, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में हुए बदलावों, भविष्य की चुनौतियों और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के विषय पर सार्थक संवाद स्थापित करना भी था।
स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन की नई तस्वीर

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के स्वास्थ्य ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक अस्पतालों की स्थापना, मेडिकल शिक्षा में वृद्धि और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से आम नागरिकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
वक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल महानगरों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में भी बड़े स्तर पर कार्य हुआ है।
एस.एन. मेडिकल कॉलेज को मिली नई पहचान
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के अंतर्गत आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज को नई पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। आज यहां जटिल और उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ बड़ी संख्या में मरीजों को मिल रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से बताया कि अब एस.एन. मेडिकल कॉलेज में ओपन हार्ट बाईपास सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा सेवाएं भी सफलतापूर्वक उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो पहले केवल चुनिंदा बड़े संस्थानों तक सीमित थीं।
उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें अब बेहतर इलाज के लिए दूर-दराज़ के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
आयुष्मान भारत योजना से बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आयुष्मान भारत योजना को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बताया।
केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि इस योजना ने लाखों परिवारों को आर्थिक रूप से राहत प्रदान की है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ हुई हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं और केवल आधार कार्ड के आधार पर आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है।
देश में स्वास्थ्य जांच का बड़ा अभियान
संगोष्ठी में स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि देशभर में 42 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है।
इसमें लगभग 36 करोड़ लोगों की ओरल कैंसर (Oral Cancer) जांच भी शामिल है। वक्ताओं ने कहा कि समय पर जांच और जागरूकता के माध्यम से गंभीर बीमारियों की रोकथाम और प्रारंभिक उपचार को बढ़ावा मिला है।
विशेषज्ञों ने कहा कि निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना भविष्य की स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आवश्यक दवाओं के दाम घटने से आमजन को राहत
केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने बताया कि आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ बनाने के लिए लगभग 2000 आवश्यक दवाओं की कीमतों में कमी की गई है।
उन्होंने कहा कि इसका सीधा लाभ मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिला है। सस्ती दवाएं उपलब्ध होने से इलाज का खर्च कम हुआ है और अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं।
AIIMS और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई वृद्धि
कार्यक्रम में देश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में हुए विस्तार पर भी चर्चा की गई।
बताया गया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 7 AIIMS थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 23 हो चुकी है।
इसी प्रकार देशभर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वर्तमान में लगभग 780 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़े हैं और भविष्य में अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर देश को उपलब्ध होंगे।
ई-संजीवनी और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
संगोष्ठी में ई-संजीवनी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और ABHA ID जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहलों पर भी चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से मरीजों को घर बैठे चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य रिकॉर्ड की सुविधा मिल रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर हुई है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार
कार्यक्रम में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया गया।
बताया गया कि देश में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय कमी आई है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
वक्ताओं ने जानकारी दी कि संस्थागत प्रसव पर ₹1400 तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और करोड़ों महिलाओं को टीकाकरण कार्यक्रमों से जोड़ा गया है।
एस.एन. मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार
एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कॉलेज में हुए विकास कार्यों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आधुनिक उपकरण, नई चिकित्सा तकनीकें, उन्नत उपचार सुविधाएं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है। इससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
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प्रबुद्ध जनों और चिकित्सकों के साथ हुआ संवाद
संगोष्ठी के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध जनों और चिकित्सकों के साथ खुला संवाद भी आयोजित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. सुशील गुप्ता, डॉ. पूरन डाबर, डॉ. पंकज सहित अनेक चिकित्सा विशेषज्ञों और गणमान्य नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में जनभागीदारी की आवश्यकता
वक्ताओं ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य जागरूकता, निवारक चिकित्सा और जनस्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर बल दिया।
विकसित भारत के निर्माण में स्वास्थ्य क्षेत्र की अहम भूमिका
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की आधारशिला मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था होती है। स्वस्थ नागरिक ही देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिकित्सा क्षेत्र में जारी सुधार, नई योजनाएं और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं आने वाले वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगी तथा आम नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करेंगी।


