शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग तेज, प्राथमिक शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
खेरागढ़ इकाई के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एडी बेसिक और बीएसए से की मुलाकात, कहा— शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाए प्रशासन
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 11 जून 2026।
जनपद आगरा में शिक्षकों की विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, आगरा इकाई ने शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों के त्वरित निस्तारण की मांग करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट कहा कि वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित कर रही है, इसलिए इन मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
संघ के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात के दौरान यह भी मांग उठाई कि विभिन्न प्रशासनिक कार्यों और लंबित प्रकरणों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब के लिए संबंधित अधिकारियों, विशेषकर खंड शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए, ताकि समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके।
शिक्षक हितों को लेकर सक्रिय हुआ संघ

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कसाना एवं प्रदेश संगठन मंत्री बृजेश कुमार दीक्षित के निर्देश पर खेरागढ़ इकाई के अध्यक्ष सूरज शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नवागत मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिला।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की विभिन्न प्रशासनिक, सेवा संबंधी और विभागीय समस्याओं को विस्तार से अधिकारियों के समक्ष रखा। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में शिक्षकों को लंबे समय से समाधान का इंतजार है, जिससे उनके कार्य निष्पादन पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को रखा प्रमुखता से
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे अध्यक्ष सूरज शर्मा ने अधिकारियों को अवगत कराया कि शिक्षकों को विभागीय स्तर पर कई प्रकार की व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें सेवा पुस्तिका संबंधी प्रकरण, लंबित भुगतान, अवकाश स्वीकृति, स्थानांतरण से जुड़े विषय, ऑनलाइन पोर्टल संबंधी समस्याएं, वेतन विसंगतियां तथा अन्य प्रशासनिक मामलों का समय पर निस्तारण न होना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान होगा तो वे और अधिक मनोयोग से बच्चों की शिक्षा एवं विद्यालय विकास में योगदान दे सकेंगे।
प्रशासनिक संवेदनशीलता की जताई आवश्यकता
संघ पदाधिकारियों ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विभागीय प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक कार्यालयी चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों पर शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न प्रशासनिक दायित्व भी हैं। ऐसे में यदि उनकी मूलभूत समस्याएं समय पर हल होंगी तो वे विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
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शिक्षक हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन सदैव शिक्षक हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहा है। भविष्य में भी यदि आवश्यक हुआ तो संगठन शिक्षकों की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल समस्याओं को उठाना नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है।
अधिकारियों ने दिया सकारात्मक आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर दोनों अधिकारियों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए सभी बिंदुओं का गंभीरता से परीक्षण करने और लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
अधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण विभाग की प्राथमिकता है और जहां भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई आवश्यक होगी, वहां उचित कदम उठाए जाएंगे।
नवागत अधिकारियों का किया स्वागत
बैठक के दौरान शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने नवागत मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का स्वागत करते हुए उन्हें आगरा जनपद में नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं भी दीं।
संघ ने उम्मीद जताई कि नए अधिकारियों के नेतृत्व में शिक्षकों की समस्याओं का समाधान तेजी से होगा तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा।
बड़ी संख्या में शिक्षक नेता रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षक नेता मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से मुनेन्द्र राठौर, मनोज शर्मा, राकेश शर्मा, मनीष कोहली, राघवेन्द्र सिकरवार, दिनेश शर्मा, रंजीत सिंह चाहर, उमेश गर्ग, प्रभात मंगल, अनन अग्रवाल, भगवती खंडेलवाल, तिलक चंद पचौरी, लक्ष्मीनारायण गोयल, राजीव शर्मा, रामनिवास असोलिया, राहुल कौशिक, हरेन्द्र वर्मा, दिव्यांशु तिवारी, शिव सिंह, नेत्रपाल चाहर, पुनीत गोयल, प्रदीप चौधरी, शशांक भारद्वाज, अतीकुर्रहमान, मोहित, संजीव मिश्रा, मंगल सेन सहित अन्य शिक्षक प्रतिनिधि शामिल रहे।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
शिक्षक संघ द्वारा उठाया गया यह कदम केवल शिक्षकों की व्यक्तिगत समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण और गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है। शिक्षकों का मानना है कि यदि उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समय पर समाधान हो तो वे पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में योगदान दे सकते हैं।
ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर विभागीय स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और शिक्षकों को राहत कब तक मिलती है।


