इफको के ‘खेत बचाओ अभियान’ को मिली नई मजबूती, आगरा में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के भविष्य को सुरक्षित बनाने का दिया मंत्र
केन्द्र प्रभारी प्रशिक्षण कार्यक्रम में संतुलित पोषण, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, नैनो उर्वरकों और टिकाऊ कृषि तकनीकों पर हुआ गहन मंथन
कृषि को बचाने, मिट्टी को स्वस्थ रखने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में इफको की महत्वपूर्ण पहल
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 10 जून 2026।
देश की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) लगातार महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में इफको द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत आगरा क्षेत्र के बिक्री केन्द्र प्रभारियों, कृषि आदान विक्रेताओं एवं रिटेलर्स के लिए एक दिवसीय केन्द्र प्रभारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल सभागार में किया गया।
कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, अधिकारियों और तकनीकी जानकारों ने आधुनिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जल संरक्षण, नैनो तकनीक आधारित कृषि उत्पादों तथा बदलती कृषि चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित कर उन्हें किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाने के लिए सक्षम बनाना था।
आज कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरणीय संतुलन, जल संरक्षण और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना भी उतना ही आवश्यक हो गया है। इसी सोच के साथ आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को किसानों के भविष्य और कृषि की स्थिरता से जोड़कर देखा जा रहा है।
किसानों को जागरूक करना ही ‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इफको आगरा के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. प्रह्लाद सिंह ने कहा कि देश की कृषि भूमि लगातार अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग, घटती जैविक उर्वरता, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं खेती की उत्पादकता को प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि इफको का “खेत बचाओ अभियान” केवल एक प्रचार कार्यक्रम नहीं है, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषण प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का व्यापक अभियान है।
डॉ. प्रह्लाद सिंह ने कहा—
“यदि हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि और सुरक्षित कृषि व्यवस्था छोड़नी है, तो हमें आज से ही संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर गंभीरता से कार्य करना होगा।”
उन्होंने बताया कि इफको लगातार किसानों को नई तकनीकों, उन्नत कृषि उत्पादों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
नैनो तकनीक बदल रही है भारतीय कृषि की तस्वीर

कार्यक्रम में नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों को कृषि क्षेत्र की नई क्रांति बताया गया।
डॉ. प्रह्लाद सिंह ने कहा कि इफको द्वारा विकसित नैनो उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं। इनसे पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है, उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव भी घटता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से—
- उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ती है।
- उत्पादन लागत कम होती है।
- मिट्टी की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है।
- फसलों की वृद्धि बेहतर होती है।
- किसानों की आय में वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
- पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि का बड़ा हिस्सा नैनो तकनीक आधारित कृषि समाधान अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
कृषि उत्पादन के साथ मृदा स्वास्थ्य भी है जरूरी
मुख्य अतिथि एवं उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने की दौड़ में कई बार किसान मिट्टी की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका प्रभाव भविष्य में उत्पादन पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि मिट्टी स्वस्थ नहीं होगी तो उन्नत बीज और उर्वरक भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे। इसलिए किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने केन्द्र प्रभारियों और कृषि विक्रेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे किसानों तक केवल उत्पाद ही न पहुंचाएं बल्कि उन्हें वैज्ञानिक सलाह भी दें।
उन्होंने कहा—
“आज कृषि क्षेत्र में सही जानकारी सबसे बड़ा संसाधन है। यदि किसान को सही समय पर सही सलाह मिल जाए तो वह कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकता है।”
जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए बड़ी चुनौती
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है।
अनियमित वर्षा, तापमान में बढ़ोतरी, भूजल स्तर में गिरावट और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव ने खेती को प्रभावित किया है।
उन्होंने किसानों के लिए निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई—
- जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग
- मृदा परीक्षण आधारित खेती
- जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों का समावेश
- संतुलित पोषण प्रबंधन
- फसल विविधीकरण
- आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना
उन्होंने कहा कि भविष्य की खेती विज्ञान और तकनीक पर आधारित होगी तथा जो किसान नई तकनीकों को अपनाएंगे, वही प्रतिस्पर्धा में आगे रह पाएंगे।
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नैनो यूरिया से लेकर धरामृत तक की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान इफको आगरा के उप प्रबंधक नरेंद्र कुमार सागर एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को इफको के विभिन्न आधुनिक कृषि उत्पादों की तकनीकी जानकारी प्रदान की।
नैनो यूरिया प्लस
विशेषज्ञों ने बताया कि यह उत्पाद पौधों को नाइट्रोजन की अधिक प्रभावी आपूर्ति करता है तथा पारंपरिक यूरिया की खपत को कम करता है।
नैनो डीएपी
यह फसलों की प्रारंभिक वृद्धि और मजबूत जड़ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नैनो जिंक
जिंक की कमी दूर कर पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
नैनो कॉपर
यह पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।
नैनो एनपीके
यह संतुलित पोषण प्रदान कर उच्च गुणवत्ता वाली उपज सुनिश्चित करता है।
सागरिका और धरामृत बने आकर्षण का केंद्र
विशेषज्ञों ने समुद्री शैवाल आधारित उत्पाद सागरिका और जैविक उर्वरता बढ़ाने वाले उत्पाद धरामृत की उपयोगिता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
सागरिका पौधों की जड़ों को मजबूत करने, फूल और फल बनने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने तथा प्रतिकूल मौसम में फसलों की सहनशीलता बढ़ाने में सहायक है।
वहीं धरामृत मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाकर मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और दीर्घकालिक उत्पादकता को मजबूत करता है।
किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में केन्द्र प्रभारियों की अहम भूमिका
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कृषि सेवा केन्द्रों के प्रभारी और विक्रेता किसानों और वैज्ञानिक तकनीकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
यदि वे सही जानकारी किसानों तक पहुंचाएं तो हजारों किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
उन्हें किसानों को—
- मृदा परीक्षण कराने,
- संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने,
- जल संरक्षण तकनीकें अपनाने,
- नैनो उर्वरकों का सही उपयोग करने,
- टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने
के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण बचाने का लक्ष्य
विशेषज्ञों ने कहा कि आज खेती को केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में देखा जाना चाहिए।
नैनो उर्वरकों और जैविक उत्पादों के उपयोग से—
- उत्पादन लागत घटेगी,
- आय बढ़ेगी,
- मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी,
- रासायनिक प्रदूषण कम होगा,
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा।
इसी सोच के साथ इफको “खेत बचाओ अभियान” के माध्यम से देशभर में किसानों को जागरूक कर रहा है।
प्रतिभागियों ने बताया अत्यंत उपयोगी कार्यक्रम
कार्यक्रम में शामिल बिक्री केन्द्र प्रभारियों और कृषि विक्रेताओं ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, नैनो उर्वरकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे वे किसानों को बेहतर सलाह दे सकेंगे।
भविष्य में भी जारी रहेंगे जागरूकता अभियान
कार्यक्रम के अंत में उप प्रबंधक नरेंद्र कुमार सागर ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इफको किसानों की समृद्धि, मृदा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और कृषि विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। भविष्य में भी “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत ऐसे प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि किसान आधुनिक, वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ सकें तथा भारत की कृषि व्यवस्था और अधिक मजबूत बन सके।


