“प्राकृतिक संतुलन के लिए जैव विविधता का होना आवश्यक” — डायट आगरा में विश्व जैव विविधता दिवस पर चला ‘दाना-पानी’ जनजागरूकता अभियान
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 22 मई 2026।
विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) आगरा में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को लेकर एक प्रेरणादायक और जनजागरूकता आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के स्टाफ और प्रशिक्षुओं ने मिलकर पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए “दाना-पानी अभियान” को वृहद स्तर पर क्रियान्वित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक दिवस मनाना नहीं था, बल्कि लोगों के बीच प्रकृति, जैव विविधता और जीव-जंतुओं के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना भी था। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षुओं और स्टाफ ने अपने घरों एवं संस्थान परिसर में पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
जैव विविधता ही प्रकृति के संतुलन की आधारशिला

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने कहा कि जैव विविधता केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी पर जीवन के संतुलन का आधार है।
उन्होंने कहा:
“प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए जैव विविधता का सुरक्षित रहना बेहद आवश्यक है। खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल जैसी प्राकृतिक व्यवस्थाएं जैव विविधता के कारण ही संभव हो पाती हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रकृति में विभिन्न जीव-जंतुओं, पक्षियों और वनस्पतियों का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है।
उन्होंने सभी से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।
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भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए संवेदनशील पहल

विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर आयोजित “दाना-पानी कार्यक्रम” ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
गर्मी के बढ़ते तापमान को देखते हुए प्रशिक्षुओं ने पक्षियों के लिए पानी और भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया।
इसके लिए प्रशिक्षुओं ने:
- मिट्टी के पात्रों का उपयोग किया
- निष्प्रयोज्य सामग्री को पुनः उपयोग में लाया
- नारियल के खोलों को दाना-पानी पात्र के रूप में तैयार किया
- अपने घरों की छतों और खुले स्थानों पर पानी की व्यवस्था की
इस पहल ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पुनर्चक्रण (Recycling) का भी सकारात्मक संदेश दिया।
“छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं”
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि हर वर्ष 22 मई को विश्व जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष डायट आगरा में इस दिवस को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे व्यवहारिक रूप देकर प्रशिक्षुओं को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया गया।
“यदि हर व्यक्ति अपने घर के बाहर पक्षियों के लिए एक पात्र में पानी रख दे, तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।”
प्रशिक्षुओं ने दिखाई पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
उन्होंने अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हुए फोटो और अनुभव साझा किए।
कई प्रशिक्षुओं ने बताया कि उन्होंने पहली बार इस तरह की गतिविधि में भाग लिया और उन्हें यह अनुभव बेहद प्रेरणादायक लगा।
इको क्लब की सक्रिय भूमिका
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में इको क्लब और संस्थान के शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को लेकर जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
प्रशिक्षुओं को बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है।
जैव विविधता संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि:
- पेड़-पौधों का संरक्षण करें
- जल स्रोतों को बचाएं
- प्लास्टिक का उपयोग कम करें
- पक्षियों और जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाएं
- प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करें
“प्रकृति को बचाना ही भविष्य को सुरक्षित बनाना है।”
कार्यक्रम में रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम के सफल संचालन में इको क्लब प्रभारी प्रवक्ता पुष्पेंद्र सिंह, यशवीर सिंह, अनिल कुमार, हिमांशु सिंह, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, लक्ष्मी शर्मा, अबु मोहम्मद आसिफ, संजीव कुमार सत्यार्थी, रंजना पाण्डेय, ऋचा पंडित, एस.बी. आरती, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा, अमित दीक्षित एवं आकांक्षा लवानिया सहित संस्थान के स्टाफ और प्रशिक्षुओं ने सहयोग किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय द्वारा किया गया।
निष्कर्ष
डायट आगरा में विश्व जैव विविधता दिवस पर आयोजित “दाना-पानी अभियान” ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे मानवीय प्रयासों से भी संभव है।
प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए जैव विविधता का संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
“प्रकृति को बचाइए, पक्षियों को पानी दीजिए और जैव विविधता को सुरक्षित रखिए” — इसी संदेश के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।


