विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आगरा में जागरूकता अभियान का शुभारंभ, जिलाधिकारी मनीष बंसल ने ई-रिक्शा प्रचार वाहन को दिखाई हरी झंडी
बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, बाल श्रम मुक्त समाज बनाने और जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए श्रम विभाग का विशेष अभियान शुरू
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचेगा जागरूकता संदेश, बाल श्रम रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन ने की सामूहिक भागीदारी की अपील
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 12 जून 2026।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जनपद आगरा में बाल श्रम उन्मूलन एवं बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। जिला प्रशासन और श्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभियान का शुभारंभ जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कलेक्ट्रेट परिसर से जागरूकता ई-रिक्शा प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का बचपन सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक होना चाहिए। बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके उज्ज्वल भविष्य पर सीधा आघात है। समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
बाल श्रम एक सामाजिक चुनौती, सामूहिक प्रयास से होगा समाधान

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस हर वर्ष 12 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाल श्रम के प्रति लोगों को जागरूक करना और बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा एवं बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए समाज को प्रेरित करना है।
आगरा में शुरू किए गए इस विशेष अभियान का लक्ष्य लोगों को यह समझाना है कि बाल श्रम किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। आर्थिक मजबूरियां, सामाजिक परिस्थितियां या अन्य कारण बच्चों को मजदूरी करने के लिए विवश कर सकते हैं, लेकिन समाज और प्रशासन का कर्तव्य है कि ऐसे बच्चों को शिक्षा और संरक्षण उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि एक शिक्षित बच्चा न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देता है। इसलिए बच्चों को विद्यालयों से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
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ई-रिक्शा प्रचार वाहन के माध्यम से पहुंचेगा जागरूकता संदेश
श्रम विभाग द्वारा तैयार किया गया विशेष ई-रिक्शा प्रचार वाहन आगामी दिनों में जनपद के विभिन्न शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में भ्रमण करेगा। यह वाहन बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, व्यावसायिक क्षेत्रों, प्रमुख चौराहों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जाकर बाल श्रम निषेध संबंधी संदेशों का प्रसारण करेगा।
वाहन के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि—
- बाल श्रम कानूनन अपराध है।
- प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।
- बच्चों को खतरनाक और श्रम आधारित कार्यों में लगाना दंडनीय अपराध है।
- बाल श्रम की सूचना संबंधित विभाग को देना नागरिक दायित्व है।
- शिक्षा ही बाल श्रम उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
प्रचार वाहन लोगों को यह भी जागरूक करेगा कि यदि उनके आसपास कोई बच्चा श्रम करते हुए दिखाई देता है तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन या श्रम विभाग को दें, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
बच्चों का स्थान विद्यालय में, कार्यस्थलों पर नहीं
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को प्रभावित करता है। कम उम्र में कार्य करने वाले बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है और वे गरीबी के दुष्चक्र में फंस जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल श्रम केवल एक आर्थिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और मानवाधिकारों से जुड़ा विषय भी है। इसलिए इसके उन्मूलन के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है।
अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास के समान अवसर मिलने चाहिए। यही किसी विकसित और संवेदनशील समाज की पहचान होती है।
शिक्षा के माध्यम से बदल सकता है बच्चों का भविष्य
जागरूकता कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे मजबूत माध्यम है। यदि प्रत्येक बच्चा विद्यालय तक पहुंचे और अपनी पढ़ाई पूरी करे, तो भविष्य में वह सम्मानजनक जीवन जीने के साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आज भी कई बच्चे आर्थिक और सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
श्रम विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल) सुश्री शगुन ओमर, सहायक श्रम आयुक्त, श्रम प्रवर्तन अधिकारीगण, श्रम विभाग के कर्मचारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने बताया कि जागरूकता अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी दिनों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को बाल श्रम निषेध कानूनों, बाल अधिकारों और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा।
स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और विभिन्न संस्थानों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंच सके।
बाल श्रम उन्मूलन में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि बाल श्रम समाप्त करने के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। यदि कोई नागरिक किसी बच्चे को श्रम करते हुए देखता है तो उसे केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि संबंधित विभाग को सूचना देकर उस बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव होगा जब अभिभावक, शिक्षक, सामाजिक संगठन, व्यापारी वर्ग और आम नागरिक सभी इस अभियान का हिस्सा बनेंगे।
विकसित भारत के लिए शिक्षित बचपन आवश्यक
विशेषज्ञों ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब देश का प्रत्येक बच्चा शिक्षित, सुरक्षित और सशक्त होगा। बाल श्रम बच्चों के सपनों को सीमित कर देता है, जबकि शिक्षा उन्हें नई संभावनाओं और अवसरों से जोड़ती है।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर शुरू किया गया यह अभियान समाज को यह संदेश देता है कि बच्चों का भविष्य मजदूरी में नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल और विकास में है।
जनपदवासियों से की गई विशेष अपील
कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन और श्रम विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे बाल श्रम के खिलाफ जागरूक रहें और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करें। यदि प्रत्येक नागरिक एक बच्चे को भी विद्यालय तक पहुंचाने में मदद करता है, तो समाज में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
यह अभियान केवल कानून लागू करने का प्रयास नहीं, बल्कि एक ऐसी सामाजिक चेतना का निर्माण है, जो हर बच्चे को उसका अधिकार दिलाने और एक बाल श्रम मुक्त, शिक्षित एवं विकसित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


