आगरा में कृषि योजनाओं की समीक्षा: किसानों को फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर
आत्मा योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन और भूमि संरक्षण योजनाओं की समीक्षा; डीएम मनीष बंसल ने कृषि वैज्ञानिकों की निगरानी में प्रदर्शन कराने के दिए निर्देश
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 12 अगस्त 2026। जनपद में कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) योजना के गवर्निंग बोर्ड, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) के अंतर्गत डीएफएसएनएम-ईसी तथा अन्य संचालित योजनाओं के साथ जिला भूमि एवं जल संरक्षण समिति के कार्यों की भी समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, किसान नेता मोहन सिंह चाहर, उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सहित कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी और जनपद के प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
कृषि योजनाओं और किसान प्रशिक्षण की हुई समीक्षा

बैठक की शुरुआत में उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार ने जिलाधिकारी को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की कार्ययोजना, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, फसल प्रदर्शन तथा किसानों के हित में चल रही गतिविधियों की जानकारी दी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता की स्थिति की जानकारी लेते हुए किसानों तक आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा कराए जा रहे फसल प्रदर्शनों का उद्देश्य केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आसपास के किसानों को भी इनसे जोड़कर नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
बाजरा और सरसों की उत्पादकता प्रदेश के औसत से बेहतर

बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में प्रमुख फसलों की उत्पादन एवं उत्पादकता की स्थिति के बारे में जानकारी ली। जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जनपद में बाजरा की उत्पादकता 23.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, गेहूं की 45.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और सरसों की 19.40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
अधिकारियों के अनुसार बाजरा और सरसों की उत्पादकता प्रदेश स्तर के औसत से अधिक है। जिलाधिकारी ने इस स्थिति को बनाए रखने के साथ-साथ कृषि तकनीक के माध्यम से अन्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के निर्देश दिए।
कृषि प्रदर्शनों में वैज्ञानिकों की निगरानी जरूरी
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने निर्देश दिए कि विभिन्न योजनाओं के तहत खेतों में कराए जा रहे फसल प्रदर्शनों की निगरानी क्षेत्रीय कृषि कर्मचारियों के साथ कृषि वैज्ञानिकों द्वारा भी की जाए। किसानों को फसल की बुवाई से लेकर उत्पादन तक समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान को नई कृषि तकनीक से बेहतर परिणाम मिलते हैं तो आसपास के किसान भी उससे प्रेरित होंगे। इससे आधुनिक कृषि पद्धतियों का विस्तार होगा और किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने में मदद मिल सकती है।
एफपीओ के कृषि यंत्र किसानों को कम दर पर उपलब्ध कराने के निर्देश
बैठक में कृषि यंत्रीकरण योजना की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत एफपीओ को अनुदान पर उपलब्ध कराए गए कृषि यंत्रों का लाभ अधिक से अधिक स्थानीय किसानों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एफपीओ द्वारा उपलब्ध कृषि मशीनरी को स्थानीय ग्रामीण किसानों के लिए उचित एवं कम दर पर उपयोग हेतु उपलब्ध कराया जाए, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ उठा सकें और खेती की लागत को नियंत्रित कर सकें।
फसल विविधीकरण अपनाने पर दिया विशेष जोर
जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल एक या दो प्रमुख फसलों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों, बाजार की मांग और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फसलों का चयन करना चाहिए।
फसल विविधीकरण से खेती में जोखिम कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
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भूमि संरक्षण कार्यों से किसानों को मिल रहा लाभ
जिला भूमि संरक्षण अधिकारी विकास सेठ ने जनपद में भूमि संरक्षण के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऊसर भूमि में मिट्टी के क्षरण को रोकने तथा खेतों की लेवलिंग जैसे कार्य कराए जा रहे हैं।
इन कार्यों के बाद कई किसान एक वर्ष में दो फसलें लेने में सक्षम हो रहे हैं। जिलाधिकारी ने भूमि संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने और किसानों को इसका अधिक से अधिक लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
आगरा में आलू की 3797 प्रजाति की अधिक बुवाई
बैठक में जिलाधिकारी ने जनपद में सबसे अधिक बोई जाने वाली आलू की प्रजाति के बारे में भी जानकारी ली। बैठक में मौजूद किसानों ने बताया कि आगरा में बड़ी संख्या में किसान 3797 प्रजाति के आलू की बुवाई करते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जनपद की जलवायु एवं स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए 3797 प्रजाति का आलू उपयुक्त माना जाता है। मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी इसके अपेक्षाकृत जल्दी खराब न होने के कारण किसान इसकी बुवाई को प्राथमिकता देते हैं।
किसानों को मत्स्य पालन से जोड़ने के निर्देश
जिलाधिकारी ने कृषि के साथ किसानों की आय के अन्य स्रोत विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सहायक निदेशक मत्स्य को निर्देश दिए कि जनपद में किसान गोष्ठियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को मत्स्य पालन से जोड़ने के लिए प्रभावी अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि के साथ आय के वैकल्पिक और पूरक स्रोतों की जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के नए अवसर पैदा हो सकें।
आधुनिक कृषि तकनीक से बढ़ सकती है किसानों की आय
बैठक में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ खेत और किसान तक पहुंचना चाहिए। किसान प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन, कृषि यंत्रीकरण, भूमि संरक्षण और फसल विविधीकरण जैसे प्रयासों को आपस में जोड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत है।
बैठक में दिए गए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना रहा। अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सुझाव भी साझा किए।


