उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के प्रशिक्षण का समापन, विद्यालय नेतृत्व और बाल मनोविज्ञान पर हुई चर्चा
डायट आगरा में सैंया और शमशाबाद के प्रधानाध्यापकों के प्रथम बैच का प्रशिक्षण पूरा, प्रतिभागियों को वितरित किए गए प्रमाण-पत्र
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में सैंया एवं शमशाबाद क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के प्रशिक्षण के प्रथम बैच का समापन हुआ। समापन अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह एवं ललित मोहन पाल ने प्रशिक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाध्यापकों को विद्यालय नेतृत्व, सामुदायिक सहभागिता, अंतरविभागीय समन्वय, सरकारी योजनाओं, बाल मनोविज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य और विद्यालय में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई।
सामुदायिक सहभागिता में प्रधानाध्यापक की भूमिका पर जोर

समापन कार्यक्रम में सेवारत सह प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने सामुदायिक सहभागिता में प्रधानाध्यापक की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विद्यालयों को समुदाय से जोड़कर शैक्षिक गतिविधियों को और बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने पुरातन छात्र समुदाय और विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से विद्यालयों को मिलने वाले सामुदायिक सहयोग के विभिन्न अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।
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सरकारी योजनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों की सफलता पर चर्चा

प्रथम सत्र में संदर्भदाता कल्पना सिन्हा ने अंतरविभागीय समन्वय और विभिन्न शासकीय योजनाओं में प्रधानाध्यापक की भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय के विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
उन्होंने प्रधानाध्यापकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने और पात्र बच्चों को योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय की शैक्षिक दिशा प्रधानाध्यापक के नेतृत्व पर निर्भर

नोडल प्रभारी एवं प्रवक्ता पुष्पेंद्र सिंह ने विद्यालय के शैक्षिक कार्यों में प्रधानाध्यापक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यालय का शैक्षिक और सामाजिक वातावरण काफी हद तक प्रधानाध्यापक के नेतृत्व और कार्यशैली पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि प्रभावी नेतृत्व के माध्यम से विद्यालय में बेहतर शैक्षिक माहौल तैयार किया जा सकता है और शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
बाल मनोविज्ञान को समझना जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान संदर्भदाता एवं मनोविज्ञान प्रवक्ता लक्ष्मी शर्मा तथा एस.बी. आरती ने बाल मनोविज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की मानसिक और भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना प्रभावी शिक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यालय में सकारात्मक एवं सुरक्षित शैक्षिक वातावरण तैयार करने में बाल मनोविज्ञान की भूमिका को भी विस्तार से समझाया।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय बताए
अंतिम सत्र में संदर्भदाता एस.बी. आरती ने मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों पर चर्चा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उपायों और विद्यालयी वातावरण में इसके महत्व की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाध्यापकों को यह समझने का अवसर मिला कि विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण आवश्यक है।
प्रशिक्षण का लाभ विद्यालयों में दिखना चाहिए: प्राचार्य
प्रशिक्षण के संदर्भ में डायट आगरा के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक उपयोगिता तभी है, जब उसका सकारात्मक प्रभाव विद्यालयों में दिखाई दे। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी और अनुभवों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में मिली नई जानकारियों को विद्यालय की परिस्थितियों के अनुसार अपनाने से शैक्षिक कार्यों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण से मिली सीख विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर
समापन अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता विजय सिंह एवं ललित मोहन पाल ने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से हमेशा कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने विद्यालयों में लागू करने का आग्रह किया, ताकि इसका लाभ विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का संचालन नोडल प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रंजना पांडे, यशपाल सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, संजीव कुमार सत्यार्थी, धर्मेंद्र प्रसाद गौतम, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता, डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय, प्रशासनिक अधिकारी मुकेश सिन्हा सहित डायट का समस्त स्टाफ मौजूद रहा और आयोजन में सहयोग किया।
प्रशिक्षण के समापन के साथ सैंया एवं शमशाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के प्रथम बैच ने प्रशिक्षण पूरा किया। प्रतिभागियों को उम्मीद है कि प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, नेतृत्व क्षमता, सामुदायिक सहभागिता और विद्यार्थियों के अनुकूल वातावरण विकसित करने में किया जाएगा।


