“जनपद को निपुण बनाने के लिए अभी से ठोस प्रयास जरूरी”—डायट आगरा में व्यापक समीक्षा बैठक, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर विस्तृत मंथन
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 30 अप्रैल 2026।
आगरा जनपद को “निपुण” बनाने और प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर एवं खंड शिक्षा अधिकारियों की एक विस्तृत मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
यह बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षण पद्धति, योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करते हुए एक मजबूत कार्ययोजना तैयार की गई।
बैठक की अध्यक्षता डायट आगरा के उप शिक्षा निदेशक/प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने की, जिन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जनपद को निपुण बनाना है तो अभी से योजनाबद्ध, निरंतर और परिणाम आधारित प्रयास करने होंगे।
निपुण भारत मिशन को गति देने पर जोर

बैठक में “निपुण भारत मिशन” को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
“निपुणता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीखने की क्षमता से तय होगी”
इस दृष्टिकोण के साथ शिक्षकों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बच्चों के सीखने के स्तर को समझें और उसी के अनुसार शिक्षण रणनीति अपनाएं।
बेसलाइन आकलन और डेटा आधारित शिक्षण
बैठक में कक्षा 2 और 3 के छात्रों के बेसलाइन आकलन की समीक्षा की गई, जिसमें यह देखा गया कि बच्चे किस स्तर पर हैं और उन्हें किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है।
- निपुण प्लस ऐप के माध्यम से डिजिटल आकलन
- डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए मूल्यांकन
- प्राप्त परिणामों के आधार पर रिपोर्ट कार्ड तैयार करना
इन रिपोर्ट कार्ड को अभिभावकों के बीच वितरित कर उन्हें बच्चों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने पर विशेष जोर दिया गया।
इस पहल से अभिभावकों की भागीदारी भी बढ़ेगी और बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को घर तक मजबूत किया जा सकेगा।
योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस
बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई, जिनमें शामिल हैं:
- स्कूल चलो अभियान
- निःशुल्क पुस्तक वितरण
- निपुण तालिका का उपयोग
- शिक्षक संदर्शिका के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण
- संकुल बैठकों का नियमित आयोजन
- एसएमसी एवं अभिभावक-शिक्षक बैठकों की सक्रियता
“हर योजना का असर कक्षा तक दिखना चाहिए”—यह बैठक का मुख्य संदेश रहा
खंड शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें, शिक्षकों से संवाद बनाए रखें और प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्ता सुधार सुनिश्चित करें।
“सिर्फ मॉनिटरिंग नहीं, बल्कि मार्गदर्शन भी जरूरी है”
उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी सक्रिय रहेंगे तो शिक्षा व्यवस्था में स्वतः सुधार दिखाई देगा।
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छात्रवृत्ति योजनाओं पर विशेष रणनीति
बैठक में राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMS) और श्रेष्ठ योजना को लेकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए:
- प्रत्येक विकास खंड से न्यूनतम 300 आवेदन (NMMS)
- श्रेष्ठ योजना के लिए न्यूनतम 100 आवेदन
इसके लिए बच्चों के जाति और आय प्रमाण पत्र समय से बनवाने के निर्देश दिए गए, ताकि कोई भी पात्र छात्र योजना से वंचित न रह जाए।
यह रणनीति आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगी।
सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) पर जोर
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल आकलन पर्याप्त नहीं है, बल्कि आकलन के आधार पर सुधारात्मक शिक्षण (Remedial Classes) चलाना भी आवश्यक है।
“हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर मिलना चाहिए”
इसके लिए गतिविधि आधारित शिक्षण, समूह कार्य और नवाचार को अपनाने के निर्देश दिए गए।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले ब्लॉकों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पिछले सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विकास खंड—
- बिचपुरी
- खेरागढ़
- अकोला
की पूरी टीम को सम्मानित किया गया।
यह सम्मान अन्य ब्लॉकों के लिए प्रेरणा बना और बेहतर कार्य करने की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला।
विशेषज्ञों और शिक्षकों की सहभागिता
बैठक का संचालन प्रवक्ता एवं निपुण प्रभारी धर्मेंद्र प्रसाद गौतम द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रवक्ता यशवीर सिंह, डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय, अनिल कुमार, हिमांशु सिंह, डॉ. प्रज्ञा शर्मा, संजीव कुमार सत्यार्थी, पुष्पेंद्र सिंह, यशपाल सिंह, रंजना पांडे, डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता सहित सभी खंड शिक्षा अधिकारी, एसआरजी और एआरपी मौजूद रहे।
सभी ने मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए अपने सुझाव और अनुभव साझा किए।
निष्कर्ष
डायट आगरा में आयोजित यह समीक्षा बैठक जनपद को “निपुण” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल साबित हो सकती है।
यह बैठक इस बात का संकेत है कि अब शिक्षा विभाग केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभाव, गुणवत्ता और परिणामों पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।
“जब हर बच्चा सीखेगा, तभी जनपद निपुण बनेगा”—इसी संकल्प के साथ बैठक का समापन हुआ।
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