Agra Breaking: खनन माफियाओं में हड़कंप: खेरागढ़ के कुल्हाड़ा पहाड़ पर ड्रोन कैमरे से निगरानी, जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
आगरा जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी के आदेश पर खेरागढ़ के कुल्हाड़ा पहाड़ क्षेत्र में ड्रोन कैमरे से अवैध खनन की निगरानी की गई। खनन विभाग, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की।

खनन माफियाओं में हड़कंप: खेरागढ़ के कुल्हाड़ा पहाड़ पर प्रशासन की ड्रोन से सर्जिकल स्ट्राइक, अवैध खनन पर कसेगा शिकंजा
रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा, 11 नवम्बर 2025
आगरा। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी के नेतृत्व में आगरा प्रशासन ने एक और सख्त कदम उठाया है।
खनन माफियाओं के खिलाफ अब “आसमान से निगरानी और ज़मीन पर कार्रवाई” की नीति लागू की जा रही है।
तहसील खेरागढ़ के पत्थर खनन क्षेत्र में पहली बार ड्रोन कैमरे से हवाई सर्वेक्षण (Aerial Surveillance) कराया गया।
इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य था – कुल्हाड़ा पहाड़, पिपरैठा पहाड़ और बसई जगनेर क्षेत्र में चल रही अवैध खनन गतिविधियों का पता लगाना और भविष्य में ऐसे प्रयासों को रोकना।
जैसे ही ड्रोन की भनक खनन माफियाओं तक पहुंची, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। कई स्थानों पर खुदाई कार्य अचानक रोक दिए गए और भारी मशीनें व डंपर जंगलों की ओर छिपा दिए गए।
प्रशासन की बड़ी रणनीति — “ड्रोन निगरानी से बच नहीं पाएंगे माफिया”
खनन माफियाओं के खिलाफ जिलाधिकारी ने जो रणनीति बनाई है, वह पहले से कहीं अधिक तकनीकी और सटीक है।
अब ड्रोन तकनीक से लाइव सर्विलांस के जरिए न केवल अवैध खनन का पता लगाया जा रहा है, बल्कि खनन मार्गों, डंपिंग साइट्स और वाहनों की आवाजाही की भी मॉनिटरिंग की जा रही है।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया —
“खनन माफियाओं के खिलाफ प्रशासन की नीति ‘Zero Tolerance’ है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं। अब ड्रोन कैमरे के जरिए एक-एक गतिविधि रिकॉर्ड की जा रही है। दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
ड्रोन द्वारा कैप्चर किए गए वीडियोज़ में कई जगह गहराई तक खुदाई, अवैध रास्तों से खनिज परिवहन और कुछ जगहों पर छोड़ी गई भारी मशीनरी के दृश्य सामने आए हैं।
कुल्हाड़ा पहाड़ से बसई जगनेर तक — पूरी रेंज में निगरानी
खनन विभाग, राजस्व विभाग, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने ड्रोन की मदद से लगभग 18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में निगरानी की।
इसमें खनन स्थलों के साथ-साथ आसपास की सड़कों और ट्रेल्स की फुटेज भी एकत्र की गई।
ड्रोन सर्वे के दौरान देखा गया कि कुछ स्थानों पर पुराने खदानों की आड़ में फिर से खुदाई शुरू की गई थी। कई जगह नए मार्ग भी बनाए गए थे ताकि प्रशासन की नज़र से बचा जा सके।
अब इन सभी बिंदुओं की जियो-मैपिंग कराई जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी अवैध गतिविधि को तुरंत चिन्हित किया जा सके।
वरिष्ठ खनन अधिकारी मिथिलेश पांडे ने बताया —
“कुल्हाड़ा पहाड़ और आसपास के इलाकों में लंबे समय से अवैध खनन की सूचनाएँ मिल रही थीं। ड्रोन सर्वे के जरिए अब पूरे क्षेत्र की सटीक स्थिति हमारे पास है। दोषियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमला

ड्रोन ऑपरेशन के दौरान एक सशक्त प्रशासनिक टीम मौके पर मौजूद रही, जिसमें शामिल थे —
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वरिष्ठ खनन अधिकारी आगरा: मिथिलेश पांडे
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उप जिलाधिकारी खेरागढ़: ऋषि राव
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थाना प्रभारी खेरागढ़: मदन सिंह
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क्षेत्रीय वन अधिकारी: राहुल सिंह
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क्षेत्रीय खनन निरीक्षक: सुनील कुमार वर्मा
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राजस्व और पुलिस विभाग का संयुक्त बल
इन अधिकारियों ने ड्रोन फुटेज का रियल-टाइम निरीक्षण किया और मौके पर ही खनन मार्गों की पहचान की।
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पर्यावरण और राजस्व की सुरक्षा — दोहरा उद्देश्य
खनन से न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी क्षति होती है।
ड्रोन निगरानी से प्रशासन अब यह सुनिश्चित करेगा कि न केवल अवैध खनन रुके, बल्कि खनिज राजस्व में वृद्धि भी हो।
जिलाधिकारी ने कहा —
“प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। अगर कोई भी अवैध खनन में शामिल पाया गया तो वाहन सीज, लाइसेंस रद्द और एफआईआर दर्ज की जाएगी।”
साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि खनन स्थलों पर स्थायी चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और 24×7 निगरानी के लिए जियो-फेंसिंग और कैमरे लगाए जाएँ।
स्थानीय लोगों ने जताया समर्थन
ड्रोन अभियान की खबर मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली।
गांवों के लोगों ने बताया कि अवैध खनन से न केवल पहाड़ का स्वरूप बिगड़ रहा था, बल्कि धूल और शोर से फसलों और पशुओं को भी नुकसान पहुंच रहा था।
स्थानीय निवासी रामेश्वर सिंह ने कहा —
“यह कार्रवाई बहुत जरूरी थी। ड्रोन सर्वे से अब सबके सामने सच आ गया है। हम चाहते हैं कि यह निगरानी आगे भी जारी रहे ताकि हमारी जमीन और पर्यावरण सुरक्षित रहें।”
माफियाओं पर कसेगा शिकंजा
अब प्रशासन ने खनन माफियाओं के खिलाफ विस्तृत चार्टर ऑफ एक्शन तैयार किया है, जिसमें शामिल है —
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ड्रोन निगरानी से प्राप्त साक्ष्यों पर एफआईआर दर्ज करना।
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अवैध खनन में उपयोग किए गए वाहनों की जब्ती।
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दोषियों के लाइसेंस और परमिट रद्द करना।
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पुनर्भरण (Reclamation) कार्य शुरू कराना ताकि नष्ट भूमि पुनः उपजाऊ बनाई जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में ऐसे ड्रोन सर्वे हर माह किए जाएंगे।
निष्कर्ष: तकनीक के सहारे पारदर्शी शासन
यह कार्रवाई दिखाती है कि आगरा प्रशासन अब “Reactive” नहीं बल्कि “Proactive” मोड में काम कर रहा है।
ड्रोन सर्वे ने शासन की नीयत और नीतियों को स्पष्ट किया है कि अब कोई भी माफिया कानून से ऊपर नहीं।
इस कदम से न केवल खेरागढ़, बल्कि पूरे आगरा मंडल में अवैध खनन पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस सुधार होगा।
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