BREAKING: ऑपरेशन उटंगन पूर्ण: जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने की रेस्क्यू समाप्ति की घोषणा | आगरा में एनडीआरएफ-सेना का संयुक्त प्रयास सफल
आगरा में ऊटंगन नदी हादसे के बाद चला रेस्क्यू मिशन “ऑपरेशन उटंगन” सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने अंतिम शव बरामदगी के साथ समाप्ति की घोषणा की। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और ग्रामीणों के साहसिक प्रयास को सलाम।

“ऑपरेशन उटंगन” सफलतापूर्वक पूर्ण — जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने की रेस्क्यू ऑपरेशन की समाप्ति की घोषणा, जनपद आगरा ने देखा मानवीय समर्पण का अद्भुत उदाहरण
ब्यूरो चीफ – एस. शेरवानी
आगरा, 07 अक्टूबर 2025 |
आगरा। जनपद आगरा ने एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण देखा, जब “ऑपरेशन उटंगन” — जो बीते पाँच दिनों से लगातार चल रहा था — सोमवार शाम 6:10 बजे आखिरकार पूर्ण हुआ। जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने मृतक हरेश के शव की बरामदगी के साथ अभियान की समाप्ति की औपचारिक घोषणा की।
यह केवल एक रेस्क्यू मिशन नहीं था, बल्कि प्रशासन, सेना, और समाज के सामूहिक प्रयास का उदाहरण बन गया।
दुःखद शुरुआत: 2 अक्टूबर को नदी में डूबे थे 13 युवक
गांधी जयंती के दिन, तहसील खेरागढ़ क्षेत्र के ग्राम कुसियापुर/डूंगरवाला के पास ऊटंगन नदी में मूर्ति विसर्जन का आयोजन चल रहा था। श्रद्धा और उत्साह का माहौल था, लेकिन अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। भीड़ में से 13 युवक नदी में फिसलकर बह गए।
मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल बचाव का प्रयास किया, लेकिन तेज धारा के कारण अधिकांश युवक लापता हो गए।
कुछ ही देर में प्रशासन को सूचना दी गई। जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी, एसएसपी आगरा, और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे। जिले के उच्च अधिकारियों ने घटनास्थल से ही बचाव अभियान का नेतृत्व संभाल लिया।
मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा जिला प्रशासन से लगातार “ऑपरेशन उटंगन“ के दौरान ऑपरेशन उटंगन की प्रगति का जायजा लिया जा रहा था एवं “ऑपरेशन उटंगन“ मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा हर सम्भव मदद व सहयोग किया गया।
तत्काल शुरू हुआ “ऑपरेशन उटंगन” — दिन-रात चली राहत की लड़ाई

घटना की गंभीरता देखते हुए जिलाधिकारी ने इसे “ऑपरेशन उटंगन” नाम दिया।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की विशेष टीमें आगरा पहुंचीं और रात होते-होते राहत कार्य शुरू कर दिया गया। स्थानीय गोताखोरों, पुलिस बल, और पीएसी ने भी युद्धस्तर पर अभियान चलाया।
पहले दिन ओमपाल, गगन, और मनोज के शव नदी से बरामद किए गए।
जबकि विष्णु नामक युवक को स्थानीय ग्रामीणों ने जीवित निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
इससे प्रशासन को उम्मीद की एक किरण मिली, और पूरी टीम ने और तेजी से काम करना शुरू किया।
सेना की 411वीं पैराफील्ड कम्पनी भी आई मदद को
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने केंद्र से विशेष अनुरोध किया।
इसके बाद भारतीय सेना की 411वीं पैराफील्ड कम्पनी भी इस अभियान में शामिल हुई।
यह एक संपूर्ण समन्वित मिशन (Integrated Rescue Operation) बन गया — जिसमें जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, सेना और स्थानीय जनता एक साथ मैदान में डटे रहे।
नदी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग ने विशेष रूप से नदी के डायवर्जन का कार्य किया। इससे गोताखोरों को पानी के अंदर दृश्यता और नियंत्रण में मदद मिली।
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हर दिन बढ़ता गया प्रयास, मिली क्रमिक सफलता

रेस्क्यू टीमों ने दिन-रात बिना रुके काम किया।
3 अक्टूबर को भगवती और अभिषेक उर्फ भेला के शव मिले।
5 अक्टूबर को करण पुत्र रणवीर सिंह को बरामद किया गया।
6 अक्टूबर को वीनेश और ओके के शव नदी से निकाले गए।
7 अक्टूबर को सुबह से ही प्रयास और तेज हुए — सचिन पुत्र रामवीर, दीपक पुत्र सुख्खन, और गजेन्द्र पुत्र रेवती के शव कुछ घंटों के अंतराल में बरामद हुए।
अंत में शाम 6:10 बजे, जब हरेश का शव भी प्राप्त हुआ, तो पूरे क्षेत्र में एक भावनात्मक माहौल बन गया।
जिलाधिकारी ने उसी क्षण “ऑपरेशन उटंगन” की समाप्ति की घोषणा की।
जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी बोले — “यह सेवा और समर्पण की मिसाल है”
ऑपरेशन की सफलता के बाद जिलाधिकारी ने कहा —
“यह अभियान केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक मानवीय कर्तव्य था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, पुलिस, स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने जो समर्पण दिखाया, वह वाकई प्रेरणादायक है। इस ऑपरेशन में शामिल सभी कर्मियों को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि हर विभाग ने सीमित संसाधनों के बावजूद पूरा सामर्थ्य झोंक दिया। “जनता और प्रशासन का यह तालमेल आगरा के लिए गर्व की बात है।”
ग्रामीणों की भावनाएं — “हमने जिलाधिकारी को अपना माना”

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि जिलाधिकारी ने स्वयं पांच दिनों तक लगातार घटनास्थल पर रहकर पूरे ऑपरेशन की निगरानी की।
स्थानीय निवासी महेश शर्मा ने कहा —
“डीएम साहब रोज़ खुद नदी किनारे मौजूद रहते थे। उन्होंने हर परिवार से बात की, ढांढस बंधाया, और कहा — जब तक आखिरी शव नहीं मिलेगा, ऑपरेशन बंद नहीं होगा।”
यह वाक्य प्रशासनिक दृढ़ता और संवेदनशीलता दोनों का प्रतीक बना।
अंतिम क्षण — जब नदी किनारे उमड़ा सन्नाटा
जब हरेश का शव पानी से बाहर निकला, तो नदी किनारे मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
परिवारजनों ने एक-दूसरे को गले लगाया, और प्रशासनिक टीम ने भी मौन धारण किया।
सैकड़ों ग्रामीणों ने दीप जलाकर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
“ऑपरेशन उटंगन” बना मानवीय एकजुटता का प्रतीक
इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासन, सेना और समाज एकजुट होकर काम करते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
“ऑपरेशन उटंगन” आने वाले समय में संकट प्रबंधन और मानवीय समर्पण का उदाहरण बनकर याद किया जाएगा।
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