आगराउत्तर प्रदेश

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने कलेक्ट्रेट पर सौंपा ज्ञापन, सुरक्षा व मान्यता की उठी मांग

आगरा में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। पत्रकारों ने सुरक्षा, मान्यता, बीमा-पेंशन और सुविधाओं की मांग की। चेतावनी दी कि समाधान न मिलने पर आंदोलन तेज होगा।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने कलेक्ट्रेट पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, कहा – लोकतंत्र की रीढ़ को न करें नज़रअंदाज़

Saleem Sherwani

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)

आगरा, 16 सितंबर 2025 

आगरा। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, जिला आगरा इकाई ने सोमवार को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से आए पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
पत्रकारों का कहना था कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले पत्रकार न केवल योजनाओं को जनता तक पहुँचाते हैं बल्कि शासन-प्रशासन तक आम नागरिकों की आवाज़ भी पहुंचाते हैं। इसके बावजूद उन्हें सुरक्षा, मान्यता और सामाजिक सम्मान जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।

ग्रामीण पत्रकार क्यों महत्वपूर्ण हैं?

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ग्रामीण पत्रकारिता को अक्सर “लोकतंत्र की रीढ़” कहा जाता है क्योंकि –

  • यह जनता और सरकार के बीच सेतु का कार्य करती है।

  • ग्रामीण पत्रकार गाँवों की समस्याओं, योजनाओं की वास्तविक स्थिति और जनता की आवाज़ को निचले स्तर से ऊपर तक पहुंचाते हैं।

  • विषम परिस्थितियों, संसाधनों की कमी और कई बार जानलेवा जोखिम के बावजूद ग्रामीण पत्रकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इन्हीं पत्रकारों को न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही कोई स्थाई सुविधाएं। यही वजह रही कि आज एसोसिएशन को सामूहिक रूप से आवाज़ बुलंद करनी पड़ी।

पदाधिकारियों के विचार

जिलाध्यक्ष विष्णु सिकरवार का बयान

“ग्रामीण पत्रकार विषम परिस्थितियों में भी लोकतंत्र की धाराओं को मजबूत बना रहे हैं। योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाना और जनता की आवाज़ शासन तक पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन शासन-प्रशासन लगातार उपेक्षा कर रहा है। अब हमें ठोस कदम की उम्मीद है।”

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शंकर देव तिवारी का बयान

“ग्रामीण पत्रकार लोकतंत्र की रीढ़ हैं। यदि उन्हें सुरक्षा और सम्मान नहीं दिया गया तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी होगी। सरकार को तुरंत गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए, अन्यथा हम आंदोलन को और तेज़ करेंगे।”

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सात सूत्रीय मांगें – पत्रकारों ने क्या रखा मुद्दा?

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ज्ञापन में रखी गई मुख्य माँगें इस प्रकार रहीं –

  1. ग्रामीण पत्रकारों को सरकारी मान्यता प्रदान की जाए।

  2. लखनऊ में एसोसिएशन के लिए भवन आवंटित किया जाए।

  3. ग्रामीण पत्रकारों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाए।

  4. उन्हें बीमा और पेंशन योजना में शामिल किया जाए।

  5. पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करने से पहले राजपत्रित अधिकारी द्वारा जांच अनिवार्य की जाए।

  6. तहसील स्तर पर नियमित पत्रकार बैठकें कराई जाएं।

  7. दुर्घटना में मृत पत्रकार के परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने फर्जी पत्रकारिता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी रखी।

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प्रदर्शन में जुटे पत्रकार

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इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे जिनमें प्रमुख रूप से –
शंकर देव तिवारी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), विष्णु सिकरवार (जिलाध्यक्ष), श्रीकांत पाराशर (महामंत्री), मुहम्मद इस्माइल, सुरेश जारोलिया, शिवम सिकरवार, राजवीर सिंह, अशोक शर्मा, मुकेश शर्मा, नीलम ठाकुर, अजय मोदी, आशीष कुमार, अमित त्यागी, राजेश शर्मा, अनिल वित्थरिया, मोहन लाल जैन, संत कुमार भरद्वाज, और दर्जनों पत्रकार शामिल रहे।

उनकी सामूहिक उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण पत्रकारिता किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि सामूहिक ताकत की आवाज़ है।

निष्कर्ष – लोकतंत्र की रक्षा के लिए पत्रकार एकजुट

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का यह प्रदर्शन सिर्फ़ अपनी सुविधाओं के लिए नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र की मज़बूती के लिए था।
यह संदेश स्पष्ट है कि अगर पत्रकार सुरक्षित और सक्षम होंगे तभी लोकतंत्र की जड़ें मजबूत रहेंगी।

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