Agra Agriculture News: आलू की बुवाई शुरू: किसानों के लिए खुशखबरी, निःशुल्क मिनिकिट और पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध
आगरा में रबी सीजन की शुरुआत के साथ आलू की बुवाई तेज़। किसान राजकीय बीज भंडार से गेहूं-सरसों मिनिकिट निःशुल्क और जौ अनुदान पर प्राप्त कर सकते हैं। जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं, पारदर्शी टोकन सिस्टम से वितरण जारी।

Agra Agriculture News: आलू की बुवाई का समय शुरू — किसानों के लिए राहत, निःशुल्क मिनिकिट और पर्याप्त उर्वरक स्टॉक के साथ जिले में हो रही पारदर्शी आपूर्ति
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | दिनांक – 25 अक्टूबर 2025
रबी फसल के मौसम की दस्तक के साथ ही आगरा जनपद के किसानों के लिए खेती का सबसे अहम समय शुरू हो गया है। जिले में अब आलू की बुवाई जोरों पर है, और प्रशासन ने इस बार किसानों को हर संभव सहयोग देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने जानकारी दी कि इस बार किसानों को राजकीय कृषि बीज भंडारों से गेहूं और सरसों मिनिकिट निःशुल्क तथा जौ बीज अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कृषि विभाग की ओर से यह कदम छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है ताकि वे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की बुवाई कर सकें और बेहतर उपज प्राप्त करें।
कृषक करें आलू की उन्नत किस्मों की बुवाई — मृदा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें
कृषि अधिकारी ने कहा कि आलू की खेती में गुणवत्तापूर्ण बीज और संतुलित खाद का प्रयोग सफलता की कुंजी है।
उन्होंने कहा —
“किसान भाई बीज खरीदते समय सरकारी या प्रमाणित स्रोत से ही बीज लें और उसका पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें।”
उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति में निरंतर गिरावट देखी जा रही है।
रासायनिक खादों जैसे DAP, UREA, NPK आदि का अत्यधिक उपयोग मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को कम कर देता है, जिससे फसलें पौष्टिक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पातीं।
इसलिए किसानों को सलाह दी गई कि वे जैविक खाद, गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करें।
इससे न केवल मृदा में कार्बनिक तत्वों की मात्रा बढ़ेगी बल्कि मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव भी सक्रिय रहेंगे, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी।
उर्वरक आपूर्ति सुचारू, पारदर्शी टोकन सिस्टम से वितरण जारी
कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में किसी प्रकार की उर्वरक की कमी नहीं है।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग द्वारा उर्वरक रैक (fertilizer racks) की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।
किसानों को उर्वरक वितरण टोकन प्रणाली के तहत किया जा रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और कोई कालाबाज़ारी या भीड़भाड़ की स्थिति न बने।
अधिकारी ने कहा —
“जो किसान अभी बुवाई कर रहे हैं, केवल वही किसान वर्तमान में खाद प्राप्त करें। आने वाले दिनों में लगातार रैक लगती रहेंगी, इसलिए किसी प्रकार की घबराहट की आवश्यकता नहीं है।”
26 अक्टूबर को नई कृभको रैक लगेगी — मिलेगी 40,774 बैग DAP खाद
कृषि विभाग ने जानकारी दी कि 26 अक्टूबर 2025 को जिले में कृभको (KRIBHCO) की नई रैक लगने जा रही है।
इस रैक के माध्यम से 40,774 बैग DAP खाद जिले में पहुंचेगी।
इसमें से
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80 प्रतिशत उर्वरक सहकारी समितियों को
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20 प्रतिशत निजी उर्वरक विक्रेताओं को
आवंटित किया जाएगा।
किसान अपनी जोतवही के अनुसार संस्तुत मात्रा में खाद प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि हर किसान तक उर्वरक निष्पक्ष तरीके से पहुंचे, इसके लिए हर समिति की नियमित निगरानी की जा रही है।
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आगरा जिले में वर्तमान उर्वरक स्टॉक की स्थिति
कृषि विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है:
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यूरिया (Urea): 25,285 मीट्रिक टन
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डीएपी (DAP): 6,108 मीट्रिक टन
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एनपीके (NPK): 17,487 मीट्रिक टन
इन उर्वरकों की आपूर्ति विभिन्न सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से लगातार जारी है।
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कृषि विभाग की किसानों को प्रमुख सलाह
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बीज व खाद खरीदते समय केवल अधिकृत विक्रेताओं से पक्का बिल लें।
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मृदा परीक्षण (Soil Testing) कराकर उर्वरक की मात्रा तय करें।
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जैविक खाद का अधिक उपयोग करें — इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।
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टोकन सिस्टम से ही खाद प्राप्त करें, किसी बिचौलिए के माध्यम से नहीं।
- विभागीय वेबसाइट या कृषि विज्ञान केंद्र से समय-समय पर तकनीकी सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें।
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