आईआईएम इंदौर सर्वे टीम पहुंची खेरागढ़ थाने में | जनता से जानी राय, चेयरमैन ने दी फर्जी आईडी रोकने की सलाह
आईआईएम इंदौर की सर्वे टीम ने आगरा के खेरागढ़ थाने में जनता से कमिश्नरेट व्यवस्था पर राय जानी। चेयरमैन सुधीर गर्ग ने सोशल मीडिया की फर्जी आईडी रोकने पर जोर दिया। पीस कमेटी बैठक में सौहार्द बनाए रखने की अपील।

आईआईएम इंदौर की सर्वे टीम पहुंची खेरागढ़ थाने में, जनता से जानी राय – चेयरमैन ने दी फर्जी आईडी रोकने की अहम सलाह
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
खेरागढ़/आगरा।
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद से उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था को लेकर लगातार बहस और समीक्षा हो रही है। इसी कड़ी में आईआईएम इंदौर की एक विशेष सर्वे टीम आगरा ज़िले के थाना खेरागढ़ पहुंची। टीम का उद्देश्य था – यह समझना कि कमिश्नरेट प्रणाली ने जनता के जीवन और पुलिस-जन संबंधों पर क्या असर डाला है।
जनता से सीधे संवाद और सवाल-जवाब
सर्वे टीम ने आम नागरिकों को न केवल सुना बल्कि उन्हें एक प्रश्नावली (Questionnaire) भी दिया। इसमें कई महत्वपूर्ण सवाल शामिल थे, जैसे:
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क्या पुलिस की पहुँच अब पहले से तेज़ और आसान हुई है?
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क्या अपराधों पर रोकथाम के प्रयासों में सुधार आया है?
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जनता को किन क्षेत्रों में अभी भी दिक्कतें आती हैं?
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और सबसे अहम – आगे पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जनता के सुझाव क्या हैं?
इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व आईआईएम इंदौर के रिसर्च एसोसिएट शोभित रमन तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि “यह सर्वे ज़मीनी हकीकत को समझने और भविष्य की पुलिस नीतियों को और मज़बूत बनाने के लिए किया जा रहा है।”
चेयरमैन ने उठाई फर्जी आईडी की समस्या

कार्यक्रम के दौरान खेरागढ़ नगर पंचायत के चेयरमैन सुधीर गर्ग गुड्डू ने एक बेहद गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया – सोशल मीडिया पर बन रही फर्जी आईडी।
उन्होंने कहा कि फर्जी अकाउंट्स न सिर्फ़ अफवाहें फैलाते हैं बल्कि यह कई बार अपराध और आपसी वैमनस्य की वजह भी बनते हैं। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से अपील की कि इस पर ठोस रणनीति बनाई जाए ताकि आम जनता को राहत मिले।
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पुलिस और जनता की साझा पहल
सर्वे के साथ ही मौके पर पीस कमेटी की बैठक भी आयोजित हुई। इसमें थाना प्रभारी मदन सिंह, पुलिस स्टाफ, क्षेत्र के कई ग्राम प्रधान और संभ्रांत लोग शामिल हुए। बैठक में आने वाले त्योहारों और सामाजिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए शांति और सौहार्द बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया।
स्थानीय लोगों ने इस पहल को सराहा और कहा कि ऐसे आयोजन न केवल जनता को अपनी बात कहने का अवसर देते हैं बल्कि पुलिस और समाज के बीच भरोसा और सहयोग को भी मजबूत करते हैं।
क्यों है यह सर्वे अहम?
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कमिश्नरेट व्यवस्था का मूल्यांकन – जनता से सीधे राय लेकर यह तय किया जा सकेगा कि इस प्रणाली ने कितना असर डाला है।
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जनता की आवाज़ का महत्व – इस सर्वे के जरिए आम लोग अपने अनुभव और समस्याएँ सीधे नीति-निर्माताओं तक पहुँचा पा रहे हैं।
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डिजिटल सुरक्षा पर फोकस – सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी और साइबर अपराधों की बढ़ती समस्या को रोकने पर गंभीर चर्चा हुई।
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त्योहारों से पहले शांति का संकल्प – पुलिस और जनता ने मिलकर त्योहारों पर सौहार्द बनाए रखने का निर्णय लिया।
भविष्य के लिए संदेश
यह सर्वे एक उदाहरण है कि किस तरह शैक्षणिक संस्थान, पुलिस और जनता मिलकर समाज की चुनौतियों को समझ सकते हैं और समाधान ढूँढ सकते हैं। इससे न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी बल्कि आम नागरिकों का भी उस पर विश्वास और मज़बूत होगा।
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