Agra Breaking: नशा मुक्त भारत अभियान के 5 वर्ष: आगरा में स्कूलों, कॉलेजों और एनजीओ द्वारा मद्यनिषेध कार्यक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट
आगरा में नशा मुक्त भारत अभियान के 5 वर्ष पूर्ण होने पर विभिन्न विद्यालयों और संस्थाओं में नुक्कड़ नाटक, प्रतियोगिताएँ, संगोष्ठी और प्रदर्शनी आयोजित की गईं। मुख्य अतिथि नगर मजिस्ट्रेट अतीत वेद सिंह चौहान ने नशामुक्ति शपथ दिलाई।

नशा मुक्त भारत अभियान के 5 वर्ष पूरा—आगरा में बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम
विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन ने मिलकर दिया—‘नशा छोड़ो, जीवन संवारो’ का संदेश
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 18 नवंबर 2025
भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान को पांच वर्ष पूरे होने पर पूरे देश की तरह आगरा में भी जागरूकता गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की गई।
शहर के विद्यालयों, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने एक साथ मिलकर यह संदेश दिया कि—
“नशे से मुक्त समाज ही स्वस्थ, सुरक्षित और प्रगतिशील भारत की नींव है।”
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय संगठन आगरा–3 में भव्य समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत नगर मजिस्ट्रेट अतीत वेद सिंह चौहान के आगमन से हुई।
विद्यालय में छात्रों द्वारा बनाई गई थीम-आधारित पोस्टर गैलरी, प्रदर्शनी कक्ष, और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
नुक्कड़ नाटक—‘एक नशे की कीमत’
छात्रों ने बेहद प्रभावशाली नाटक प्रस्तुत किया जिसमें दिखाया गया कि—
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कैसे एक साधारण प्रयोग धीरे-धीरे लत में बदलता है
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नशा परिवार, शिक्षा, करियर, रिश्ते और मानसिक स्वास्थ्य को कैसे तहस-नहस करता है
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और अंत में नशा किस तरह व्यक्ति को जीवन के सबसे अंधेरे मोड़ पर पहुंचा देता है
नाटक ने उपस्थित दर्शकों की आँखें नम कर दीं।
वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से नशे की व्याख्या—बच्चों के लिए पहली बार यह स्तर का ज्ञान

विशेष वक्ता विमल कुमार ने उन बिन्दुओं पर प्रकाश डाला जिनके बारे में आमतौर पर छात्र अनभिज्ञ रहते हैं:
✔ नशा कैसे शुरू होता है?
उन्होंने समझाया कि किसी भी नशे में मौजूद रसायन मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ाते हैं।
यह अतिरिक्त आनंद बार–बार नशा करने की मजबूरी पैदा करता है।
✔ नशा ‘आदत’ नहीं—एक ‘मस्तिष्क रोग’ है
उन्होंने बताया कि यह मस्तिष्क के प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स को कमजोर करता है, जहां निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण का केंद्र होता है।
✔ नशे का सबसे बड़ा शिकार कौन?
12–25 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे और युवा।
विमल कुमार की प्रस्तुति बच्चों के लिए एक आँखें खोल देने वाला अनुभव रही।
प्रधानाध्यापक उपेंद्र कुमार ने बताया—शरीर पर नशे का क्रूर प्रभाव

प्रधानाध्यापक ने कहा—
“नशा शरीर को भीतर से चुपचाप नष्ट करता है।”
उन्होंने प्रभावों की विस्तृत सूची साझा की:
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लीवर सिरोसिस
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पेट का अल्सर
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मानसिक असंतुलन
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पीलिया
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नशे के बाद हार्मोनल बदलाव
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नपुंसकता
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हड्डियों की कमजोरी
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प्रतिरोधक क्षमता का खत्म होना
उन्होंने बच्चों से हाथ जोड़कर अपील की—
“किसी भी तनाव, जिज्ञासा या फैशन के कारण नशे के पास ना जाएं।”
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मध्य निषेध एवं समाज उत्थान अधिकारी का संदेश—‘नशा परिवार को तोड़ देता है’
आलोक कुमार ने कहा कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि
✔ परिवार,
✔ बच्चों,
✔ माता-पिता,
✔ आर्थिक स्थिति,
✔ रिश्तों,
✔ और पूरे समाज
को प्रभावित करता है।
उन्होंने बताया कि आगरा में पिछले 5 वर्षों में नशे से जुड़े मामलों में किशोर आयु की संलिप्तता में वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण—
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गलत संगति
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सोशल मीडिया पर ड्रग ग्लोरिफिकेशन
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तनाव
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प्रतिस्पर्धा
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परिवार का दबाव
बताया गया।
राज इंटर कॉलेज कहरई मोड़—छात्रों की ऊर्जा और सामाजिक संदेश का शानदार मेल
यहां आयोजित नशामुक्ति कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी कला और सोच का अद्भुत परिचय दिया।
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प्रेरणादायक भाषण
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आकर्षक पोस्टर
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स्किट
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वाद-विवाद
ने सभी को प्रभावित किया।
पुरस्कार वितरण में
राजीव रावत,
अध्यापिका बीना शाक्य,
और जिला नशा मुक्ति केंद्र के विशेषज्ञ सचिन परिहार मौजूद रहे।
यह कार्यक्रम छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता हुआ दिखाई दिया।
इंदिरा फाउंडेशन द्वारा श्री राम इंटर कॉलेज में कार्यक्रम—एनजीओ का महत्वपूर्ण योगदान

इंदिरा फाउंडेशन ने बच्चों को यह सिखाया कि
नशामुक्त समाज निर्माण में युवा सबसे बड़ी शक्ति हैं।
कार्यक्रम में—
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नाटक
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पोस्टर प्रतियोगिता
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भाषण प्रतियोगिता
आयोजित की गईं।
एनजीओ संचालक सौरभ पाराशर, पुष्पेंद्र मिश्रा और विद्यालय के प्रधानाध्यापक रमाकांत मिश्रा की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष महत्त्व दिया।
आगरा में एक स्वर—‘नशा मुक्त भारत’ की राह बच्चों से होकर जाती है
इस वर्ष के कार्यक्रमों में एक खास बात रही—
बच्चे अब नशे के दुष्प्रभाव को ‘सुन’ नहीं, बल्कि उसे विज्ञान और उदाहरणों के साथ ‘समझ’ रहे हैं।
ये कार्यक्रम बच्चों को
✔ गलत संगति से बचने,
✔ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने,
✔ विषम परिस्थितियों में संवाद से हल खोजने,
✔ और नशे को सामाजिक अपराध की तरह देखने
की प्रेरणा दे रहे हैं।
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