मीना मंच “मीना जन्मदिवस” : बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण में प्रेरक पहल – फतेहाबाद, आगरा
फतेहाबाद, आगरा में मीना मंच ने मीना जन्मदिवस के अवसर पर बालिकाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने हेतु भव्य कार्यक्रम आयोजित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा को नई दिशा देने वाली यह पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है।
मीना मंच “मीना जन्मदिवस”: बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण में नई क्रांति
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा/फतेहाबाद – 24 सितम्बर 2025
फतेहाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय भलोखरा कंपोजिट में आज मीना मंच द्वारा आयोजित मीना जन्मदिवस समारोह का भव्य आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम ने बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और ग्रामीण समाज को बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के महत्व से जोड़ते हुए एक प्रेरणादायक संदेश दिया।
समारोह का संपूर्ण दृश्य
विद्यालय प्रांगण बच्चों के हर्षोल्लास, गीत-संगीत और रंगारंग सजावट से जगमगा उठा। अभिभावकों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे और भी खास बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत समारोह और दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और शिक्षाप्रद गतिविधियों का आयोजन किया गया।
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छात्राओं ने नाटक और कविता के माध्यम से बालिकाओं के अधिकार और शिक्षा के महत्व को प्रदर्शित किया।
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अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेकर बालिकाओं के प्रति समाज की सोच में बदलाव की दिशा को सराहा।
बालिकाओं के लिए शिक्षा और सशक्तिकरण का मंच

नोडल अध्यापक एवं जिला मास्टर ट्रेनर अनिल कुमार ने समारोह में बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा:
“मीना मंच बालिकाओं को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें समाज में आत्मनिर्भर और नेतृत्व क्षमता से लैस बनाने की दिशा में काम करता है। यह मंच बालिकाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने, सोचने और निर्णय लेने का अवसर प्रदान करता है।”
विद्यालय के प्राचार्य राजीव कुमार, सहायक अध्यापक धर्मेश चन्द्रा, विवेक कुमार, उम्मेद सिंह, तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिथिलेश ने बच्चों को शिक्षित करने, उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और अभिभावकों को जागरूक करने में सहयोग किया।
मीना मंच के प्रमुख उद्देश्य
मीना मंच का निर्माण ग्रामीण समाज की बेटियों को शिक्षा और समान अवसर देने के लिए किया गया। इसके उद्देश्य हैं:
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बालिकाओं में आत्मविश्वास का विकास – मंच के माध्यम से छात्राओं को अपनी प्रतिभा और सोच को व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
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नेतृत्व क्षमता का निर्माण – बैठकों और गतिविधियों के दौरान छात्राएं समूह नेतृत्व, समस्या समाधान और टीमवर्क सीखती हैं।
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सामाजिक जागरूकता बढ़ाना – बाल विवाह, बाल श्रम और लिंगभेद जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ चर्चा और अभियान।
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शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना – बालिकाओं को पढ़ाई, खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में बराबरी का मौका देना।
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भविष्य की महिला सशक्तीकरण रणनीति – बच्चियों को आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में लंबी अवधि की योजना।
ग्रामीण समाज में परिवर्तन की नई लहर

मीना मंच की गतिविधियों ने ग्रामीण समाज में ठोस बदलाव की शुरुआत की है:
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कई अभिभावक अब अपनी बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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मंच की मदद से बाल विवाह और बाल श्रम के मामलों में कमी देखी जा रही है।
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बालिकाएँ स्कूल और समाज में खुलकर अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल में सुधार हो रहा है।
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बच्चों और अभिभावकों में सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का विकास हुआ है।
शिक्षा और जीवन कौशल का समन्वय

मीना मंच केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह बच्चियों में सकारात्मक सोच, जीवन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करता है।
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सांस्कृतिक गतिविधियाँ – कला, संगीत और नाटक के माध्यम से व्यक्तित्व विकास।
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स्मार्ट सीखने की पहल – टीएलएम और नवाचारी शिक्षण विधियों से सीखने में रुचि बढ़ाना।
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सामाजिक मुद्दों पर चर्चा – बाल विवाह, बाल श्रम, लिंगभेद और समान अवसर।
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नेतृत्व और आत्मनिर्भरता – टीम कार्य, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास का विकास।
निष्कर्ष
मीना जन्मदिवस का यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि बालिकाओं की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के प्रति ग्रामीण समाज में नई सोच का प्रतीक बन गया।
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यह मंच दिखाता है कि शिक्षा और सशक्तिकरण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में मीना मंच ने बेटियों की शिक्षा और समाज में उनके अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस और प्रेरक कदम उठाया है।
“जब बेटियाँ शिक्षित और आत्मनिर्भर होंगी, तभी समाज और राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित होगी।”
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