BREAKING: ऑपरेशन उटंगन: आगरा DM अरविंद मल्लप्पा बंगारी बोले — “यह मेरे जीवन का सबसे कठिन और भावनात्मक बचाव अभियान था”
आगरा में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने प्रेस वार्ता में “ऑपरेशन उटंगन” की कहानी बताई। नदी की गहराई, तकनीकी चुनौतियों और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा सबसे कठिन रेस्क्यू अभियान, जिसमें सेना, एनडीआरएफ और ग्रामीणों ने निभाई अहम भूमिका।

“ऑपरेशन उटंगन” — जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी बोले: यह मेरे जीवन का सबसे कठिन और भावनात्मक बचाव अभियान था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी में चला उत्तर प्रदेश का सबसे जटिल रेस्क्यू मिशन, नदी की गहराई से निकले 12 युवकों के शव, मानवता और प्रशासन की एक मिसाल
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | 08 अक्टूबर 2025
दुःख, संवेदना और उम्मीद का संगम बना “ऑपरेशन उटंगन”
आगरा के इतिहास में 2 अक्टूबर 2025 का दिन हमेशा याद रखा जाएगा — जब खेरागढ़ क्षेत्र के कुसियापुर/डूंगरवाला गांव में ऊंटगन नदी में मूर्ति विसर्जन के दौरान 13 युवक नदी की गहराई में समा गए।
घटना के बाद जिलेभर में शोक और चिंता का माहौल था। परिवारों की चीखें, गांव की सन्नाटा, और आसमान में गूंजती पुकारें… यह सब प्रशासन के लिए एक बड़ा भावनात्मक क्षण बन गया।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने उस शाम का ज़िक्र करते हुए प्रेस वार्ता में कहा —
“उस क्षण जब हमने पानी की लहरों में परिजनों की उम्मीदें देखीं, तो हमें अहसास हुआ कि यह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि एक मानवीय मिशन है। यह मेरे जीवन का सबसे कठिन और भावनात्मक बचाव अभियान था।”
कैसे शुरू हुआ रेस्क्यू — एक-एक पल की लड़ाई
घटना की सूचना मिलते ही तत्काल एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, पीएसी और जिला प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुँचीं।
पहले चरण में स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस कर्मियों ने मिलकर चार युवकों को ढूंढा — जिनमें से एक को जीवित बचा लिया गया।
इसके बाद शुरू हुआ एक लंबा और थकाऊ अभियान — जिसे बाद में नाम दिया गया “ऑपरेशन उटंगन”।
नदी का तेज़ बहाव, असमान गहराई और मिट्टी की मोटी परतें इस मिशन को बेहद जटिल बना रही थीं।
टीमें लगातार गोते लगाती रहीं, पर नदी का तल ऐसा था जहाँ हर बार हाथ खाली लौटता।
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तकनीकी रणनीति और विशेषज्ञों का योगदान
तीसरे दिन जिलाधिकारी ने ऑपरेशन की दिशा बदल दी।
उन्होंने न सिर्फ राज्य प्रशासन बल्कि मर्चेंट नेवी के तकनीकी विशेषज्ञों से संपर्क किया।
उनकी सलाह पर रेस्क्यू दल ने पहली बार “प्रेशर एयर कम्प्रेशन तकनीक”, मेटल रॉड्स, और पाइपिंग सिस्टम का उपयोग किया।
इस तकनीक से नदी की तलहटी की गाद को हटाया गया — और पहली बार गहराई में मौजूद शवों की सटीक स्थिति का पता चला।
धीरे-धीरे एक-एक कर सभी शवों को निकाला गया।
जिलाधिकारी ने कहा —
“कई बार ऐसा लगा कि नदी हमें हार मानने पर मजबूर कर देगी, पर हर अधिकारी, हर सिपाही और हर गोताखोर ने उस उम्मीद को जीवित रखा। अंततः हमने यह मिशन पूरा किया।”
07 अक्टूबर की शाम 6:10 बजे जब अंतिम शव — हरेश का मिला, तो ऑपरेशन उटंगन पूर्ण हुआ।
पूरा गांव उस क्षण मौन था — पर हर किसी की आंखों में संतोष और श्रद्धांजलि की चमक थी।
प्रशासनिक समन्वय और ग्रामीणों की एकता ने बदली तस्वीर
रेस्क्यू के दौरान जिलाधिकारी ने पड़ोसी जिलों भरतपुर, करौली और धौलपुर के अधिकारियों से संपर्क कर नदी में पानी छोड़े जाने पर रोक लगवाई।
सिंचाई विभाग और पंचायत राज विभाग की सहायता से नदी पर एक अस्थायी मिट्टी का तटबंध (temporary embankment) बनाया गया।
इससे नदी का जलस्तर नियंत्रित हुआ और बचाव दलों को गहराई तक पहुंचने में सफलता मिली।
ग्रामीणों ने अपने निजी संसाधन, नावें, रस्सियाँ और ट्रैक्टर तक उपलब्ध कराए।
“ऑपरेशन उटंगन” इस मायने में अनोखा था कि इसमें सरकार, प्रशासन और जनता — तीनों एकजुट होकर एक ही लक्ष्य के लिए कार्यरत थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंत्री जयवीर सिंह का सक्रिय सहयोग
जिलाधिकारी बंगारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस अभियान की प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय से ले रहे थे।
मुख्यमंत्री ने लगातार जिला प्रशासन को हर प्रकार के सहयोग का आश्वासन दिया।
वहीं, पर्यटन मंत्री एवं जनपद प्रभारी जयवीर सिंह ने भी स्थल पर जाकर अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया।
जिलाधिकारी ने कहा —
“मुख्यमंत्री जी के सतत निर्देशन और मंत्री जयवीर सिंह जी के सहयोग से हमें निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिली। यह टीमवर्क ही हमारी सफलता का आधार बना।”
जिन्होंने दिया सहयोग, उन्हें मिलेगा सम्मान
प्रेस वार्ता के दौरान जिलाधिकारी ने घोषणा की —
“ऑपरेशन उटंगन में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, सेना के जवानों, गोताखोरों, मीडिया प्रतिनिधियों और ग्रामीणों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि इंसानियत की परीक्षा थी — और हर वह व्यक्ति जिसने इसमें योगदान दिया, वह सम्मान का अधिकारी है।
दुःख से सीख और मानवता का संदेश

जिलाधिकारी बंगारी भावुक स्वर में बोले —
“इन 12 युवाओं को हम वापस नहीं ला सके, लेकिन हमने उनके परिवारों के लिए न्याय और सम्मान सुनिश्चित किया। इस हादसे ने हमें सिखाया कि प्रशासनिक पद केवल आदेश देने के लिए नहीं, बल्कि मानवता निभाने के लिए भी होता है।”
ऑपरेशन उटंगन में सम्मिलित प्रमुख इकाइयाँ
| इकाई | सदस्य संख्या | योगदान |
|---|---|---|
| सेना की 411वीं पैराफील्ड कम्पनी | 19 | विशेष स्कूवा डाइविंग ऑपरेशन |
| एनडीआरएफ (गाजियाबाद + इटावा) | 37 | तकनीकी बचाव और गहराई मापन |
| एसडीआरएफ टीम | 15 | सतही खोज और रस्सी ऑपरेशन |
| पीएसी बल | 27 | सुरक्षा व प्रकाश व्यवस्था |
| सिंचाई व नगर विकास विभाग | — | तटबंध निर्माण और जलस्तर नियंत्रण |
| स्थानीय ग्रामीण व गोताखोर | — | रात्रि बचाव में सहयोग |
ऑपरेशन उटंगन की उपलब्धियाँ
-
नदी के तेज बहाव और गहराई के बावजूद सभी शव बरामद
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24 घंटे कार्यरत बहु-विभागीय समन्वय
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अत्याधुनिक तकनीकी प्रयोग (Compressed Air & Metal Rod Method)
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स्थानीय सहभागिता के साथ प्रशासनिक सफलता
जिलाधिकारी का संदेश
“ऑपरेशन उटंगन सिर्फ एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की मानवीय संवेदना और टीम स्पिरिट का प्रतीक है। मैं इस मिशन में जुड़े हर व्यक्ति को सलाम करता हूँ।”
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