
राष्ट्रीय गणित दिवस पर महान गणितज्ञ रामानुजन को किया गया भावपूर्ण स्मरण
रामानुजन इंटरनेशनल स्कूल में शैक्षणिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों के साथ मनी 138वीं जयंती
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
खेरागढ़ / आगरा। 22 दिसंबर 2025
गणित को नई दिशा देने वाले विश्वविख्यात भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के अवसर पर 22 दिसंबर को पूरे देश में राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में खेरागढ़ स्थित रामानुजन इंटरनेशनल स्कूल में इस दिवस को अत्यंत उत्साह, गरिमा और शैक्षिक वातावरण के साथ मनाया गया। विद्यालय प्रांगण गणितीय गतिविधियों, रंग-बिरंगे चार्ट, मॉडल और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों से जीवंत नजर आया।
गणितीय चेतना का पर्व बना राष्ट्रीय गणित दिवस
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक महान गणितज्ञ को याद करना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के मन से गणित के प्रति भय को दूर कर इसे रोचक, उपयोगी और जीवन से जुड़ा विषय बनाना भी था। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने इस अवसर को गणितीय चेतना के पर्व के रूप में मनाया, जिसमें हर कक्षा के विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।
गणित विषय पर आधारित विविध प्रतियोगिताएं

राष्ट्रीय गणित दिवस के उपलक्ष्य में विद्यालय परिसर में गणित विषय से संबंधित अनेक शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें गणित क्विज, मानसिक गणना प्रतियोगिता, गणितीय पहेली, चार्ट एवं मॉडल निर्माण, ज्यामितीय आकृति प्रदर्शन जैसी गतिविधियां शामिल रहीं।
छात्र-छात्राओं ने गणित की विभिन्न अवधारणाओं को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। कहीं संख्या सिद्धांत की झलक दिखी, तो कहीं गणितीय सूत्रों को दैनिक जीवन से जोड़कर दर्शाया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी गणित की झलक
कार्यक्रम को और अधिक रोचक बनाने के लिए गणित पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने गणितीय विषयों पर आधारित नाटक, लघु अभिनय (एक्ट) और नृत्य प्रस्तुत किए, जिनमें गणित के महत्व, उपयोगिता और सुंदरता को सरल भाषा और कला के माध्यम से दर्शाया गया।
इन प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि गणित केवल किताबों का विषय नहीं, बल्कि कला, विज्ञान और जीवन का अभिन्न अंग है।
विद्यार्थियों ने साझा की रामानुजन से जुड़ी जानकारी
विद्यालय की छात्रा तनिष्का अग्रवाल ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में हुआ था। उन्होंने कहा कि जिस गणित से अधिकांश विद्यार्थी डरते हैं, रामानुजन उसी विषय से गहरा प्रेम करते थे।
यही कारण है कि उन्हें “गणित का जादूगर” कहा जाता है। उन्होंने गणित के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जो आज भी शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
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बिना औपचारिक शिक्षा के असाधारण उपलब्धियां
श्रीनिवास रामानुजन का जीवन संघर्ष, साधना और प्रतिभा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने गणित की कोई औपचारिक उच्च शिक्षा प्राप्त किए बिना ही कई जटिल गणितीय सिद्धांतों का प्रतिपादन किया।
उनका योगदान मैथमेटिकल एनालिसिस, इंफाइनाइट सीरीज, कंटीन्यूड फ्रैक्शंस और नंबर थ्योरी जैसे कठिन क्षेत्रों में रहा, जिन्हें आज भी आधुनिक गणित की नींव माना जाता है।
2012 में घोषित हुआ राष्ट्रीय गणित दिवस
भारत सरकार ने वर्ष 2012 में रामानुजन के अतुलनीय योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
यह दिवस विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह संदेश देता है कि गणित से डरने के बजाय उसकी तार्किक शक्ति और रचनात्मक सुंदरता को समझना चाहिए।
आधुनिक तकनीक में भी प्रासंगिक हैं रामानुजन

आज के युग में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, कोडिंग, क्वांटम मैकेनिक्स और ब्लैक होल रिसर्च जैसे क्षेत्रों का तेजी से विकास हो रहा है, वहां गणित की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
रामानुजन द्वारा दिए गए सूत्र और सिद्धांत आज भी इन उन्नत विज्ञान क्षेत्रों में उपयोग किए जा रहे हैं, जो उनकी दूरदर्शिता और प्रतिभा को दर्शाता है।
छोटा जीवन, लेकिन अमर विरासत
श्रीनिवास रामानुजन का जीवनकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन उनकी गणितीय विरासत अमर है। 26 अप्रैल 1920 को मात्र 32 वर्ष की आयु में टीबी और पोषण की कमी के कारण उनका निधन हो गया।
अपने छोटे से जीवन में उन्होंने 3900 से अधिक गणितीय परिणाम दिए, जिनमें अधिकांश आइडेंटिटीज़ और इक्वेशन्स शामिल हैं। ये आज भी गणितज्ञों के लिए शोध और अध्ययन का विषय बने हुए हैं।
विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की सराहनीय भूमिका
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक इंजीनियर गौरव जिंदल, प्रधानाचार्य डॉ. मोहिनी जिंदल, उप प्रधानाचार्य एम. आर. खान सहित अजय माहेश्वरी, प्रगति जैन, हिना यादव, मनेंद्र सिंह, अंजना वर्मा, सत्येंद्र चाहर, गार्गी बघेल, सोनिया सिंह एवं अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
सभी ने विद्यार्थियों को गणित को बोझ नहीं, बल्कि सोचने और समझने की शक्ति के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
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