TET EXAM NEWS 2025: टीईटी अध्यादेश पर बवाल: यूटा ने कहा सरकार वापस ले फैसला, दिल्ली में लाखों शिक्षक करेंगे प्रदर्शन
यूटा ने टीईटी अनिवार्यता अध्यादेश को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। आगरा में शिक्षकों का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को ज्ञापन और जल्द दिल्ली में 30 लाख शिक्षकों के ऐतिहासिक धरने की तैयारी।
TET EXAM NEWS 2025: टीईटी की अनिवार्यता अध्यादेश को लेकर शिक्षकों में गुस्सा, यूटा बोला– सरकार वापस ले यह निर्णय
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 20 सितंबर 2025
शिक्षा जगत में इस समय सबसे बड़ी बहस का मुद्दा है टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता। शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त हुए हजारों अध्यापक इस अध्यादेश से गहरी चिंता में हैं। वे मानते हैं कि यह आदेश उनके वर्षों के अनुभव और सेवा को दरकिनार करता है। इसी को लेकर यूटा (यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन) के बैनर तले शिक्षक लगातार आंदोलित हैं और सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल चुके हैं।
पृष्ठभूमि: अध्यादेश कब और कैसे आया?
शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्ष 2017 में सरकार ने चुपचाप एक अध्यादेश जारी किया, जिसमें यह प्रावधान किया गया कि RTE लागू होने से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करनी होगी।
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यह अध्यादेश लगभग आठ वर्षों तक फाइलों में दबा रहा।
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अब जब इसे लागू करने की कोशिश की जा रही है, तो शिक्षकों में आक्रोश भड़क उठा है।
शिक्षकों का तर्क है कि जिन लोगों ने 15-20 साल पहले सेवा शर्तें पूरी कर नियमित नियुक्ति पाई, उन्हें अचानक नई शर्तों से बांधना उनके साथ सीधा अन्याय है।
आगरा में जोरदार प्रदर्शन और ज्ञापन
जनपद आगरा में हजारों शिक्षकों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। उनका कहना है कि:
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टीईटी अनिवार्यता की शर्त को तुरंत वापस लिया जाए।
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लंबे अनुभव वाले शिक्षकों को प्रशिक्षण और अपस्किलिंग देकर अपडेट किया जा सकता है, लेकिन उनकी नौकरी पर संकट नहीं डाला जाना चाहिए।
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यूटा की मासिक बैठक: आंदोलन उग्र करने का फैसला
बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूटा के जिलाध्यक्ष के.के. शर्मा ने कहा कि जनपद में इस समस्या से प्रभावित करीब दो हजार शिक्षक हैं जिनमें से विभागीय मानक के अनुसार करीब 800 शिक्षक टीईटी हेतु आवेदन ही नहीं कर सकते हैं.
वहीं संगठन के प्रदेश कोषाध्यक्ष वीपी बघेल ने शिक्षकों में आंदोलन करने के लिए जोश भरा उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2017 में गुपचुप तरीके से जो अध्यादेश जारी किया वह आठ साल फाइल में ही कैद रहा जो शिक्षकों के साथ बड़ा षड्यंत्र है.
हरीपर्वत स्थित यूटा जिला कार्यालय में हुई मासिक बैठक में यह तय हुआ कि आंदोलन अब और तेज़ व राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जाएगा।
बैठक के मुख्य बिंदु:
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प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि देशभर के संगठनों से संपर्क हो रहा है।
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यूटा की योजना है कि सभी शिक्षक संगठन एक मंच पर आएं और दिल्ली में ऐतिहासिक व बेमियादी धरना प्रदर्शन करें।
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संगठन मंत्री यादवेंद्र शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही करीब 30 लाख शिक्षक दिल्ली जाम करेंगे।
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कितने शिक्षक प्रभावित?
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केवल आगरा जनपद में लगभग 2,000 शिक्षक प्रभावित हैं।
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इनमें से लगभग 800 शिक्षक विभागीय मानकों के अनुसार टीईटी के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते।
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प्रदेश स्तर पर यह संख्या लाखों में पहुंच रही है, जिससे यह मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।
“2017 का अध्यादेश शिक्षकों के खिलाफ षड्यंत्र”
प्रदेश कोषाध्यक्ष वी.पी. बघेल ने कहा:
“सरकार ने 2017 में जो अध्यादेश जारी किया था, उसे आठ साल तक दबाए रखा। यह सीधे-सीधे शिक्षकों के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र है। हम इसे किसी भी हाल में लागू नहीं होने देंगे।”
शिक्षकों का तर्क: अनुभव और योग्यता का सम्मान हो
जिला महामंत्री राजीव वर्मा ने कहा कि:
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जो शिक्षक 15-20 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उन्हें अचानक नौकरी से निकालना गलत है।
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नई पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
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लेकिन टीईटी की शर्त से उन्हें नौकरी से बाहर करना क्रांति को जन्म देगा।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आगरा में शिक्षकों का हल्ला बोल – प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
बैठक में शामिल प्रमुख पदाधिकारी और शिक्षक
बैठक में कई प्रमुख शिक्षक नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे:
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वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चाहर,
- संचालन राजीव वर्मा ने किया
- संयुक्त मंत्री आनंद शर्मा, हरेन्द्र राना, सुशील शर्मा,
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निधि वर्मा, अशोक शर्मा, ज्योति माहेश्वरी, रमाशंकर पाराशर,
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निधि श्रीवास्तव, सौरभ शर्मा, प्रेमवीर शर्मा,
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चारु मित्रा, सुशील जायसवाल, अमित राजोरिया, मंजीत सिंह, विजय कुमार,
सहित बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाएं और युवा शिक्षक भी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: दिल्ली की ओर बढ़ेगा आंदोलन
टीईटी की अनिवार्यता अध्यादेश को लेकर शिक्षकों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा।
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आगरा से शुरू हुई यह लड़ाई अब देशभर में फैल चुकी है।
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शिक्षक संगठन साफ कर चुके हैं कि अगर सरकार ने अध्यादेश वापस नहीं लिया तो दिल्ली में ऐतिहासिक और लंबा आंदोलन होगा।
यह मुद्दा सिर्फ नौकरी बचाने का नहीं, बल्कि शिक्षक सम्मान और अनुभव की रक्षा का है।
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